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देखरेख के अभाव में प्राचीन बावड़ियां और कुएं खो रहे अस्तित्व, जमा हो रहा कचरा

Murena News - नगर की प्राचीन बावडिय़ां और कुएं बदहाल हो रहे हैं। इन जलस्रोतों की सुध लेने वाला कोई नहीं है। जिसकी वजह से इन बावड़ी...

Jan 16, 2020, 09:05 AM IST
Sabalgarh News - mp news in the absence of maintenance the ancient stepwells and wells are losing existence accumulating garbage
नगर की प्राचीन बावडिय़ां और कुएं बदहाल हो रहे हैं। इन जलस्रोतों की सुध लेने वाला कोई नहीं है। जिसकी वजह से इन बावड़ी का अस्तित्व ही धीरे-धीरे खत्म हो रहा है। लेकिन खावडिय़ों का सफाई और मरम्मत को लेकर स्थानीय प्रशासन द्वारा ध्यान नहीं दिया जा रहा है।

बता दें कि नगर में इस समय दो बावडिय़ां अच्छी स्थिति में है। यदि इनकी मरम्मत और गहरीकरण करा दिया जाए तो यह लोगों के उपयोग में आ सकते हैं। बावरी, मांगरोल रोड, अलखिया खो रामपुर रोड, छोलेश्वर रोड अमर खो सहित अन्य कुआं शामिल हैं। लेकिन पचास साल पहले इनकी संख्या कहीं ज्यादा थी, हालांकि अब इनकी क्षमता न के बराबर बची है, लेकिन अब यह बदहाल स्थिति में है। धीरे-धीरे इनका अस्तित्व समाप्त होता जा रहा है। इन कुओं और बावडिय़ों को इस खूबसूरती से बनवाया जाता था कि इनका उपयोग केवल पानी के लिए ही नहीं गर्मियों के दिनों में पीने व नहाने के लिए भी किया जा सके। जबकि कई बार ग्रामीणों ने स्थानीय प्रशासन को मरम्मत के लिए मांग की है।

कुएं-बावड़ी में डाल रहे कचरा

नगर के स्थिति वावड़ी और कुआं में कचरा डालकर पूरा जा रहा है। जबकि एक समय यह कुएं लोगों के जीवन उपयोगी बने हुए थे। समाजसेवी नथमल गुप्ता, सुरेश सिंघल, आशीष गुप्ता, भगवती प्रसाद विंदल का कहना है कि प्राचीन बावड़ी और कुओं को संरक्षित किया जाना चाहिए।

अनदेखी
सबलगढ़ क्षेत्र में सूखा पड़ा कुआं।

प्रशासन की उपेक्षा से अस्तित्व खो रहे कुएं व बावड़ी

शहर के चंबल कॉलोनी में पीडब्ल्यूडी रेस्ट हाउस के सामने स्थित बावरी, मांगरोल रोड, अलखिया खो रामपुर रोड, छोलेश्वर रोड अमर खो के अलावा ग्रामीण क्षेत्र में कुआं सूखे पड़े हुए हैं। इनकी देखरेख और मरम्मत को लेकर स्थानीय प्रशासन का ध्यान नहीं हैं।

टीम भेज कर मंगाई जाएगी जानकारी


नगर की बेसिक जियोग्राफी होती है बावड़ी और कुएं

नगर के पूर्व अनवर खान वार्ड नंबर 5 का कहना है कि बावड़ी और कुएं असल में किसी भी शहर की एक बेसिक जियोग्राफी होती है। अगर प्लान करने वाले इस गुण को देखकर योजनाएं बनाएं तो बेहतर होगा। इससे ऐतिहासिक महत्व की धरोहरें सुरक्षित होगी। नगर शहर का विकास भी समग्र तरीके से हो सकेगा। कुएं बावडिय़ों को एक विकल्प के रूप में भी इस्तेमाल किया जा सकता है। पीडब्ल्यूडी कॉलोनी, अस्पताल परिसर, सेवाराम का बाग, आदि एक जमाने में ऐसे थे।

बजट के बाद कराएंगे मरम्मत


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