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जीएसटी से रोजगार बढ़ा, इसलिए टेली सीख रहीं छात्राएं

जीएसटी के कारण देश में मची उथल-पुथल को बेटियों ने भी समझा है। इस क्षेत्र में उन्होंने अब रोजगार की संभावनाएं...

Danik Bhaskar | Mar 01, 2018, 03:55 AM IST
जीएसटी के कारण देश में मची उथल-पुथल को बेटियों ने भी समझा है। इस क्षेत्र में उन्होंने अब रोजगार की संभावनाएं तलाशना शुरू कर दिया है। बेटियों की यह मंशा बुधवार को उस समय जाहिर हुई जब नेकी की दीवार जन सेवा समिति ने 50 उम्मीदवारों को अभ्युदय आश्रम में काउंसिलिंग के लिए बुलाया। युवाओं को मार्गदर्शन देने के लिए सीए प्रकाश अग्रवाल, बाल कल्याण समिति अध्यक्ष अमित जैन, समाजसेवी मनोज जैन, प्रीति रोचलानी, अरुणा छारी मौजूद रहीं। अभ्युदय आश्रम में समिति ने उन्हीं युवाओं को बुलाया था जिन्होंने चार दिन पहले एक कदम स्वरोजगार की ओर कार्यक्रम में स्वरोजगार से जुड़ने के लिए अपने पंजीयन कराए थे। छात्र-छात्राएं सशक्त बनकर किस दिशा में जाना चाहते हैं, यह जानने के लिए बारी-बारी हर एक युवा से बात की गई। शुरुआत बेटियों से हुई तो अधिकांश छात्राओं ने टेली व अकाउंट सीखने में ही दिलचस्पी दिखाई।

200 पंजीयन हुए, 50-50 के ग्रुप में देंगे ट्रेनिंग: एक कदम-स्वरोजगार की ओर कार्यक्रम में 200 युवाओं ने पंजीयन कराए थे। समिति अब इन युवाओं को टीम को 50-50 के दल बनाकर बारी-बारी से बुला रही है। उनसे यह मालूम किया जा रहा है कि वे स्वरोजगार के लिए क्या प्रशिक्षण चाहते हैं। छात्र-छात्राओं को मंशा को रजिस्टर में नोट किया जा रहा है, बाद में पूरा रिकॉर्ड इकजाई होने के बाद सभी के लिए नि:शुल्क प्रशिक्षण शुरू करा दिया जाएगा। समिति ने उद्योग विभाग, सेंट आरसेटी सहित अन्य विभागों की भी मदद ली है।

पहल

रोजगार व स्वरोजगार की दिशा में युवाओं को आकर्षित करने दिया जाएगा प्रशिक्षण, छात्राओं ने अकाउंट सीखने में जताई रुचि

बेरोजगार युवक युवतीयों की काउंसलिंग करते नेकी की दिवार के सदस्य।

प्रशिक्षण का यह होगा इंतजाम

नेकी की दीवार समिति युवाओं की मंशा के अनुरूप प्रशिक्षण की व्यवस्था कर रही है। इसमें सिलाई, कढ़ाई, मोमबत्ती बनाना, अगरबत्ती बनाना, थैले बनाना, टेली, कम्प्यूटर, मोबाइल रिपेयरिंग सहित अन्य कई तरह के फ्री प्रशिक्षण दिए जाएंगे। जो युवा जिस क्षेत्र में रुचि दिखाएगा, उसे उसकी मंशा के अनुसार ही प्रशिक्षण देकर सशक्त बनाया जाएगा ताकि वह स्वरोजगार से जुड़कर आत्मनिर्भर बन सकें।