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‘जिनके भी भावों में संकीर्णता के कीटाणु हैं वे खतरनाक हैं’

Bhaskar News Network

Apr 17, 2019, 08:41 AM IST

Mandsour News - भास्कर संवाददाता | पिपलियामंडी विभिन्न मान्यता वाले विभिन्न धर्मवाले एक धर्मशाला में एक साथ रुक सकते हैं। एक...

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भास्कर संवाददाता | पिपलियामंडी

विभिन्न मान्यता वाले विभिन्न धर्मवाले एक धर्मशाला में एक साथ रुक सकते हैं। एक साथ बैठ सकते हैं, एक साथ खा सकते हैं। व्यापार-शादी सब कुछ कर सकते हैं तो फिर एक ही प्रभु की संतान को एक साथ मिलकर बैठने में क्या आपत्ति है। जिनके भावों में विशालता नहीं संकीर्णता के कीटाणु निर्मित हुए वह परमाणु बम से भी खतरनाक है।

यह बात कमलमुनि कमलेश ने कही। उन्होंने रामनवमी महावीर जयंती और हनुमान जयंती एक साथ मिलकर समन्वय और सद्भाव के रूप में मनाने का निर्णय लिया है। मंगलवार को मुनिश्री ने कहा कि महापुरुषों के नाम पर टकराने वाले अपने हाथों से उनके मुंह पर कालिख पोत कर पाप कमा रहे हैं। उन्होंने कहा कि ना राम खतरे में हैं ना अल्लाह खतरे में हैं। धर्म जोड़ता है तोड़ता नहीं। धर्म की ओट में बिखराव अक्षम्य अपराध है।

महावीर जयंती की पूर्व संध्या पर राष्ट्रीय आध्यात्मिक कवि सम्मेलन का आयोजन किया है। वीरवाल जैन समाज सिंदपन की ओर से कमलमुनि कमलेश के सान्निध्य में महावीर जयंती मनाई गई। समारोह की अध्यक्षता विधायक यशपालसिंह सिसौदिया ने की। अतिथि भाजपा प्रदेश महामंत्री बंशीलाल गुर्जर, कांग्रेस जिला उपाध्यक्ष महेंद्रसिंह गुर्जर, पाटीदार समाज के अध्यक्ष ब्रह्मानंद पाटीदार मौजूद थे।

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