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बड़ाेखर में लग रही रेत की मंडी, अफसर बोले- परीक्षा में कोई हादसा न हो, बाद में करेंगे कार्रवाई

एक वर्ष पहले
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बड़ोखर के लोग बोले- क्या जब बड़ा हादसा हाेगा तब जागेगी पुलिस व वन विभाग

बड़ोखर स्थित तिराहे पर खड़ी होने वाली रेत की दर्जनों ट्रैक्टर-ट्रॉलियां अब यहां से 100 मीटर दूर मंदिर से पॉलिटेक्निक तक खड़ी होने लगी हैं। गंभीर बात यह है कि बड़ोखर तिराहे पर पुलिस वाहनों में कर्मचारी तैनात तो रहते हैं, लेकिन वे सामने से गुजरने वाली रेत की ट्रैक्टर-ट्रॉलियों को पकड़ना तो छोड़िए रोकने की जहमत भी नहीं उठाते। नतीजतन बे-खौफ रेत के ट्रैक्टर-ट्रॉली फर्राटे भरते हुए इस इलाके से गुजरते हैं जो आमजन के लिए खतरा बने हुए हैं। इस संबंध में पुलिस अधिकारियों का तर्क है कि वर्तमान में 10वीं एवं 12वीं की परीक्षाएं चल रही है। इसलिए यदि परीक्षा के समय कार्रवाई करते हैं तो रेत माफिया ट्रैक्टर-ट्रॉली को तेजी से दौड़ाएगा। इससे परीक्षार्थियों के कुचलने का खतरा आशंकित है।

गौरतलब है कि मुरैना बड़ोखर पर लगने वाली रेत की मंडी स्थानीय जनता के लिए तो सिरदर्द है ही वन विभाग व पुलिस की कार्रवाई न होने से यहां से सुबह के वक्त पैदल गुजरते राहगीरों की जान हमेशा खतरे में रहती है। एक साल पहले इसी इलाके में साइकिल से स्कूल जा रही मासूम बच्ची को रेत की ट्रैक्टर-ट्रॉली ने कुचल दिया था। एक स्कूल वैन को भी टक्कर मार दी, जिससे बड़ा हादसा टल गया। लगातार दबाव के बाद वन विभाग व पुलिस ने कार्रवाई। तब कुछ दिन तक रेत की ट्रैक्टर-ट्रॉलियां खड़ी होना बंद हो गई। लेकिन वर्तमान में बड़ोखर तिराहे से 100 मीटर दूर बड़ोखर मंदिर से लेकर पॉलिटेक्निक तक रेत के ट्रैक्टर-ट्रॉली खड़े होने लगे तथा सुबह के समय यह इलाका रेत की मंडी की तरह नजर आता है।

नेशनल हाईवे स्थित बाइपास पर भी खड़े रहते हैं ट्रैक्टर-ट्रॉली

चंबल रेत से भरे ट्रैक्टर-ट्रॉली काका ढाबा से आगे अंबाह बाईपास पर भी खड़े हो रहे हैं। जबकि यहां वन मंडल कार्यालय की दूरी केवल 200 मीटर है। वन विभाग के अफसर भी चंबल रेत के परिवहन पर निगरानी रखने का दावा कर रहे हैं, लेेकिन हकीकत इससे उलट है। क्योंकि सुबह 4 बजे से 8 बजे तक अंबाह बाईपास मार्ग भारी संख्या में चंबल रेत से भरे ट्रैक्टर-ट्रॉली गुजरते देखे जा सकते हैं।

इन घाटों पर हो रहा चंबल रेत का अवैध उत्खनन

मुरैना जनपद क्षेत्र के जिन घाटों पर वर्तमान में चंबल रेत का उत्खनन किया जा रहा है। उनमें गड़ौरा, रिठौरा, कैमरा, पिपरई, कैंथरी, जैतपुर प्रमुख रूप से शामिल हैं। रेत माफिया के लोग रात के समय इन घाटों पर चंबल रेत का अवैध उत्खनन करते हैं। इसके बाद सुबह 4 बजे से चंबल रेत को शहर में खपाने का काम किया जा रहा है। पुलिस व वन विभाग की टीम कार्रवाई न कर सके। इसके लिए माफिया के गुर्गे बाइकों पर सवार होकर रैकिंग करते हैं।

100 मीटर दूर पुलिस, सामने से गुजर रहे ट्रैक्टर

बड़ोखर तिराहे पर पुलिस ने स्थायी प्वाइंट लगा दिया है। जहां दो वाहनों सहित पुलिस के जवान तैनात रहते हैं। लेकिन इससे 100 मीटर दूर ही बड़ोखर मंदिर पर खड़े होने के लिए रेत के वाहन ओवरब्रिज से होकर पुलिस वाहन के सामने से व बायपास होकर ताल वाली रोड से मंदिर तक पहुंच रहे हैं। सामने तैनात पुलिसकर्मी सरकारी जीप में बैठकर सिर्फ रेत की ट्रैक्टर-ट्रॉलियों को निहारते रहते हैं।

इलाका देखकर कार्रवाई करूंगा

बिजेंद्र झा, डीएफओ वन मंडल मुरैना

बड़ाेखर में इस तरह लग रही रेत की मंडी।
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