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पति की मौत के बाद एक साथ तीन-तीन जगह मजदूरी कर बेटे को फौजी बनाया

भारतीय सेना में पदस्थ बेटे ब्रजेश को आशीर्वाद देती मां लीलाबाई। महू में पदस्थ बेटा सिपाहियों का बढ़ा रहा मनोबल...

Bhaskar News Network | Last Modified - May 13, 2018, 03:35 AM IST

पति की मौत के बाद एक साथ तीन-तीन जगह मजदूरी कर बेटे को फौजी बनाया
भारतीय सेना में पदस्थ बेटे ब्रजेश को आशीर्वाद देती मां लीलाबाई।

महू में पदस्थ बेटा सिपाहियों का बढ़ा रहा मनोबल

विजय जैन | आगर-मालवा

मां को भगवान का दर्जा यूं ही नहीं दिया जाता। ऐसी ही एक मां शहर की भी है, आगर के पाल रोड निवासी लीलाबाई। उन्होंने पति को खो देने के बाद भी हिम्मत नहीं हारी। इकलौते बेटे ब्रजेश व्यास को पढ़ाने के लिए मजदूरी की। पाई-पाई जोड़ी...और आज वही बेटा मां के सपनों को पूरा करते हुए भारतीय सेना में है। ब्रजेश महू रेजीमेंट में धर्मगुरु के पद पर पदस्थ होकर भारतीय सेना के सिपाहियों का हौसला बढ़ा रहा है।

लीलाबाई के पति शिवेंद्र प्रसाद पुजारी थे। हालांकि इस पेशे में उनकी कोई खास आमदनी नहीं हो पाती थी। कुछ समय बाद उनकी भी मृत्यु हो गई। अब लीलाबाई को अपने बेटे और चार बेटियों के भविष्य को उज्ज्वल बनाने के लिए खुद जिम्मेदारी लेनी पड़ी। शुरुआत में लीलाबाई ने विभिन्न धार्मिक स्थलों की साफ-सफाई करने से लेकर वहां की अन्य जवाबदारियां संभालीं।

इससे भी ज्यादा आर्थिक लाभ नहीं होने पर शहर के एक स्कूल में प्यून की नौकरी तक करना पड़ी। इसके साथ ही वे अन्य बच्चों को घर से स्कूल लाने व घर छोड़ने का काम भी करने लगीं। इसके एवज में प्रति बच्चे को छोड़ने पर अभिभावकों द्वारा एक रुपया महीने दिया जाता था। लीलाबाई बच्चों को लाने-ले जाने पर तकरीबन 5 से 6 किमी का शहरभर का चक्कर लगाती थीं। इसके बावजूद घर की जरुरतों की पूर्ति करना इनके लिए असंभव होता था।

मदर्स डे विशेष

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