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क्रांतिकारी मुनिश्री प्रतीकसागरजी का 20 साल बाद मंगल प्रवेश एवं धर्मसभा आज
पुष्पदंतसागर महाराज के शिष्य मुनिश्री प्रतीकसागरजी का 20 साल बाद शुक्रवार को सुबह 8.30 बजे मंगल प्रवेश होगा। डाॅ. अरविंद जैन ने बताया कि मुनिश्री का 2001 में क्रांतिकारी संत मुनिश्री तरुणसागर महाराज के साथ सीतामऊ में आगमन हुआ था। इसके बाद अब आ रहे हैं। शोभायात्रा एमपी पब्लिक स्कूल, पुलिस थाने से बैंड-बाजों के साथ निकलेगी। सुबह 9.30 बजे पंचायत भवन मैदान में धर्मसभा होगी। मुनिश्री का जन्म 23 अक्तूबर 1980 में भिंड जिले में हुआ था। गृह त्याग 6 अप्रैल 1993 में, मुनि दीक्षा 24 अप्रैल 1999 पानीपत हरियाणा में हुई।
15 से शुरू होगा सर्व धर्म सत्संग महोत्सव : सर्व धर्म सत्संग महोत्सव 15 से 19 मार्च तक सुबह 8.30 से 10.30 बजे तक पंचायत भवन मैदान में आयोजित होगा। कार्यक्रम स्थान पर 5 हजार श्रद्धालुओं के एक साथ बैठने के लिए पंडाल का निर्माण किया जा रहा है।
रोज सुबह करें प्रणाम, प्रार्थना और परोपकार, जीवन में होगा चमत्कार - ललितप्रभजी
दलौदा | राष्ट्रसंत ललितप्रभ महाराज ने कहा कि सुबह उठते ही भगवान का नाम बाद में लें, पहले यह संकल्प करें कि मैं अपने कर्तव्यों के प्रति निष्ठावान रहूंगा। गॉड का अर्थ है गो ऑन ड्यूटी अर्थात अपने कर्तव्य को निभाना। केवल मंदिर जाकर प्रतिमाजी का अभिषेक करना ही भगवान की पूजा नहीं है। वरन धरती को सुंदर, स्वस्थ और स्वच्छ रखना भी मंदिर जाने और प्रभु की पूजा करने जितना पुण्यदायी है। हम आसमान में बसे स्वर्ग के सपने देखने की बजाय इस धरती को ही स्वर्ग बनाने के लिए प्रयास करें। उन्होंने कहा कि कदम ऐसा चलो कि निशान बन जाए, काम ऐसे करो कि पहचान बन जाए और जीवन ऐसे जीयो कि सबके लिए मिसाल बन जाए।
संतश्री गुरुवार को सकल जैन समाज द्वारा दलौदा चौपाटी पर आयोजित द्वारा जीने की कला पर प्रवचनमाला के दौरान कैसे बंटोरे दुआओं की दौलत विषय पर श्रद्धालुओं को संबोधित कर रहे थे। संत प्रवर ने कहा कि हमारा पहला कर्तव्य है बड़ों को प्रणाम करना। इससे हमारे परिणाम सुंदर हो जाते हैं, शरीर में ऊर्जा अाती है और ब्रेन का संतुलन बढ़ जाता है। उन्होंने कहा कि आजकल मोबाइल 4जी से चलते हैं लेकिन हमारे 4जी है माताजी, पिताजी, गुरुजी और प्रभुजी हैं। जो सुबह उठकर माता को प्रणाम करता है वह कभी गरीब नहीं रहता। जो पिता को प्रणाम करता है वह कभी बदनसीब नहीं होता। जो गुरुजी को प्रणाम करता है उसकाे कभी गम नहीं होता और जो भाई और बहन को प्रणाम करता है वह कभी चरित्रहीन नहीं होता। अगर आपको लगता है कि आप के ऊपर शनि की साढ़े साती लगी है तो वह पंडितों के द्वारा बताए हुए टोटकों से 7 साल में उतरेगी पर जो मां बाप को प्रणाम कर उनकी धूल को सिर पर धारण करने का नियम ले लेगा मेरी गारंटी है वह मात्र 7 महीनों में शनि की महादशा से उबर जाएगा।
अन्नदान करने वालों के जीवन में तो हमेशा अन्न का भंडार भरा रहता है। इससे पूर्व संतश्री एवं मुनि शांतिप्रिय सागर के दलौदा चौपाटी पहुंचने पर सकल जैन समाज एवं अन्य समाज के श्रद्धालुओं द्वारा स्वागत अभिनंदन
किया गया। मंदसौर नपाध्यक्ष राम कोटवानी, भाजपा जिलाध्यक्ष राजेंद्र सुराणा, विजय मेहता, डॉ. अजय जैन, प्रदीप पोरवाल, मोहनलाल भंडारी, सुबोध भंडारी सहित कई वरिष्ठ गणमान्य नागरिक मौजूद थे।
प्रवचन देते संत ललितप्रभ व मौजूद श्रद्धालुजन।