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समूह बनाकर महिलाओं ने शुरू किए छोटे व्यापार

समूह को जो आय हुई उससे पढ़ा रहीं हैं बेटियां भास्कर संवाददाता | मुरैना गरीबी के दौर से बाहर निकलने के लिए 230...

Bhaskar News Network | Last Modified - Mar 02, 2018, 04:05 AM IST

समूह बनाकर महिलाओं ने शुरू किए छोटे व्यापार
समूह को जो आय हुई उससे पढ़ा रहीं हैं बेटियां

भास्कर संवाददाता | मुरैना

गरीबी के दौर से बाहर निकलने के लिए 230 महिलाओं ने समूह बनाकर मेहनत से काम किया तो चार वर्ष के अंतराल में उन्होंने अपने परिवार की दीन-दशा को बदल दिया। आज आलम है कि ये महिलाएं आत्मनिर्भर होने के साथ परिश्रम से कमाए पैसों से बेटा-बेटियों को पढ़ा-लिखा रही हैं।

राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत बीपीएल महिलाओं के 23 ऐसे समूह सक्रिय हैं जिनके लेन-देन को बेहतर मानते हुए बैंकों ने उनके कारोबार के लिए 15-15 हजार रुपए की क्रेडिट लिमिट तय की हैं। बैंक खातों में पंद्रह हजार रुपए की अतिरिक्त राशि आने से महिला समूहों को अपनी कारोबारी गतिविधियों में वित्तीय सहारा मिला है। इससे महिला समूह 40 से 50 हजार रुपए की रकम से छोटे-छोटे बिजनेस कर रहे हैं।

महिला समूहों ने छोटे-छोटे बिजनेस संचालित करने बैंकों से 10 से 15 हजार रुपए की क्रेडिट लिमिट लेना शुरू किया

500 रुपए से शुरू किया काम, अब 5000 की आय

गरीबी रेखा के नीचे जीवन यापन कर रही महिलाओं ने पांच-पांच सौ रुपए एकत्रित कर मध्याह्न भोजन बनाने का काम शुरू किया था। तीन साल में उन्होंने अपने मेहनत से 500 रुपए की पूंजी को 5000 रुपए की स्थायी पूंजी में बदल लिया और तीन साल तक परिवार की दाल-रोटी का भी प्रबंध किया।

ये काम कर रही महिलाएं

बीपीएल परिवारों की महिलाएं समूह के रूप में स्कूल व आंगनबाड़ी केन्द्रों के लिए भोजन बनाने की सेवाएं दे रही हैं। इससे उन्हें मेहनताना मिलता है।

महिला समूहों ने बैंक से दुधारू पशु खरीदने के लिए लोन लिए और दूध बेचकर मुनाफा अर्जित कर रही हैं। चूंकि दूध के रेट 45 से 50 रु लीटर चल रहे हैं इसलिए उन्हें एक लीटर दूध बेचने में 10 रु का मुनाफा होता है।

जिरेंना, घुर्रा व काजीबसई गांव में मुस्लिम समाज की महिलाएं समूह बनाकर कालीन बुनने का काम कर रही हैं। बुनाई के एवज में उन्हें पैसा मिलता है।

नवाचार पर गौर करें तो जौरा विकास खंड के रूनीपुर व सांकरा गांव की महिलाओं के समूह बीते दो वर्ष से मधुमक्खी पालन का व्यवसाय कर रहे हैं। इससे सुरेखा व कमला जैसी 20 महिलाओं को परिवार की आजीविका चलाने लायक आमदनी हो रही है। मधुमक्खी के एक बॉक्स से पूरे सीजन में 7000 रु कीमत का 50 किलो कच्चा शहद मिलता है। मौसम व फ्लोरा अच्छा हो तो कच्चे शहद का मात्रा 70 से 80 किलो तक प्राप्त होती है।

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Web Title: समूह बनाकर महिलाओं ने शुरू किए छोटे व्यापार
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