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हादसे में एक पैर खाेया लेकिन हिम्मत नहीं हारी, विक्षिप्त महिलाओं की बनी ताकत, अपने खर्च पर करातीं इलाज, 1 किशाेरी काे बदमाश से छुड़ाया

Mandsour News - मानसिक दिव्यांग महिलाओं के सम्मान और रक्षा का बीड़ा मंदसौर निवासी एक महिला ने उठाया है। वे खुद के खर्च पर इनका...

Bhaskar News Network

Jan 14, 2019, 03:57 AM IST
Mandsour News - mp news eat a leg in the accident but did not give up the strengths of the insane women the treatment performed at their own expense 1 saved them from the mischief
मानसिक दिव्यांग महिलाओं के सम्मान और रक्षा का बीड़ा मंदसौर निवासी एक महिला ने उठाया है। वे खुद के खर्च पर इनका इंदाैर में इलाज भी कराती हैं। वे करीब 4 साल से ऐसी महिलाओं की मदद के लिए काम कर रही हैं। उनके इस सेवाभाव के लिए हाल ही में जिला प्रशासन ने आश्रयगृह खोलने के लिए सहायता की और जगह भी उपलब्ध कराई।

हम बात कर रहे हैं जिले के संजीत निवासी अनामिका जैन की। 4 साल पहले जिला अस्पताल परिसर में गर्भवती महिला को देख एवं उसकी कहानी सुनकर अनामिका के दिल में उसके जैसी अन्य महिलाओं के लिए कुछ करने की इच्छा जाग्रत हुई। इसके बाद से अब तक वे करीब 20 मानसिक विकलांग महिलाओं का बाणगंगा इंदौर व सेवाधाम उज्जैन में इलाज करा चुकी है। हाल ही में अनामिका की पहल पर ही पुलिस ने एक मानसिक विकलांग किशोरी को एक बदमाश के कब्जे से मुक्त कराया। बदमाश किशोरी को अजमेर से लेकर आया था। पुलिस मामले में जांच कर रही है। सीएसपी राकेशमोहन शुक्ला ने बताया अनामिका द्वारा किए जा रहा काम सराहनीय है।

ऐसे शुरू हुआ सफर: विक्षिप्त महिला से हुई दरिंदगी की कहानी सुनकर उठाया बीड़ा

अनामिका बताती हैं कि चार साल पहले उन्हें जिला अस्पताल परिसर में नूरी नाम की मानसिक दिव्यांग युवती दिखाई दी। विक्षिप्त होने के बाद भी महिला के गर्भवती होने पर उसके विषय में जानकारी ली। पता चला कि वह एक अच्छे परिवार से है लेकिन मानसिक दिव्यांग होने के चलते परिजन ने छोड़ दिया। इसके बाद प्रयास कर नूरी से जान-पहचान बढ़ाई। छह माह बाद पता चला कि वह फिर गर्भवती हो गई है। तहकीकात करने पर उसके साथ हुई दरिंदगी जानकर काफी गुस्सा अाया। इसके बाद दिल में आया कि पता नहीं ऐसी कितनी महिलाएं होंगी जिन्हें सहारा नहीं होने पर समाज के ही असामाजिक तत्व शिकार बना लेते हैं। नूरी जैसी महिलाओं का इलाज कराने के लिए अस्पतालों का पता किया। इसके बाद सबसे पहले नूरी को साईंधाम उज्जैन भेजा। बाणगंगा इंदौर भी महिलाओं को भेजना शुरू किया। खास बात यह है कि इन महिलाओं को अनामिका खुद के खर्च पर ही इंदौर या फिर उज्जैन छोड़कर आती हैं। इतना ही नहीं हर आठ से दस दिनों में वापस वहां पहुंचकर इन सभी के कुशलता भी पता करती हैं।

मानसिक दिव्यांग महिलाओं की सेवा करतीं अनामिका।

संजीत जाते समय आई थीं डंपर की चपेट में

अनामिका अगस्त 2014 को स्कूटी पर सवार होकर मंदसौर से संजीत की ओर जा रही थीं। मूंदडी के पास एक डंपर ने स्कूटी को चपेट में ले लिया। अनामिका के दाया पैर डंपर के पहिये में आ गया। इलाज के दौरान पैर काटना पड़ा। इसके बाद भी वे अब भी समाजसेवा के क्षेत्र में काम कर रही हैं। अनामिका बताती है पति प्रदीप जैन संजीत में ऑटो पार्टस के व्यापारी हैं। इस काम में वे ही आर्थिक मदद करते हैं।

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