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50 साल में जुबैदा बी के परिवार ने भरी 10 हजार से अधिक महिलाओं की गोद
शहर की प्राचीन नाहर सैयद दरगाह पर 54वां मेला लगा। मान्यता है कि 454 साल पुराने स्थान पर आने वाली नि:संतान महिला की यहां गोद भरने पर संतान की प्राप्ति हाेती है। 70 साल की जुबैदा बी यहां 50 साल से गोद भराई की रस्म पूरी कर रही हैं। यह अब तक 10 हजार से ज्यादा महिलाओं की गोद भर चुकी हैं। यहां मुस्लिम परिवार के साथ हिंदू परिवार के लोग भी पहुंचते हैं।
काैमी एकता की मिसाल बनी नाहर सैयद दरगाह पर नपा तीन दिनी मेले का आयोजन करती है। हिंदी तिथि से दरगाह पर लगने वाला देश का एकमात्र मेला है। यहां मुस्लिम महिलाएं ही गोद भराई की रस्म पूरी करती हैं। कमेटी के भूरा खां मेव ने बताया हर साल यहां 1400 से 1500 महिलाओं की गोद भराई रस्म की जाती है। खास बात यह है कि यहां हिंदू महिलाओं की संख्या भी ज्यादा रहती है। साथ ही मन्नत पूरी होने पर हर साल 500 से 700 परिवार के लोग बच्चाें को फल, मिठाई, सूखे मेवे से ताैलकर मन्नत पूरी करते हैं।
इंदौर के परिवार ने बेटी के जन्म पर लड्डुओं से तौला
इंदौर से प|ी के साथ आए मनीष चौहान ने बताया विवाह को 8 साल हो गए थे। पिछले साल बाबा के यहां आकर प|ी की गोद भरवाई थी अब बेटी हुई है। हम परिवार के साथ मन्नत पूरी होने पर लड्डू से ताैलकर बाबा का शुक्रिया करने आए हैं। रतलाम निवासी बंटी नीमा अपनी प|ी नेहा से साथ सोमवार को पहुंचे। बंटी ने बताया विवाह को 4 साल हो गए हैं, अब तक कोई संतान नहीं है। यहां के बारे में काफी सुना है इसलिए गोद भरवाने के लिए आए हैं।
70 वर्षीय जुबैदा बी रतलाम की नेहा की गोद भरते हुए।
मन्नत पूरी होने पर इंदौर से आए मनीष-अमृता बच्ची को मिठाई से ताैलते हुए।
दंपती को तालाब में स्नान कर वस्त्र वहीं छोड़कर नए वस्त्र धारण करना पड़ते हैं
70 वर्षीय जुबैदा बी ने बताया नि:संतान दंपती को तालाब में स्नान कर वस्त्र वहीं छोड़कर नए वस्त्र धारण कर बाबा के दरबार में नारियल फल, फूल मिठाई से गाेद भराई की जाती है। उसके बाद बाबा की मजार पर मन्नत का धागा बांधा जाता है। साथ ही मन्नत पूरी होने पर उतारने के लिए मन में प्रण किया जाता है।