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ज्वार की नई प्रजाति से बनेगा बायोफ्यूल

कृषि वैज्ञानिकों ने ज्वार की ऐसी प्रजाति विकसित की है जिससे बायो फ्यूल बनाया जा सकेगा। साथ ही ज्वार के मीठे तने को...

Bhaskar News Network | Last Modified - May 01, 2018, 03:40 AM IST

कृषि वैज्ञानिकों ने ज्वार की ऐसी प्रजाति विकसित की है जिससे बायो फ्यूल बनाया जा सकेगा। साथ ही ज्वार के मीठे तने को पौष्टिक चारे के रूप में मवेशी को खिला सकेंगे। अभी जो बीज तैयार किया गया है उसे और विकसित की हाईब्रिड बनाया जा रहा है। हैदराबाद की इंटरनेशनल क्रॉप रिसर्च इंस्टीट्यूट फोर इरिड ट्रॉपिक (आईटीआरआईएसएटी) संस्था ने राजमाता विजयराजे कृषि विश्वविद्यालय से समन्वय कर प्राइमरी ट्रायल में ज्वार की ऐसी प्रजाति विकसित की है जिससे बायो फ्यूल का निर्माण हो सके और वह किसानों के लिए अधिक मुनाफा देने वाली भी हो। उन्नत कृषि तकनीक पर आधारित इस प्रजाति की ट्रायल मालवा क्षेत्र में ली गई क्योंकि वहां तापमान चंबल-ग्वालियर अंचल की तुलना में कम रहता है। इतरीसेट संस्था ने इस प्रजाति को विकसित करने के लिए जो मेटेरियल दिया वह कम होने के कारण कृषि वैज्ञानिक पेरेंट मेटेरियल से ज्वार के बीज को मल्टीप्लाई कर उसे हाईब्रिड बना रहे हैं। यह प्रयोग प्रदेश के खंडवा में भी शुरू किया गया है।

तने में चीनी 17 फीसदी तक

ज्वार के तने में शुगर कंटेंट 17 फीसदी तक पाया गया है। निदेशक अनुसंधान सेवाएं डा.एचएस यादव के मुताबिक, ज्वार के तने में मिठास अधिक होने के कारण यह मवेशियों के पौष्टिक चारे के रूप में उपयोग में लाया जा सकेगा। चंबल संभाग में हाईब्रिड ज्वार के उत्पादन को लेकर कृषि वैज्ञानिक तेजी से काम कर रहे हैं।

कृषि

कृषि विश्वविद्यालय ने हैदराबाद की संस्था के ज्वार की आरवी आईसी एसएच-28 प्रजाति की विकसित

बायो फ्यूल के निर्माण में उपयोगी

ज्वार की आरवी आईसी एसएच-28 प्रजाति से बायो फ्यूल बनाया जा सकेगा। ऐसा प्रयोग विदेशों में किया जा चुका है। इसलिए इसे भारत में सफल करने के प्रयास तेजी से चल रहे हैं। ज्वार से बायो फ्यूल बनाने की प्रक्रिया शुरू होने पर किसानों की आय में वृद्धि हो सकेगी। शुरुआती दौर में इसका उत्पादन महंगा होगा लेकिन उसे सस्ता किए जाने पर भी शोध चल रहा है।

मुर्गी के दाने में उपयोगी

ज्वार की फसल का उपयोग मुर्गी का दाना बनाने से लेकर स्टार्च निर्माण में किया जाता है। इसे पौष्टिक आहार के रूप में वेटेरनरी की दवा कंपनियां इस्तेमाल कर रही हैं।ज्वार की मांग बायो फ्यूल के क्षेत्र में होने से किसानों का रुझान नई प्रजाति की इस फसल पर फोकस होगा।

125 दिन की ज्वार फसल को एक हैक्टेयर क्षेत्र में उगाने पर 20 क्विंटल से अधिक पैदावार मिलती है। केन्द्र सरकार ने इसका समर्थन मूल्य 1400 रुपए प्रतिक्विंटल तय किया है। खरीफ सीजन की फसलों में किसान ज्वार की पैदावार तो करते हैं लेकिन अब नई प्रजाति की ज्वार की बीज तैयार होने पर किसान हाईटेक ज्वार उगाएंगे।

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