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कॉलेज प्राचार्य को तबादले का डर, सत्तापक्ष के दबाव में निरस्त किया वार्षिकोत्सव, राज्यपाल को शिकायत करेगा छात्रसंघ

सियासत किसी भी गलियारे से राजनीतिक पैंतरेबाजी की गली निकाल ही लेती है। ऐसा ही उदाहरण गुरुवार को सामने आया है।...

Danik Bhaskar | Mar 02, 2018, 04:40 AM IST
सियासत किसी भी गलियारे से राजनीतिक पैंतरेबाजी की गली निकाल ही लेती है। ऐसा ही उदाहरण गुरुवार को सामने आया है। मामला स्वामी विवेकानंद सरकारी कॉलेज का वार्षिकोत्सव समारोह निरस्त करने का है। जिसे कांग्रेस के पूर्व विधायक दिलीपसिंह गुर्जर ने पॉलीटिकल स्टैंड बनाकर भाजपा पर कार्यक्रम निरस्त करने की साजिश रचने का आरोप लगाया है। गुर्जर ने विधायक दिलीपसिंह शेखावत को टारगेट करते हुए मीडिया को लिखित बयान जारी किया है। इसमें उन्होंने कहा है कि अव्वल तो छात्रसंघ के आयोजन में किसी भी राजनीतिक दल की सीधी भूमिका नहीं होती। बावजूद सत्तापक्ष से जुड़े लोगों को वार्षिकोत्सव में अतिथि बनने का इतना शौक था कि उन्हें शहीद गिरिजेश गुप्ता, कन्हैयालाल सिसौदिया के परिजन को मुख्य अतिथि बनाने पर ही आपत्ति थी। विरोध हुआ तो बाद में राजी हो गए। लेकिन वार्षिकोत्सव में भाजपा के नेताओं को भी अतिथि बनाने पर अड़ गए। गुर्जर ने छात्रसंघ पदाधिकारियों के प्रतिनिधिमंडल के साथ भोपाल पहुंचकर सत्तापक्ष के दबाव में कॉलेज प्रबंधन की मनमानी के खिलाफ शिकायत करने की बात भी कही है।

टेंट लगाने पहुंचे मजदूर 4 किमी से बैरंग लौटे

गौरतलब है कि कॉलेज का वार्षिकोत्सव निरस्त करने की सूचना टेंट हाउस संचालक और अन्य व्यवस्था जुटाने वाले वेंडरों को नहीं दी गई थी। नतीजतन सुबह ही टेंट लेकर मजदूर पहुंच गए थे। मगर उन्हें वहां से बैरंग लौटना पड़ा। कार्यक्रम में शामिल होने विद्यार्थी भी पहुंचे मगर उन्हें उत्सव निरस्त होने की सूचना दी गई। कारण पूछा तो प्राचार्य ने मौन साथ लिया।

जो खुद दबाव में वह कैसे बनाएंगे बच्चों को निडर

गुर्जर बोले- मंगलवार को छात्रसंघ दोनों दलों से समान संख्या में नेताओं को बुलाने पर राजी भी हो गया। लेकिन बुधवार को भाजपा के 5 नेता और आमंत्रण पत्र में अतिथि के रूप में दर्ज हो गए। इससे जाहिर होता है सत्तापक्ष से जुड़े लोग कॉलेज चुनाव में भाजपा विचारधारा समर्थित संगठन की हार से अब तक व्यथित हैं। गुर्जर के अनुसार सत्तापक्ष ने नियोजित तरीके से वार्षिकोत्सव निरस्त कराया है। प्रभारी प्राचार्य डॉ.शीला ओझा इसलिए मौन हैं क्योंकि उन्हें डर है कि उनका तबादला न हो जाए, लेकिन वार्षिकोत्सव में शहीदों के परिजन को मुख्य अतिथि बनाने के बाद कार्यक्रम निरस्त करना सबसे बड़ा अपमान है। क्योंकि ऐसा कुछ नहीं जिससे कार्यक्रम निरस्त करने जैसा कदम उठाना पड़े।

कांग्रेस का आरोप

शहीद के परिजन को मुख्य अतिथि बनाकर कार्यक्रम निरस्त करना सबसे बड़ा अपमान

कार्यक्रम निरस्त होने से सामान वापस ले जाते टेंट हाउस कर्मचारी।