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साड़ी खरीदने आईं महिलाओं ने खरीदी के पैसे कर दिए दान

हंसता-मुस्कुराता आराध्य हमारे बीच नजर आए इसलिए समाजसेवियों ने मदद मांगने हाथ फैलाए हैं। बोनमैरो बदलने 35लाख रुपए...

Dainik Bhaskar

May 18, 2018, 05:25 AM IST
साड़ी खरीदने आईं महिलाओं ने खरीदी के पैसे कर दिए दान
हंसता-मुस्कुराता आराध्य हमारे बीच नजर आए इसलिए समाजसेवियों ने मदद मांगने हाथ फैलाए हैं। बोनमैरो बदलने 35लाख रुपए की जरूरत को पूरा करने हर प्रयास नेकी की दीवार टीम सहित तमाम सामाजिक संगठनों द्वारा किए जा रहे हैं। ब्राहम्ण समाज, सोसाइटी ऑफ नोबल फ्रेंड्स क्लब, क्लीन ग्रीन अंबाह टीम भी सहायता राशि जुटा रही हैं।

केशव कालोनी में रहने वाले पवन शर्मा का चार वर्षीय पुत्र आराध्य दिल्ली के सर गंगाराम अस्पताल में भर्ती होकर जिंदगी-मौत के बीच झूल रहा है। जल्द ही इसका बोनमैरो ट्रांसप्लांट हो इसके लिए समाजसेवियों की टीम ज्येष्ठा को साथ लेकर बाजार में उतरी और हर दुकान पर जाकर मदद मांगी। ज्येष्ठा के साथ समाजसेवी मनोज जैन, रविन्द्र माहेश्वरी, प्रकाश अग्रवाल सीए, तेजेंद्र खेडा, रवि गुप्ता, नवल अग्रवाल मौजूद रहे। उधर अंबाह में दस वर्षीय अनिकेत पुत्र दिलीप अग्रवाल ने गुल्लक तोडकर आराध्य की सहायता के लिए न केवल राशि प्रदान की बल्कि क्लीन ग्रीन अंबाह टीम के साथ बाजार में निकलकर राशि जुटाई। उधर ब्राहम्ण समाज द्वारा भी अभियान चलाकर राशि एकत्रित की जा रही है।

गैपुरा आश्रम पर होगा महामृत्युंजय जाप

नेकी की दीवार टीम बाजार में सहायता जुटा रही थी तो वनखंडी सरकार निखिल धाम गैपरा के पीठाधीश्वर स्वामी पंचमानंद महाराज वहां पहुंचे। उन्होंने आराध्य की पीड़ा समाजसेवियों से सुनकर कहा कि वह गैपरा स्थित आश्रम पर आराध्य की लंबी उम्र की कामना के लिए महामृत्युंजय का जाप करेंगे। यह जाप सोमवार को होगा। नेकी की दीवार टीम ने अपील की है कि हर व्यक्ति आराध्य की मदद के लिए आगे आए। मदद नेकी की दीवार जन सेवा समिति के सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया एमएस रोड मुरैना के खाता नंबर 3667583516 व आईएफएससी कोड नं. सीबीआईएन0280781 में जमा करा सकते हैं।

मदद

आराध्य के जीवन को बचाने के लिए महामृत्युंजय का जाप, समाजसेवी भी मदद के लिए आगे आए

साड़ी खरीदने आईं मदद देकर घर लौट गईं महिलाएं

मासूम आराध्य की मदद का जज्बा बाजार में साडी खरीदने आईं दो महिलाओं में देखने को मिला। नेकी की दीवार टीम ज्येष्ठा को साथ लेकर बाजार की दुकानों पर पहुंचकर राशि जुटा रही थी। साडी की एक दुकान पर दो महिलाएं साडी पसंद कर रही थीं। उन्होंने जब ज्येष्ठा के हाथ में वह गुल्लक देखी जिसमें वह मदद के लिए पैसा जुटा रही थी और आराध्य की बीमारी का किस्सा सुना तो उक्त महिलाओं ने वह तीन हजार रुपए इस दानपात्र में डाल दिए जिनसे वह साडी खरीद रहीं थीं। पैसा देकर महिलाएं बिना साडी खरीदे यह कहकर लौट गईं कि साडी बाद में खरीद लेंगे पहले मासूम का जीवन जरूरी है।

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