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कोल्ड स्टोरेज व राइस-दाल मिल लगा सकेंगे किसान के बेटा-बेटी

प्रदेश सरकार ने किसान के बेटा-बेटियों को स्वरोजगार स्थापित करने के लिए मुख्यमंत्री कृषक उद्यमी योजना लागू कर दी...

Bhaskar News Network | Last Modified - May 01, 2018, 03:40 AM IST

प्रदेश सरकार ने किसान के बेटा-बेटियों को स्वरोजगार स्थापित करने के लिए मुख्यमंत्री कृषक उद्यमी योजना लागू कर दी है। इस योजना में संशोधन किया गया है। उद्योग विभाग के मुताबिक योजना में अब हितग्राही को परियोजना लागत 50 हजार से 2 करोड़ रुपए तक की राशि मिलेगी।

योजना का लाभ उठाने के लिए हितग्राही की उम्र 18 साल से 45 साल रखी है। योजना के क्रियान्वयन की जिम्मेदारी एक नहीं बल्कि 12 विभागों को दी गई है। किसान के बेटा या बेटी कृषि आधारित कोई भी उद्योग स्थापित कर सकते हैं। उद्योग(विनिर्माण), सेवा और व्यवसाय से संबंधित सभी प्रकार की परियोजना, कृषि आधारित परियोजनाएं - एग्रो प्रोसेसिंग, फूड प्रोसेसिंग, कोल्ड स्टोरेज, मिल्क प्रोसेसिंग, केटल फीड, पोल्ट्री फीड, फिश फीड, कस्टम हायरिंग सेंटर, वेजीटेबल डिहाइड्रेशन , टिश्यू कल्चर ,कैटल फीड, दालमिल, राइस मिल, आईल मिल, फ्लोर मिल, बेकरी, मसाला निर्माण, सीड ग्रेडिंग/सार्टिंग और अन्य कृषि आधारित/अनुषांगिक परियोजनाओं को प्राथमिकता दी जाएगी। यहां बता दें कि अभी तक परियोजना लागत 10 लाख से 20 करोड़ के बीच थी। संशोधन के बाद लागत 50 हजार से दो करोड़ कर दी है। जिससे छोटे-छोटे उद्योग स्थापित किए जा सकें। वहीं उम्र 18 से 40 की जगह 18 से 45 साल कर दी है।

स्वरोजगार

मुख्यमंत्री कृषक उद्यमी योजना में किया संशोधन, 50 हजार से दो करोड़ तक का लोन मिलेगा

ये 12 विभाग करेंगे योजना का क्रियान्वयन

योजना का क्रियान्वयन 12 विभाग द्वारा किया जाएगा। इनमें सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम विभाग, पंचायत एवं ग्रामीण विकास, नगरीय विकास और आवास, कुटीर एवं ग्रामोद्योग, अनुसूचित जाति कल्याण, जनजातीय कार्य, पिछड़ा वर्ग और अल्पसंख्यक कल्याण, विमुक्त, घुमक्कड़ और अर्द्धघुमक्कड़, किसान-कल्याण तथा कृषि विकास, उद्यानिकी तथा खाद्य प्र-संस्करण, मछुआ कल्याण तथा मत्स्य-विकास और पशुपालन विभाग शामिल हैं।

योजना का लाभ लेने वाले बेटा-बेटियों का दसवीं पास होना जरूरी

योजना का लाभ लेने वाले किसान के बेटा-बेटियों की शैक्षणिक योग्यता कम से कम 10वीं तक होना जरूरी है। जबकि आय सीमा का कोई बंधन नहीं है। पहले से कोई उद्योग स्थापित नहीं होना चाहिए। मार्जनि मनी के रूप में सामान्वय वर्ग को 15 फीसदी अधिकतम राशि 12 लाख और बीपीएल के लिए परियोजना लागत का 20 फीसदी अधिकतम 18 लाख रुपए मिलेंगे। वहीं ब्याज में 5 फीसदी जबकि महिला के लिए 6 प्रतिशत अधिकतम 7 साल तक छूट मिलेगी। हर साल 5 लाख का ब्याज सरकार भरेगी।

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