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रेफरेंस बुक के नाम पर निजी स्कूल चला रहे प्राइवेट पब्लिकेशन की बुक
निजी स्कूल संचालकों की लूट कम करने के लिए कलेक्टर ने दल बनाया। जांच में कई निजी स्कूलों में पालकों के साथ लूट का खेल सामने आया। स्कूल संचालक पहली से पांचवीं तक पूरी तरह से प्राइवेट पब्लिकेशन की पुस्तकों का उपयोग कर रहे हैं। इसके बाद की कक्षाओं में कुछ रेफरेंस बुक के नाम पर प्राइवेट पब्लिकेशन की पुस्तकें चलाई जा रही हैं। इसकी रिपोर्ट जांच दल ने कलेक्टर को सौंप दी है।
निजी स्कूलों विशेष कर सीबीएसई स्कूल संचालकों द्वारा पालकों के साथ की जा रही लूट की जा रही है। सीबीएसई स्कूल जिला शिक्षा कार्यालय के अधीन नहीं होने से यह बेखाैफ शिक्षा का व्यवसाय कर रहे हैं। यही कारण है कि 5-7 साल में जिले में एमपी बोर्ड की जगह सीबीएसई स्कूलों की संख्या दोगुना से ज्यादा हो गई है। करीब 4 साल पहले जिले में केवल 8 सीबीएसई स्कूल थे जो वर्तमान में 20 से ज्यादा हाे गए हैं। स्कूल संचालक प्राइवेट पब्लिकेशन की पुस्तकों को कोर्स में शामिल करते हैं। इनकी कीमत 300 से 800 रुपए तक होती है। इन पुस्तकों पर पब्लिकेशन के द्वारा स्कूल संचालकों को 40 से 50 फीसदी कमीशन दिया जाता है। इसी तरह सीबीएसई स्कूल वाले नाम लिखी ड्रेस, स्कूल के नाम लिखे बैग, यहां तक कि कॉपियों पर चढ़ाए जाने वाले कवर भी स्कूल द्वारा दिए जाते हैं। इनका मूल्य बााजर मूल्य से कहीं ज्यादा वसूला जा रहा है। पालकों द्वारा विराेध के बाद कलेक्टर ने जांच दल बनाया। दल की रिपोर्ट में भी स्कूल संचालकों की लूट सामने आई है।
रेफरेंस बुके के नाम पर इस तरह चला रहे निजी स्कूल किताबें।
उचित कार्रवाई की जाएगी
यह नियमों के खिलाफ है
जांच दल के पृथ्वीराज परमार, नायब तहसीलदार वैभव जैन ने बताया कि कुछ निजी स्कूलाें ने पांचवीं तक प्राइवेट पब्लिकेशन की पुस्तकों को सिलेबस में शामिल कर रखा है। बड़ी कक्षाओं में भी रिफरेंस बुक के नाम पर प्राइवेट पब्लिकेशन की महंगी पुस्तकें बच्चांे को दिलाई जा रही हैं। एनसीईआरटी के नियमों के खिलाफ है। हमने जांच रिपोर्ट कलेक्टर को सौंप दी है।
पहली से पांचवीं तक पूरा उपयोग
जांच दल ने स्टेशनरी पर कार्रवाई के साथ सेंट थॉमस, एडिफाई, वात्सल्य सहित कई स्कूलों में जांच की। नोटिस बोर्ड पर लगी सिलेबस की लिस्ट देखी। सेंट थॉमस स्कूल में तो पहली से पांचवीं तक पूरी प्राइवेट पब्लिकेशन की पुस्तकों का उपयोग मिला। बड़ी कक्षाओं में कुछ पुस्तकें प्राइवेट पब्लिकेशन की मिलीं। जांच दल ने गुरुवार शाम को जांच रिपोर्ट कलेक्टर को सौंपी।
मनोज पुष्प, कलेक्टर, मंदसौर