Hindi News »Madhya Pradesh »Mhow» एक दिन की नहीं, स्थायी होती है भीतर की होली

एक दिन की नहीं, स्थायी होती है भीतर की होली

होली संपूर्ण स्वीकार भाव का त्योहार है। इस पर्व पर जो भी हमारी ओर आता है हम उसे स्वीकार करते हैं। जो रंग जिस स्वरूप...

Bhaskar News Network | Last Modified - Mar 01, 2018, 05:05 AM IST

एक दिन की नहीं, स्थायी होती है भीतर की होली
होली संपूर्ण स्वीकार भाव का त्योहार है। इस पर्व पर जो भी हमारी ओर आता है हम उसे स्वीकार करते हैं। जो रंग जिस स्वरूप में आता है वह स्वीकार होता है। यही संपूर्ण स्वीकार प्रेम को जन्म देता है। प्रेम की यही होली, संतों की होली है।

ओशो सिद्धार्थ औलिया अोशो धारा, मुरथल, हरियाणा

संसार रंगों से होली खेलता है लेकिन, संत बाहर होली नहीं खेलता; उसका फाग तो उसके भीतर ही मनता है। चरनदास कहते हैं, संतों की होली प्रेमनगर में होती है ; यानी वह अंतर-आकाश जहां गोविंद का वास है।

जब हम बाहर रंग खेलते हैं, उस समय हम अपने अस्तित्व के साथ मौजूद रहते हैं। जिस पर रंग डालते हैं वह कोई और होता है। द्वैत की स्थिति रहती है लेकिन, संत जब गोविंद के साथ रंग खेलता है अभ्यंतर में, तो उसका अस्तित्व नहीं बचता, ‘प्रेमनगर के माहिं होरी होय रही, जबसों खेली हमहूं चित दै, आपनहूं का खोय रही।’ होली खेलते-खेलते बस एक-केवल गोविंद ही बच जाता है। दो में से एक का बचना ही अद्वैत है। इस प्रेम नगर में प्रेम वही कर सकता है, जो अपना सिर यानी अहंकार देने को राजी हो। फिर अगर कोई संत मिल जाए, जो सिर के बदले प्रेम देने को राजी हो, तो कबीर की सलाह है कि क्षण भर भी देरी मत करना, क्योंकि प्रेम गोविंद का ही तो पर्याय है, ‘प्रेम बिकता मैं सुना, माथा साटे हाट,‘बूझत बिलंब न कीजिए, तत्छिन दीजै काट।’

चरनदास कहते हैं कि उस प्रेमनगर में जो एक बार होली का आनंद ले लेता है, उसके लिए अपने कुल की मर्यादा, अहंकार, रस्म-रिवाज सब बेमानी हो जाते हैं और बाहर की दुनिया उसके किसी काम की नहीं रह जाती, ‘बहुतन कुल अरु लाज गवाई, रहो न कोई काम।’ चरनदास कहते हैं, भक्त गोविंद के प्रेम में बिल्कुल बेबस हो जाता है। मीरा भी कहती हैं, गोविंद से उस विरह की मेरी पीड़ा को कोई नहीं समझता, ‘भई हूं दिवानी तन सुध भूली, कोई न जानी म्हारी बात।’ चरनदास कहते हैं,जो गोविंद के प्रेम में है, उसे दुनियादारी की समझ नहीं होती, ‘बहुतन की मति रंग रंगी है, जिनको लागो प्रेम।’ बकौल कबीर, ऐसे प्रेमी के लिए भीतर-बाहर सब एक हो जाते हैं। उसके सारे भ्रम दूर हो जाते हैं, ‘दुई दुई लोचन पेखा, हउ हर बिन अउरु न देखा, हमरा भरम गइआ भउ भागा, जब रामनाम चित लागा।’ चरनदास कहते हैं, ‘गोविंद के साथ होली की उस वेला में भक्तों को सुधि नहीं रह जाती, फिर नियम और मर्यादा की बाद कौन करे-‘बहुतन को अपनी सुधि नाहीं, कौन करै अस नेम।’ कबीर ने भी माना कि जहां प्रेम होता है, वहां कोई नियम नहीं होता, कोई दुनियादारी नहीं बचती और यहां तक कि उस समय, समय भी नहीं बचता, ‘जहां प्रेम तहू नेम नहिं, तहां न बुधि ब्यौहार, प्रेम मगन जब मन भया, तब कौन गिनै तिथि बार।’

गोविंद का यह प्रेम छिपाए नहीं छिपता। कबीर कहते हैं, ‘प्रेम छिपाए न छिपै, जा घट परगट होय, जो पै मुख बोलै नहीं, तो नैन देत है रोय।’ चरनदास कहते हैं कि प्रेमी या भक्त की वाणी गदगद हो जाती है,बोलते-बोलते कंठ अवरुद्ध हो जाता है, ‘बहुतन की गदगद ही बानी, नैनन नीर ढराय, बहुतन को बौरापन लागौ, ह्वां की कही न जाय।’

यह प्रेम भक्त का प्रयास नहीं, गोविंद का दान है। कबीर कहते हैं, ‘मेरे बाबा मैं बउरा, सभ खलक सैआनी मैं बउरा, मैं बिगरिओ बिगरै मत अउरा,‘आप न बउरा राम कीओ बउरा।’ वे कहते हैं, उस प्रेमनगर की खबर सिर्फ सदगुरु देता है, ‘मेरे गुरु ने बतायो वेदन भेद।’ मेरे गुरु ने भेद का वह रहस्य समझा दिया। जिस दिन आप भी उस प्रेमनगर में प्रवेश करेंगे। फिर आपकी होली सिर्फ एक दिन की नहीं होगी। आप पर स्थायी रंग चढ़ना शुरू हो जाएगा।

किंतु प्रेम तब पैदा होता है, जब हमारे भीतर संपूर्ण स्वीकार्यता हो। जब स्वीकार भाव रहता है तो किसी के प्रति कोई शिकायत नहीं होती। होली का एक संदेश यह भी है। होली खेलते वक्त हमारी तरफ जो भी रंग आता है, गुलाल आता है हम उसे स्वीकार करते हैं। यदि अनजान व्यक्ति भी आता है तो हम उसे भी स्वीकार करते हैं। होली का यह स्वीकार भाव हमें हमेशा बनाए रखने का अभ्यास करना चाहिए।

दैनिक भास्कर पर Hindi News पढ़िए और रखिये अपने आप को अप-टू-डेट | अब पाइए Mhow News in Hindi सबसे पहले दैनिक भास्कर पर | Hindi Samachar अपने मोबाइल पर पढ़ने के लिए डाउनलोड करें Hindi News App, या फिर 2G नेटवर्क के लिए हमारा Dainik Bhaskar Lite App.
Web Title: एक दिन की नहीं, स्थायी होती है भीतर की होली
(News in Hindi from Dainik Bhaskar)

More From Mhow

    Trending

    Live Hindi News

    0

    कुछ ख़बरें रच देती हैं इतिहास। ऐसी खबरों को सबसे पहले जानने के लिए
    Allow पर क्लिक करें।

    ×