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संक्रमित मशीन से कर दी डायलिसिस, छह माह में पांच मरीजों को हुआ हैपेटाइटिस-सी, तीन की मौत

जिला अस्पताल की डायलिसिस मशीन। अस्पताल प्रबंधन व डीपीडीसी कंपनी ने बरती लापरवाही डायलिसिस से पहले करायी...

Bhaskar News Network | Last Modified - May 01, 2018, 03:40 AM IST

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    जिला अस्पताल की डायलिसिस मशीन।

    अस्पताल प्रबंधन व डीपीडीसी कंपनी ने बरती लापरवाही

    डायलिसिस से पहले करायी जाने वाली खून की जांचों में लापरवाही के कारण जिला अस्पताल में कोई ऐसा मरीज भी पहुंचा है, जिसकी डायलिसिस के बाद मशीन में संक्रमण हो गया। इसी कारण पांच मरीजों को हैपेटाइटिस सी का संक्रमण हो गया। संक्रमण के बाद अस्पताल प्रबंधन व डीपीडीसी कंपनी ने संक्रमण को दूर करने की दिशा में कोई उपाय नहीं किया। आज भी संक्रमित मरीजों के लिए अलग मशीन का इस्तेमाल नहीं किया जा रहा है।

    अब संक्रमित मरीजों के डायलिसिस नहीं कर रहे

    जिन मरीजों को हैपेटाइटिस सी का संक्रमण है, उन्हें हम जेएएच ग्वालियर रैफर कर रहे हैं। एक-दो मरीजों में डायलिसिस के दौरान हैपेटाइटिस सी की शिकायत सामने आई। इसके बाद हमने तय किया है कि कंनफरमेटरी टेस्ट के बाद ही मरीजों का डायलिसिस किया जाएगा। फिलहाल अस्पताल में संक्रमित मरीजों के डायलिसिस को प्रतिबंधित कर दिया गया है। डाॅ. एके सक्सेना, सिविल सर्जन, मुरैना

    पहली बार डायलिसिस के समय नहीं था हैपेटाइटिस सी, लिवर में दिक्कत हुई तो पता चला, अब ले रहे 25 हजार रु माह की दवा

    पुरानी हाउसिंग काॅलोनी निवासी मूलसिंह सिकरवार पहलवान के बेटे भबब्बर सिकरवार ने बताया कि पिता जब पहली बार डायलिसिस कराने जिला अस्पताल पहुंचे थे तो उनकी सभी तरह की हुई खून की जाचों में कोई परेशानी सामने नहीं आई थी। लेकिन लगातार डायलिसिस कराने के दौरान उन्हें लीवर संबंधी समस्या हुई। जब डॉक्टर को दिखाया तो खून की जांचें फिर करवाई, जिसमें पिता को हैेपेटाइटिस सी निकला। अब उनका इलाज आगरा में चल रहा है। वहां के डॉक्टर ने भी बताया है कि संक्रमित मशीन के कारण हैपेटाइटिस सी हुआ है। इस बीमारी के इलाज में 28 दिन की 30-30 गोलियां 25 हजार रुपए में खरीदकर लाना पड़ रही हैं।

    फैक्ट फाइल

    788 - कुल पंजीकृत मरीज

    553-पुरुष मरीजों की संख्या

    235-महिला मरीजों की संख्या

    सिविल सर्जन को समय रहते बताया दिया था

    टेक्नीशियन दिलावर सिंह का कहना है कि डायलिसिस मशीन से मरीजों को संक्रमण के संबंध में सिविल सर्जन को समय रहते अवगत करा दिया था। लेकिन अधिकारियों ने हैपेटाइटिस सी के पॉजीटिव मरीजों का डायलिसिस बंद नही कराया।

    ये नियम है डायलिसिस का

    जो मरीज, ब्लड में किसी प्रकार के संक्रमण से ग्रसित है, उसका डायलिसिस करने के लिए सेपरेट मशीन उपयोग में लाई जाती है। जिस मशीन से हैपेटाइटिस सी संक्रमित मरीज का डायलिसिस किया जाता है, उस मशीन पर निगेटिव मरीज को डायलिसिस के लिए नहीं लिया जाता है। लेकिन जिला अस्पताल में ऐसा हुआ है।

    संक्रमण के 20 दिन बाद रामेश्वर की हुई थी मौत

    गलैथा के पूर्व सरपंच रामेश्वर सिंह सिकरवार को भी जिला अस्पताल में डायलिसिस के दौरान हैपेटाइटिस सी संक्रमण हो गया। संक्रमण के 20 दिन बाद उनकी मौत हो गई। मृतक के दामाद ब्रजराज का कहना है कि उनके ससुर बीते एक साल से जिला अस्पताल में डायलिसिस करा रहे थे। उनके लिवर में अचानक तकलीफ बढ़ी तो जांच में तथ्य सामने आए कि उन्हें हैपेटाइटिस सी की समस्या पैदा हो गई है। हैपेटाइटिस सी के संक्रमण के कारण उनका निधन हो गया।

    एक्सपर्ट व्यू

    संक्रमित मरीज का डायलिसिस अलग मशीन पर किया जाता है

    संक्रमण से बचाने के लिए मरीज के डायलिसिस से पहले मशीन की सफाई की जाती है। जिस मशीन पर संक्रमित व्यक्ति का डायलिसिस किया गया है, उस मशीन की ठीक से सफाई किए बिना यदि स्वस्थ्य मरीज की उसी पर डायलिसिस की जाती है तो उसे भी संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है। डॉ संजय धवले, प्रोफेसर, मेडिसिन विभाग व डायलिसिस इंचार्ज, जेएएच ग्वालियर

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