जेनरिक दवाई के नाम पर गरीब मरीजों से मेडिकल संचालक लूट रहे मनमाना पैसा, नहीं हो रही कार्रवाई

Bhaskar News Network

Jan 14, 2019, 04:01 AM IST
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भास्कर संवाददाता। अंबाह

जेनरिक दवाइयों के चलन को बढ़ावा देने के पीछे सरकार का उद्देश्य लोगों को सस्ती दवा उपलब्ध कराना है। लेकिन दवा कंपनियों की मनमानी की वजह से जेनरिक दवाइयों के जरिए भी मरीजों को लूटा जा रहा है। हालात यह है कि दवा विक्रेता जेनरिक दवाओं पर 500 से एक हजार प्रतिशत तक मुनाफा वसूल रहे हैं। नगर मे दवा विक्रेताओं द्वारा जमकर जेनरिक दवा बेची जा रहीं है। मरीजों को ब्रांडेड व जेनरिक दवाओं के बारे में कोई भी जानकारी नहीं रहती है। इन दवाओं में केवल रेफर का अंतर होता है। जिससे मरीज पहचान नहीं पाते हैं। इससे दवा खरीददारों का नुकसान तो हो ही रहा है, साथ ही सरकार को हर माह लाखों रुपए राजस्व का घाटा हो रहा है।

बता दें कि दवा विक्रेता अपने मन माफिक मूल्यों पर मार्केट में दवा बेचकर 500 से 1 हजार प्रतिशत का मुनाफा कमा रहे हैं। भास्कर को एक मेडिकल विक्रेता ने नाम ना छापने की शर्त पर बताया कि जेनरिक दवा में जितनी कमाई दवा विक्रेता करते हैं। उस पर किसी की नजर नही हैं। दस गोलियों के स्ट्रिप पर अगर 100 रुपए प्रिंट मूल्य है तो वह दवा 7 से आठ रुपए की मेडिकल संचालकों को मिलती है और वह बिना बिल के अपनी मर्जी से मार्केट में उसे बेचते हैं। जिससे बीमार यानी दवा खरीददार को भारी नुकसान तो होता ही है। साथ ही सरकार को टैक्स नहीं मिल पा रहा हैं।

यह हैं अंतर: सामान्य दवा या जेनरिक दवा वह दवा है जो बिना किसी पेटेंट के बनाई और वितरित की जाती है। जेनरिक दवा के फॉर्मुलेशन पर पेटेंट हो सकता है। लेकिन उसके सक्रिय घटक पर पेटेंट नहीं होता। जेनरिक दवाईयां गुणवत्ता में किसी भी प्रकार के ब्रांडेड दवाईयों से कम नहीं होतीं तथा यह उतनी ही असर कारक है, जितनी की ब्रांडेड दवाईयां।

अक्सर 70 प्रतिशत डॉक्टर लिखते हैं जेनरिक दवाइयां

नगर में सरकारी डॉक्टरों के साथ-साथ प्राइवेट चिकित्सक मरीजों को देखने के बाद ठीक करने के लिए जेनरिक दवाइयां लिख रह हैं। साथ ही सेटिंग वाले मेडिकल स्टोर का नाम बता दिया जाता है। जहां पर जेनरिक दवाएं मरीजों को दे दी जाती है। सामान्य मरीज इन दवाओं में अंतर नहीं जानता है। मजबूरन इन दवाइयों को एथिकल दवाओं से ज्यादा रेट में खरीदने के लिए मजबूर है। बता दें कि जेनरिक दवाओं में डॉक्टर और मेडिकल स्टोरों को जबर दस्त मुनाफा होता है।

मरीज को दवाओं का लेना चाहिए बिल


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