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वासना से उपासना की ओर ले जाती है हनुमान की भक्ति, जीवन के सारे दु:ख हो जाते हैं दूर
अनुकूलता और प्रतिकूलता दु:ख का प्रतीक होती है। यदि हमें परम सुख प्राप्त करना है तो राम रसायन रूपी औषधि को अपनाना होगा जो हनुमानजी के पास है। इसीलिए हनुमान चालीसा में कहा है कि राम रसायन तुम्हारे पासा सदा रहो रघुपति के दासा। जब हम वासना को उपासना में बदलते हैं तभी हनुमान हमें प्राप्त होते हैं।
यह बात नर्मदा तट के संत वेदमूर्ति निर्मल चेतन मसा ने श्री तलाईवाले बालाजी मंदिर में आयोजित धर्मसभा में कही। उन्होंने कहा कि अशोक वाटिका में हनुमानजी के दूत के रूप में प्रवेश करने के बाद ही सीता माता के दु:ख के दिन दूर हो गए। ऐसे ही यदि हमारे जीवन में यदि हनुमानजी का प्रवेश हो जाए तो जीवन के सारे दु:खों से हम निवृत्त हो सकते हैं।
उन्होंने कहा कि प्रेम-करुणा और स्नेह यह तीन ऐसी औषधियां हैं जिनसे मनुष्य मात्र को हम अपने आत्मीयता के धागे में पिरों सकते हैं। राम का नाम एक ऐसा दिव्य रसायन है जो हमेशा हमें जागृत और ऊर्जावान रख सकता है। समुद्र मंथन के समय जो 14 र| निकले उनमें भी एक र| की तरह माना गया जिसे भगवान शंकर ने पीया। विष के जरिए ही अमृत मिलता है यह संदेश हमें हनुमान जी देते है। हमारे अंदर जब हनुमान का भाव जागृत होता है तभी राम मिलते हैं और राम राज्य का सर्जन होता है। सभी को राम बनना है लेकिन हनुमान बनने के प्रति भी हम प्रेरित हों ज्ञान विवेक और बुद्धि से
व्यक्ति हनुमान तत्व को प्राप्त कर सकता है। शुरू में श्री बालाजी मंदिर ट्रस्ट के अध्यक्ष धीरेंद्र त्रिवेदी ने स्वागत भाषण दिया। जयप्रकाश सोमानी, ओमप्रकाश व्यास, अशोक गुप्ता, गोपाल पाटीदार सहित धर्मालु मौजूद थे। संचालन बृजेश जोशी ने किया