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ओपीडी 400 की, अस्पताल में एक भी मरीज भर्ती नहीं, सभी रैफर किए जा रहे

एक वर्ष पहले
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प्रदेश सरकार भले ही सरकारी अस्पतालों में जरूरी सुविधा मुहैया कराने का दावा करें, लेकिन हकीकत में ऐसा नहीं है। नगर के एक मात्र सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र कैलारस में है, जिसकी हालत यह है कि सुविधाओं के अभाव में डॉक्टर मरीजों को जिला अस्पताल के लिए रैफर कर देते हैं। वे अस्पताल में पलंग एवं अन्य सुविधाओं की कमी होने के कारण भी मरीजों को भर्ती नहीं कर पा रहे हैं।

मध्य प्रदेश शासन के स्वास्थ्य विभाग में कैलारस अस्पताल अभी भले ही सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के नाम से दर्ज है। परंतु वर्तमान में कैलारस अस्पताल प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र से भी काफी बदतर है। 400 की ओपीडी भर्ती एक भी नहीं, जबकि वर्तमान में मौसमी बुखार एवं अन्य बीमारियों के प्रतिदिन करीबन 300 से 400 मरीज प्रतिदिन अस्पताल में अपना उपचार कराने के लिए आ रहे हैं। वर्तमान में वार्ड में एक भी मरीज भर्ती नहीं मिला, क्योंकि चिकित्सकों के अभाव में वर्तमान में पदस्थ डॉक्टर दवाइयां देकर मुरैना के लिए रैफर कर देते हैं।

400 मरीजों की ओपीडी के बावजूद वार्ड में खाली पलंग।

30-35 साल पूर्व का स्टाफ पदस्थ

डॉ. शोभाराम मिश्रा, ब्लॉक मेडिकल ऑफिसर

घोषणा 50 पलंग की, अब तक नहीं हुई पूरी

नवीन बिल्डिंग के शिलान्यास के अवसर पर मध्य प्रदेश के तत्कालीन स्वास्थ्य मंत्री रुस्तम सिंह द्वारा कैलारस अस्पताल को अपग्रेड करने की घोषणा की गई थी जिसके अंतर्गत 20 पलंग से 50 पलंग का वार्ड बनाने एवं योग्य चिकित्सकों की व्यवस्था करने की घोषणा की गई थी, परंतु वह घोषणा अभी तक पूरी नहीं हो पाई है। कैलारस अस्पताल में विशेषज्ञ डॉक्टरों की कमी होने के कारण मरीज काफी परेशान होते है यहां पर अभी मात्र दो चिकित्सक कार्यरत हैं जिसमें से एक पर बीएमओ का प्रभार है दूसरा शिशु रोग विशेषज्ञ है। इसके अलावा यहां पर न कोई सर्जन है ना कोई महिला चिकित्सक है, जबकि यह पद पूर्व से ही खाली पड़े हुए हैं।
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