पार्षदाें का निगमायुक्त के चैंबर में हंगामा, बोले- अाचार संहिता में कैसे खरीद लिए 80 लाख के पोर्टेबल टॉयलेट

Murena News - आचार संहिता के दौरान नगर निगम द्वारा की गई खरीद का कांग्रेस व भाजपा पार्षदों ने विरोध किया है। चार पार्षदों ने...

Bhaskar News Network

May 18, 2019, 08:36 AM IST
Morena News - mp news how to buy 80 million portable restrooms in the code of conduct
आचार संहिता के दौरान नगर निगम द्वारा की गई खरीद का कांग्रेस व भाजपा पार्षदों ने विरोध किया है। चार पार्षदों ने गुरुवार देर शाम निगमायुक्त एमसी वर्मा के चैंबर में पहुंचकर इस बात पर हंगामा खड़ा किया कि निगम ने बिना टेंडर के 80 लाख रुपए कीमत के चार पोर्टेबल टॉयलेट व 60 से 70 लाख रुपए कीमत की दवाई कैसे व क्यों खरीद ली। पार्षदों ने फाइल दिखाने के लिए आयुक्त पर दबाव बनाया लेकिन वे हंगामे के बीच दस्तावेज नहीं दिखा सके।

नगर निगम के नए गाडी अड्‌डा में चार दिन पहले भोपाल से चार पोर्टेबल टॉयलेट आए हैं। 80 लाख कीमत के ये टॉयलेट देखकर पार्षदों ने विरोध शुरू कर दिया है। कांग्रेस पार्षद अजय यादव, गौरव यादव, संतोष दुबे व भाजपा पार्षद कल्लू भदौरिया गुरुवार शाम 6.30 बजे निगमायुक्त एमसी वर्मा के चैंबर में पहुंचे। कांग्रेस पार्षदों ने मुद्दा उठाया कि लोकसभा चुनाव की आचार संहिता अभी समाप्त नहीं हुई है। उससे पहले नगर निगम ने किसके आदेश से किस नियम के तहत पोर्टेबल खरीद लिए। क्या इनकी स्वीकृति मेयर इन काउंसिल (एमआईसी) से ली गई है या साधारण सभा ने पोर्टेबल टॉयलेट की मांग की थी। 80 लाख रुपए की खरीद नगर निगम में बिना टेंडर कैसे की जा सकती है। यह तो आचार संहिता का सरासर उल्लंघन है। पार्षद संतोष दुबे ने निगमायुक्त से कहा कि वे पोर्टेबल टॉयलेट खरीदने की फाइल पार्षदों को दिखाएं ताकि यह स्पष्ट हो सके कि क्रय आदेश किसने किस आधार पर जारी किया।

चारों पार्षदों ने दस्तावेज दिखाने को कहा, लेकिन हंगामे के बीच निगमायुक्त नहीं दिखा सके खरीदी से संबंधित फाइलें

नए गाडी अड्‌डा में रखे भोपाल से आए पोर्टेबल टॉयलेट।

दो साल पहले खरीदे गए चार पोर्टेबल टॉयलेट खरीदने पर भी हुआ था हंगामा

नगर निगम के पास चार पोर्टेबल टॉयलेट पहले से उपलब्ध हैं लेकिन उनका उपयोग बहुतायत में नहीं हो पा रहा है। बड़े सार्वजनिक कार्यक्रमों में उन पोर्टेबल टॉयलेट्स को भेजा जाता है लेकिन टॉयलेट्स पर कर्मचारी मौजूद न होने की दशा में वह आम जनता के उपयोग में नहीं आ पाते हैं। नगर निगम द्वारा दो साल पहले खरीदे गए सिंगल टॉयलेट्स को लेकर नगर निगम की साधारण सभा में कांग्रेस समेत भाजपा पार्षदों ने जबरदस्त हंगामा किया था कि उनकी खरीद नगर निगम ने महंगे रेट पर की है। लाखों रुपए व्यय करने के बाद भी सिंगल टॉयलेट शहर में इधर-उधर अनुपयोगी दशा में पड़े हुए हैं। निगम के सफाई अमले ने उनको साफ कराना भी जरूरी नहीं समझा। सिंगल टॉयलेट खरीदने का पुराना मुद्दा जैसे-तैसे शांत हुआ तब तक नए पोर्टेबल टॉयलेट खरीदे जाने का हंगामा फिर से शुरू हो गया है।

