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मध्याह्न भोजन की हल्की गुणवत्ता, नहीं खा रहे बच्चे

मध्याह्न भोजन की गुणवत्ता हल्की होने के कारण छात्र-छात्राएं भोजन करने में कम रुचि ले रहे हैं। समूह पदाधिकारियों...

Dainik Bhaskar

Feb 01, 2018, 02:55 PM IST
मध्याह्न भोजन की गुणवत्ता हल्की होने के कारण छात्र-छात्राएं भोजन करने में कम रुचि ले रहे हैं। समूह पदाधिकारियों की दबाव होने के कारण शिक्षक भोजन की क्वालिटी का विरोध नहीं कर पा रहे हैं। मिड-डे मील को चेक करने बीआरसी व बीईओ स्कूल नहीं पहुंच रहे हैं। 1800 प्राइमरी व 554 मिडिल स्कूलों में दर्ज दो लाख से अधिक बच्चों के लिए राज्य शासन से छात्रों की 60 फीसदी उपस्थिति के मान से गेहूं व भोजन पकाने के लिए पैसा जारी किया है। इसके विपरीत आलम यह है कि स्कूलों में 15 से 20 फीसदी बच्चे ही मध्याह्न भोजन करने पहुंच रहे हैं। जबकि स्कूलों से छात्रों की उपस्थिति 45 से 50 फीसदी दी जा रही है।

गुणवत्ता नहीं कर रहे चेक: स्व-सहायता समूहों द्वारा स्कूलों में परोसे जा रहे मध्याह्न भोजन की गुणवत्ता कैसी है इसे विभागीय अधिकारी चेक नहीं कर रहे हैं।

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