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सफाई उपकरणों के लिए नहीं मिले दो करोड़, शहर में डाेर टू डोर कचरा समेटने का काम ठप
47 वार्डों में डोर टू डोर कचरा कलेक्शन का काम नगर निगम के वित्त संकट के कारण बड़े पैमाने पर प्रभावित हो रहा है। छह महीने की कवायद के बाद भी निगम अफसर पाैने 3 लाख आबादी के 70 टन कचरे को रोजाना उठाने में कामयाब नहीं हो पा रहे हैं। अव्यवस्था का बड़ा कारण सामने आया है कि कचरे के परिवहन के लिए नए वाहनों की जरूरत बीते एक साल में पूरी नहीं हो सकी है क्योंकि नगरीय प्रशासन विभाग से मुरैना को दो करोड़ का बजट अब तक नहीं मिल सका है।
डोर टू डोर कचरा कलेक्शन का सीन है कि 47 वार्डों के लिए नगर निगम के पास 22 टिपर गाड़ियां हैं। 25 टिपर गाड़ियों की कमी के कारण प्रत्येक वार्ड में निगम के कर्मचारी कचरा लेने नहीं पहुंच पा रहे हैं। इस कारण शहर के 35 व ग्रामीण इलाकों के 12 वार्डों में कचरा समेटने का काम बड़े पैमाने पर प्रभावित हो रहा है। नगर निगम ने एक साल पहले 24 टिपर गाड़ियों की खरीद के लिए शासन से डेढ़ कराेड़ रुपए का बजट मांगा था जो फरवरी बीते तक निगम को नहीं मिल सका है। इसके अलावा नगर निगम ने 18 लाख रुपए कीमत के दो ट्रेक्टर-ट्रालियों समेत 18 लाख रुपए कीमत के दो डोजर खरीदने के लिए भी बजट मांगा लेकिन वह पैसा भी निगम काे नहीं मिला है। इस हाल में नगर निगम किराए के तीन जेसीबी मशीनों से कचरा समेटने का काम करा रहा है। कचरे के परिवहन के लिए 10 ट्रेक्टर-ट्राली भी किराए पर लिए गए हैं। तीनों डोजर भी ठेका पर लिए जाकर उनसे कचरा भरवाने का काम कराया जा रहा है। इस स्थिति से जाहिर हो रहा है कि नगर निगम ने 2019-20 का जो 417 करोड़ रुपए का बजट पारित किया था वह कागजी बजट निकला क्योंकि आय के साधन शून्य होने के कारण निगम बीते एक साल में डोजर तक नहीं खरीद पाया। अपनी आय से नगर निगम काे 20 नई टिपर गाड़ियां खरीदना चाहिए थीं लेकिन यह काम भी वित्तीय वर्ष समाप्त होने तक पूरा नहीं हो सका है।
शहर की सफाई व्यवस्था के लिए अनुबंधित ईकोग्रीन कंपनी ने बकाया दो करोड़ रुपए के भुगतान के अभाव में अपनी 20 टिपर गाड़ियों समेत 20 अन्य वाहनों को नगर निगम की सेवाओं से अलग कर दिया है।
आबकारी दफ्तर के सामने इस तरह जलाया जा रहा कचरा।
सफाई में लगे 600 से ज्यादा कर्मचारी
शहर के 47 वार्डों की सफाई के काम में नगर निगम ने 600 से ज्यादा कर्मचारियों को लगाया है। उनके वेतन पर लाखों रुपए खर्च किए जाने के बाद शहर की सफाई व्यवस्था ठप हो गई है। क्योंकि सफाई कामगार कचरा एकत्रित कर उसे उठाने की बजाय मौके पर आग लगाकर जला रहे हैं जबकि कचरा जलाने पर शासन का कड़ा प्रतिबंध है। निगम कर्मचारियों के पास कचरा उठाने के लिए समुचित उपकरण व वाहन नहीं होने के कारण उन्हें कचरे को जलाना आसान लगता है। लेकिन कचरे जलने से जो प्रदूषण होता है उससे बाजार के दुकानदार परेशान हैं।
प्रतिदिन ग्वालियर की जगह निवी भेज रहे कचरा
शहर से प्रतिदिन निकल रहे 70 टन कचरे को नगर निगम ने अब ग्वालियर की बजाय निवी भेजना शुरू कर दिया है। जबकि निवी की जमीन पर निगम अभी तक ट्रचिंग ग्राउंड विकसित नहीं कर सकी है। शहर से 7 किमी दूर स्थित निवी तक कचरे के वाहनों को कम भेजना पड़े इसलिए निगम अफसर शहर के गीले कचरे को मेला मैदान में फिंकवा रहे हैं।
वाहनों की कमी, शहर में दोपहर 2 बजे तक उठ रहा कचरा
वाहनों की कमी के कारण नगर निगम के सफाई कर्मचारी गली-मोहल्ले व प्रमुख बाजारों के कचरे को सुबह 10 बजे तक की बजाय दोपहर 2 बजे तक उठा रहे हैं। किसी भी प्रमुख चौराहे पर गंदगी के ढेर इसके गवाह हैं।
शासन से बजट मांगा है
ललित शर्मा, सहायक यंत्री नगर निगम