जेम कंपनी से खरीदे गए हैं टॉयलेट

आयुक्त नगर निगम एमसी वर्मा से दैनिक भास्कर ने जब आचार संहिता में खरीदे गए पोर्टेबल टॉयलेट व दवाइयां पर चर्चा की तो उनका कहना था कि कल गुरुवार को पार्षदों ने इस विषय पर उनसे मर्यादा लांघकर चर्चा की। मैंने उन्हें बताया कि पोर्टेबल टॉयलेट की खरीद आचार संहिता से पहले के आदेश पर की गई है। पोर्टेबल टॉयलेट की सप्लाई भोपाल की जेम कंपनी ने की है। फाइल से संबंधित बाबू शहर से बाहर होने के कारण परचेज फाइल दिखाना फिलहाल संभव नहीं है। बाबू के आने के बाद खरीद की कार्रवाई से पार्षदों को अवगत कराया जाएगा। आयुक्त का कहना था कि पार्षदों के बातचीत करने का लहजा अच्छा नहीं था। उनकी भाषा दबाव बनाने की भाषा थी जो गलत है।

60-70 लाख की दवा भी खरीदी पार्षदों ने इस पर भी उठाए सवाल

पार्षदों ने इस बात पर भी हैरत जाहिर की कि आचार संहिता के दौरान निगम अफसरों ने 50 लाख रुपए की मच्छर मारने वाली दवा व 15-15 लाख रुपए कीमत की दो अलग-अलग दवाइयां भी खरीदी हैं। 60 से 70 लाख रुपए कीमत की दवाईयों की क्या उपयोगिता है इसका जबाव निगमायुक्त दें। दवाईयों की खरीद के सवाल पर भी निगमायुक्त पार्षदों को संतोषजनक जबाव नहीं दे पाए।

इधर, पंचायती धर्मशाला व गणेशपुरा में बदलेगी व्यवस्था

सिंधिया स्टेट की बोरिंग होगी बंद तीन इंची बोर से सप्लाई होगा पानी

भास्कर संवाददाता|मुरैना

शहर के 2 बड़े इलाकों पंचायती धर्मशाला व गणेशपुरा में पानी सप्लाई करने वाली सिंधिया स्टेट के समय की बोरिंग को नगर निगम बंद करने जा रहा है। सालों तक शहर के मुख्य बाजार सहित 5 हजार से अधिक घरों में पानी सप्लाई करने वाली 250 फीट गहरी 8 से 10 इंची बोरिंग गर्मियों में भू-जलस्तर कम होने की वजह से पानी कम दे रही थी। पानी सप्लाई प्रभावित न हो, इसके लिए नगर निगम ने इसी बोरिंग के नजदीक लाखों रुपए खर्च कर एक 3 इंची बोरिंग कराई है, लेकिन नगर निगम इस बोरिंग को चालू कर पुरानी बोरिंग बंद करने की तैयारी में है।

स्थानीय लोगों का कहना है कि नई बोरिंग से पानी सप्लाई करना अच्छी बात है लेकिन गर्मियों में अक्सर भू-जलस्तर गिरने की समस्या से बोरिंग बंद हो जाती है। सिंधिया स्टेट के समय की यह बोरिंग बारिश के बाद फिर से जीवित हो जाएगी। नगर निगम इसे पूरी तरह से बंद कर देगा तो संकट खड़ा हो जाएगा। जो नई बोरिंग है, वह इतनी बड़ी नहीं कि इतनी बड़ी आबादी को पानी सप्लाई कर सके। ऐसे में नगर निगम को पुरानी बोरिंग को विकल्प के रूप में रखना चाहिए। अगर अकस्मात नई बोरिंग फेल हो गई तो कम से कम एक बड़े एरिया में पानी सप्लाई के लिए पुरानी बोरिंग को जोड़कर पेयजल व्यवस्था को सुचारू की जा सकेगी।

नई बोरिंग में लगा रहे घटिया पाइप:

गंभीर बात यह है कि सिंधिया स्टेट की जो बोरिंग अभी तक पानी सप्लाई कर रही है, उसमें 100 साल से भी अधिक पुराने मजबूत पाइप लगे हैं, जो आज भी सही काम कर रहे हैं, जबकि तीन इंच की नई बोरिंग में घटिया क्वालिटी के पाइप डाले जा रहे हैं, जो थोड़ा सा भी प्रेशर पड़ने पर फट सकते हैं। स्थानीय लोगों ने निगमायुक्त मूलचंद्र वर्मा से इस ओर ध्यान देने की मांग की है।

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