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काम के दबाव से घबराए अफसर, पीएचई एसई ने लिया वीआरएस, बोले-यहां खराब है माहौल

Bhaskar News Network | Last Modified - Feb 01, 2018, 02:55 PM IST

पाहड़गढ़ के कन्हार क्षेत्र में कुआं से पानी भरते ग्रामीण। कहां से कितने प्रस्ताव गए भोपाल मुरैना : जिले के...
पाहड़गढ़ के कन्हार क्षेत्र में कुआं से पानी भरते ग्रामीण।

कहां से कितने प्रस्ताव गए भोपाल

मुरैना :
जिले के सबलगढ़ क्षेत्र से जाटौली, कीरतपुर, बत्तोखर, बावरी, अटार व पिपरघान गांव में नल-जल योजना के प्रस्ताव एसई कार्यालय को भेजे गए हैं। सहायक यंत्री डीआर जर्मन का कहना था कि सातवें गांव का नाम उन्हें याद नहीं है।

भिंड : कार्यपालन यंत्री आरके सिंह का कहना है कि उन्होंने जिले के छह ब्लॉक से चार-चार नल-जल योजनाओं के मान से 24 डीपीआर टीएस के लिए एसई को भेज दी हैं। दूसरे चरण में 24 नल-जल योजनाओं के प्रस्ताव और भेजे जाना हैं।

श्योपुर : कार्यपालन यंत्री पीआर गोयल के मुताबिक, उनके जिले से उतनवार, ननावत, धीरोली, सोंठवा, लुहार,मायापुर व आवदा में नल-जल योजनाएं शुरू करने के प्रस्ताव सर्कल कार्यालय को भेजे हैं। अभी पांच प्रस्ताव और भेजे जाने हैं।

17 प्रस्ताव की दी गई स्वीकृति

एसई जीएस अग्रवाल ने बताया कि अभी तक मुरैना, भिंड व श्योपुर की 17 नल-जल योजनाओं की डीपीआर को तकनीकी स्वीकृति दी गई है। अभी इतने ही प्रस्ताव पाइप लाइन में हैं।

इधर...ईई गोयल दिल्ली में भर्ती

मुरैना के कार्यपालन यंत्री केआर गोयल बीते तीन दिनों ने नई दिल्ली के मेदांता हास्पिटल में भर्ती होकर अपनी सर्वाइकल स्पोंडलाइटिस का इलाज करा रहे हैं। उनका कहना है कि पहले स्वस्थ तो हो जाएं, उसके बाद नल-जल योजनाओं की बात करेंगे। ईई गोयल ने बताया कि 28 जनवरी तक उनके कार्यालय से एसई कार्यालय के लिए 56 में से सात नल-जल योजनाओं के प्रस्ताव भेजे जा सके हैं।

कंसल्टेंट्स ने लेट किया सर्वे

मुख्यमंत्री नल-जल योजना कहां-कहां लगाई जाना है इसका सर्वे करने के लिए सरकार की मंशा पर लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग ने टेंडर के जरिए मुरैना, भिंड व श्योपुर जिले के भोपाल व पुणे के कंसलटेंट नियुक्त किए हैं।

अधिक आबादी के मान से पीएचई के प्रस्ताव पर कंसलटेंट की टीम संबंधित गांवों में पहुंचकर पेयजल योजना का सर्वे करती हैं और डिटेल प्रोजेक्ट रिपोर्ट बनाकर उसकी कार्यपालन यंत्री के समक्ष पेश करती हैं।

विभागीय अधिकारियों का कहना है कि भोपाल के कंसलटेंट ने जिले के गांवों में सर्व कार्य लेट किया है इसलिए नल-जल योजनाओं की डीपीआर शासन तक समय पर नहीं पहुंच सकी हैं। कंसलटेंट डीपीआर बनाकर दे रहे हैं हम उनका परीक्षण कर एसई के पास पहुंचा रहे हैं।

सीई के पास भेज दी हैं 17-18 डीपीआर

मैंने तो 31 जनवरी को शासन सेवा से वीआरएस ले लिया है। 28 जनवरी तक 17-18 नल-जल योजनाओं की डीपीआर को तकनीकी स्वीकृति के साथ सीई के पास भेज दिया गया है। शासन के निर्देशों के मुताबिक, प्रत्येक ब्लॉक के जलसंकट प्रभावित चार-चार गांव में पानी प्रदाय करने के लिए नल-जल योजनाओं के प्रस्ताव शासन को भेजे जाने थे। जीएस अग्रवाल, अधीक्षण यंत्री पीएचई

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