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1200 मरीज, 60 डॉक्टर, फिर भी ओपीडी खाली, मरीज बोले- क्या हम बेवकूफ हैं

एक वर्ष पहले
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शुक्रवार को दोपहर के वक्त ओपीडी से गायब मिले एक दर्जन डॉक्टर्स

18 लाख की आबादी का भार झेल रहे एकमात्र जिला अस्पताल में 60 से अधिक डॉक्टर्स पदस्थ हैं। यहां रोज सर्दी, जुकाम, बुखार, हड्‌डी, आंख, नाक-कान व गला रोग से पीड़ित 1200 से अधिक मरीज रोज ओपीडी में पहुंच रहे हैं। लेकिन ओपीडी में डॉक्टर्स बैठते ही नहीं हैं। हालात यह है कि सुबह 9 बजे से शुरू होने वाली ओपीडी में शुक्रवार को एक दर्जन से अधिक डॉक्टर्स के चेंबर खाली थे। वहीं दोपहर ढाई बजे से 4 बजे तक ओपीडी टाइम में तो 75% डॉक्टर्स ड्यूटी पर लौटकर ही नहीं आए। नतीजा यह हुआ कि मरीजों की भीड़ इमरजेंसी में पदस्थ डॉक्टर्स के यहां लग रही थी। मरीजों की मुसीबत यह है कि ओपीडी में जब उन्हें हड्‌डी, मेडिसिन, चर्म रोग, चाइल्ड स्पेशलिस्ट, ईएनटी व आई स्पेशलिस्ट बैठे नहीं मिलते तो वे सीधे इमरजेंसी की ओर रुख करते हैं। इमरजेंसी ड्यूटी पर तैनात डॉक्टर्स के सामने परेशानी यह होती है कि वह हर मर्ज के मरीज को कैसे देखे। डॉक्टर्स के मना करने पर मरीज झगड़ा करने पर आमादा हो जाते हैं अथवा परेशानी की दुहाई देकर इलाज की जिद पर अड़ जाते हैं।

इन 3 उदाहरणों से समझिए, कैसे परेशान हैं मरीज व इमरजेंसी ड्यूटी के डॉक्टर


1. शुक्रवार दोपहर 12 बजे जब दैनिक भास्कर की टीम ओपीडी में पहुंची तो वहां स्किन, पीडियाट्रिक, आई स्पेशलिस्ट, ऑर्थाोपेडिक डॉक्टर के चेंबर खाली थे। ऐसे में हाथों में पर्चा लेकर मरीज सीधे इमरजेंसी की ओर पहुंच रहे थे। इमरजेंसी पर तकरीबन 100 से अधिक मरीजों की भीड़ थी। ड्यूटी पर मौजूद एमडी मेडिसिन डॉ. राघवेंद्र यादव के पास मुरैना गांव से आए शिवकुमार ने बताया कि मुझे स्किन की प्रॉब्लम है। डॉ. यादव ने कहा कि मैं एमडी मेडिसिन हूं। ओपीडी समय में आप स्किन के डॉक्टर को दिखाएं। इस पर मरीज झगड़ा करने पर आमादा हो गया। सिक्योरिटी गार्ड ने बमुश्किल उसे समझाया।

डॉक्टर का बंद पड़ा चेंबर।

दोपहर में इन डॉक्टर्स के चेंबर मिले बंद

दोपहर 3 बजे जब दैनिक भास्कर टीम ने दोबारा जिला अस्पताल की ओपीडी का निरीक्षण किया तो सर्जन डॉ. अनूप गुप्ता, डॉ. संजीव बांदिल, डा. विनोद गुप्ता, डॉ. अंकुर गुप्ता के चेंबर खाली पड़े थे। मरीज हाथों में पर्चा लेकर इधर से उधर भटकते हुए देखे गए। वहीं पीडियाट्रिक वार्ड भी पूरी तरह से खाली थे। जबकि हाल ही में पीआईसीयू (पीकू) वार्ड के बगल में पीडियाट्रिक ओपीडी को इस मकसद से चालू किया गया था कि बीमार बच्चों के इलाज के लिए लोगों को भटकना न पड़े। ओपीडी में दोपहर के वक्त डॉ. राघवेंद्र यादव, ईएनटी के डॉ. महेश शर्मा व डॉ. नरेंद्र उपाध्याय ही मरीजों को देखते हुए मिले।

अोपीडी में बैठने के लिए डॉक्टरों को हिदायत देंगे

डॉ. अशोक गुप्ता, सिविल सर्जन जिला अस्पताल

3. इमरजेंसी रूम में मरीजों की भीड़ को चीरती हुई एक महिला अपनी 3 महीने की बच्ची को रोते हुए लेकर आई। रोती हुई महिला को भीड़ से पहले रास्ता नहीं मिला। लोगों ने जब महिला को रास्ता दिलवाया तो वह सीधे इमरजेंसी रूम में आई। बच्ची का दूध से पूरा चेहरा जल गया था। चीखती हुई बच्ची को जब डॉ. यादव देख रहे थे। महिला का कहना था कि पूरे अस्पताल का चक्कर लगा लिया लेकिन कोई डॉक्टर नहीं मिला, तब यहां आई हूं। इसके बाद बच्ची का इलाज कराकर उसे बर्न वार्ड में भर्ती कराया गया। इधर इमरजेंसी के बाहर मरीज गेट पर हल्ला मचाने लगे।

2. गणेशपुरा से आए मरीज मधुकर शर्मा को पीठ यानि रीढ़ की हड्‌डी में दर्द था। वे पर्चा बनवाकर ओपीडी में गए, जहां ऑर्थोपेडिक डॉक्टर्स विनोद गुप्ता, संजीव बांदिल के चेंबर खाली थे। मरीज मधुकर शर्मा भटकते हुए इमरजेंसी रूम में पहुंचा। यहां ड्यूटी पर तैनात डॉक्टर राघवेंद्र यादव से बोला कि मेरी पीठ में दर्द है। इस पर डॉक्टर यादव ने उसे समझाया कि मैं एमडी मेडिसिन हूं और आप ओपीडी में दिखाएं। इस पर मरीज झल्लाते हुए बोला- कि ओपीडी में डॉक्टर नहीं है,ं आप मुझे देख नहीं रहे क्या मैं वेवकूफ हूं। जब डॉ. यादव ने उसे एक्सरे आदि जांच के लिए लिखा तब कहीं जाकर मरीज का गुस्सा शांत हुआ।
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