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आसन नदी पर पुल बनाने चाहिए 25 करोड़ अफसरों ने मांगे 176 करोड़, स्वीकृित अटकी
आसन नदी पर 45 करोड रुपए की लागत से बैराज बनकर तैयार है लेकिन उसमें बारिश का पानी भरने का काम इस साल जून से अगस्त के बीच पूरा नहीं हो पाएगा। बैराज में पानी का भंडारण नहीं होने से मुरैना व भिंड जिले के किसानों को दूसरे साल भी सिंचाई के लिए पानी मुहैया नहीं कराया जा सकेगा। जबकि बैराज भरने से किसानों को 5500 हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई की सुविधा मिल सकेगी।
आसन नदी पर धमकन व जौरा के बीच पुल बनाने के लिए जल संसाधन विभाग ने 25 कराेड़ की डिटेल प्रोजेक्ट रिपोर्ट तैयार की है। इसके अलावा 38 करोड़ रुपए की राशि बैराज से विस्थापित किसानों को जमीन का मुआवजा देने व पुराहथरिया गांव के 83 परिवारों को मुरैना में शिफ्ट करने के लिए चाहिए। चूंकि आसन बैराज की पूर्व स्वीकृति 113 करोड़ रुपए की जारी हुई थी इसलिए पुल का नया प्रस्ताव शामिल किए जाने के बाद यह प्रोजेक्ट अब 176 करोड़ रुपए का हो गया है। एक साल पहले जल संसाधन विभाग ने उक्त राशि को मंजूर कराने का प्रस्ताव प्रमुख अभियंता के माध्यम से प्रमुख सचिव जल संसाधन को भेजा था लेकिन कमलनाथ सरकार के वित्त संकट के कारण इस प्रोजेक्ट के लिए फरवरी बीतने तक प्रशासकीय स्वीकृति जारी नहीं हो सकी है। इस कारण धमकन-जौरा के बीच पुल बनाने का काम मार्च तक शुरू नहीं हो सका है।
ठेकेदार गारंटी पीरियड में बैराज को पानी से भरकर उसके रिसाव को चेक नहीं कर पा रहा है
आसन बैराज, जिसमें इस साल भी नहीं भर सकेगा बारिश का पानी।
किसानों को नहीं मिला मुआवजा
आसन बैराज के निर्माण में आसन नदी किनारे बसे 13 गांव के किसानों की 523 हेक्टेयर जमीन गई है। अधिग्रहित जमीन का मुआवजा किसानों को बैराज बनने तक नहीं मिल सका है। जमीन चली जाने से किसान खेती से भी गए और पैसा न मिलने के कारण दूसरे स्थान पर खेती के लिए नई जमीन नहीं खरीद पा रहे हैं। अभी तक किसानों को जमीनों के एवज में 45 करोड रुपए का मुआवजा दिया जा चुका है तथा 20 करोड़ रुपए का मुआवजा देने की तैयारी चल रही है। बैराज बनाने के लिए कुल 640 हेक्टेयर जमीन का उपयोग किया गया है जिसमें सरकारी जमीन भी शामिल है।
कोतवाल व पिलुआ डैम में पानी की जरूरत
कोतवाल व पिलुआ डैम को भरा रखा जाना समय की जरूरत है क्योंकि उसके पानी का आरक्षण प्रशासन ने कई प्रयोजनों के लिए किया है। 50 साल से डैम का पानी गोहद व भिंड जिले की सिंचाई के लिए आरक्षित चल रहा है। उसके बाद मुरैना ब्लॉक के 22 गांवों की जलापूर्ति के लिए जिला जल उपयोगिता समिति ने 2014 में कोतवाल डैम के पानी का आरक्षण उस प्रयोजन के लिए भी कर दिया है। बानमोर की पेयजल योजना के लिए भी कोतवाल व पिलुआ डैम का पानी प्रदाय किया जा रहा है। बानमोर क्षेत्र के जेके टायर प्लांट से लेकर उद्यानिकी विभाग के प्रोजेक्ट के लिए भी आसन नदी के पानी को उपयोग में लिया जा रहा है। एक साथ पांच प्रोजेक्ट के लिए पानी के उपभोग के कारण कोतवाल व पिलुआ डैम को 12 महीने भरा रखने पर काम चल रहा है।
जून में भी नहीं भरा गया बैराज में आसन से पानी
{15 जून से 15 अगस्त 2019 तक होने वाली बारिश का पानी आसन नदी में आया लेकिन विधायक की आपत्ति के कारण उसे बैराज में नहीं भरा जा सका। कमोवेश यही स्थिति इस साल भी बनी हुई है। बैराज कंपलीट होने के बाद जल संसाधन विभाग के अधिकारी बारिश के पानी को बैराज में भरने के लिए तैयार नहीं हैं।
{जौरा, पहाड़गढ़ व सुमावली अंचल के जंगल क्षेत्र में होने वाली बारिश का पानी आसन व सोन नदी में आता है। लेकिन नदी की चौड़ाई व गहराई कम होने के कारण बारिश का पानी नदी क्षेत्र में दो महीने ही ठहर पाता है। चूंकि कोतवाल व पिलुआ डैम काे भरने के लिए आसन नदी में पानी उपलब्धता चाहिए इसलिए इस नदी पर जल संसाधन विभाग ने 45 करोड़ रुपए खर्च कर बैराज बनवाया है।
{बैराज बनने से लोगों को लाभ होगा कि पांच किलोमीटर क्षेत्र के 10 से अधिक गांवों का जलस्तर गर्मियों में अधिक नीचे नहीं जाएगा। किसानों की मवेशी के लिए पीने के पानी की जरूरतें भी पूरी होंगी लेकिन बैराज का उपयोग नहीं होने से ये लाभ उन्हें दो साल से नहीं मिल पा रहे हैं।