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किसानों ने दी चेतावनी : कुएं-पेड़ों का मुआवजा नहीं मिला तो हम डेम बनाने नहीं देंगे जमीन

Multai News - अब तक अधिग्रहित जमीन में स्थित कुएं, ट्यूबवेल और पेड़ों का मुआवजा दिया जाता था। अचानक जल संसाधन विभाग के अपर सचिव...

Dainik Bhaskar

Mar 02, 2018, 04:35 AM IST
किसानों ने दी चेतावनी : कुएं-पेड़ों का मुआवजा नहीं मिला तो हम डेम बनाने नहीं देंगे जमीन
अब तक अधिग्रहित जमीन में स्थित कुएं, ट्यूबवेल और पेड़ों का मुआवजा दिया जाता था। अचानक जल संसाधन विभाग के अपर सचिव राधेश्याम जुलानिया ने अधिग्रहित जमीन पर स्थित कुएं, ट्यूबवेल, पेड़ों का मुआवजा अलग से नहीं देने का फरमान जारी किया है। इस आदेश का हम किसान विरोध करते हैं।

आदेश को निरस्त नहीं किया तो डेम के लिए अधिग्रहित होने वाली जमीन की रजिस्ट्री नहीं करेंगे। यह बात गुरुवार को सावंगा, घाटबिरोली, पांढरी, निंबोटी और बरखेड़ के किसानों ने विधायक चंद्रशेखर देशमुख और जल संसाधन विभाग के कार्यपालन यंत्री जीपी सिलावट से कही। किसान परशराम खाकरे, साहेबराव कवड़कर, धनराज पंवार, दौलत कसारे, वासुदेव बारस्कर, जगन्नाथ गायकवाड़, सुभाष चढ़ोकार आदि ने कहा किसान अपनी जमीन पर पौधों को पालकर पेड़ बनाता है। कुएं और ट्यूबवेल खनन में राशि खर्च करता है। जिसका आंकलन किए बिना ही इन परिसंपत्तियों का मुआवजा नहीं दिए जाने का अपर मुख्य सचिव ने आदेश जारी कर दिया है। भूमि अधिग्रहण से प्रभावित किसानों के साथ अन्याय किया जा रहा है। किसानों ने कहा उनकी जमीन घाटबिरोली डेम के लिए अधिग्रहित की जा रही है। अधिग्रहित जमीन में स्थित कुएं, ट्यूबवेल और पेड़ों का मुआवजा नहीं दिया तो वह डेम बनाने के लिए जमीन की रजिस्ट्री शासन के पक्ष में नहीं करेंगे।

मुलताई। मुआवजा नहीं मिलने पर किसानों ने जमीन देने से किया इनकार,सौंपा ज्ञापन।

यह है मुख्य सचिव का आदेश

जल संसाधन विभाग के अपर मुख्य सचिव राधेश्याम जुलानिया ने कलेक्टर और जल संसाधन विभाग के कार्यपालन यंत्री को लिखे पत्र में बताया डेम निर्माण के लिए अर्जित अथवा क्रय की जाने वाली भूमि के मूल्य निर्धारण के लिए अतिरिक्त सिंचित जमीन में मौजूद कुएं और ट्यूबवेल के अलावा पेड़ों का अतिरिक्त मुआवजा नियत कर भुगतान किया जाता है। कलेक्टर गाइड लाइन में निर्धारित भूमि के मूल्य में भूमि पर परिसंपत्तियां शामिल होती है। कृषि भूमि में सिंचाई के साधन उपलब्ध होने के कारण ही भूमि का मूल्य असिंचित भूमि से अधिक रखा जाता है। भूमि का पृथक से मूल्यांकन कर दोहरा भुगतान किया जा रहा है।

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