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सरकारी में गर्भवती का ब्लड ग्रुप बी तो प्राइवेट में निकला ए पॉजीटिव

सरकारी अस्पताल की पैथोलॉजी की गलत ब्लड रिपोर्ट की वजह से गर्भवती महिला की जान सांसत में आ सकती थी। कारण लैब ने जांच...

Bhaskar News Network | Last Modified - Apr 01, 2018, 05:00 AM IST

सरकारी अस्पताल की पैथोलॉजी की गलत ब्लड रिपोर्ट की वजह से गर्भवती महिला की जान सांसत में आ सकती थी। कारण लैब ने जांच में जिस गर्भवती का ब्लड ग्रुप बी पॉजीटिव बताया, उसी का ब्लड ग्रुप प्राइवेट लैब में ए पॉजीटिव निकला। शंका होने पर अन्य प्राइवेट अस्पताल में भी ब्लड टेस्ट रिपोर्ट ली गई तो यहां भी ब्लड ग्रुप ए-पॉजीटिव भी निकला। यदि महिला सरकारी अस्पताल की लैब की रिपोर्ट पर विश्वास कर खून चढ़वा लेती तो उसकी जान जा सकती थी। अलग-अलग ब्लड ग्रुप होने से रक्त कोशिकाएं जाम हो जाती हैं, अन्य अंगों पर इसका दुष्प्रभाव होता।

ग्राम रोहलकलां निवासी गर्भवती अनिताबाई पति दिनेश का उपचार डॉ. माधुरी लघाटे द्वारा किया जा रहा था। फरवरी में खून की कमी का अंदेशा होने पर डॉ. लघाटे ने जांच कराने को कहा था। इस पर निजी लैब में दिनेश ने जांच कराई, ब्लड ग्रुप ए-पॉजीटिव आया और रक्त की कमी नहीं दर्शाई गई। डॉ. लघाटे ने 28 मार्च को दोबारा जांच कराने को कहा था। 27 मार्च को अनिता को पेट दर्द की शिकायत हुई तो परिजन इलाज कराने डॉ. लघाटे के क्लिनिक पहुंचे, लेकिन वे अवकाश पर थी। इस पर परिजन ने सरकारी अस्पताल में महिला का चेकअप कराया। चिकित्सक ने ब्लड जांच का लिखा। लैब रिपोर्ट मिली तो ब्लड ग्रुप बी पॉजीटिव और रक्त की कमी बताई गई। चिकित्सक ने ब्लड चढ़ाने को कहा, लेकिन जब अनिता को लेकर परिजन पहुंचे तो नर्सों के अवकाश की वजह से उसे दो दिन बाद आने को कहा गया। पेट दर्द कम नहीं होने पर दूसरे दिन 28 मार्च को परिजन ने डॉ. लघाटे को दिखाया तो उन्होंने सरकारी अस्पताल की जांच रिपोर्ट के आधार पर ब्लड चढ़ाने के लिए जनसेवा अस्पताल रैफर कर दिया। यहां डॉ. इंदु सिंह ने दोबारा जांच कराई तो ब्लड ग्रुप ए पॉजीटिव निकला और रक्त की कमी पर ब्लड चढ़ाया गया। यदि सरकारी अस्पताल की नर्स अवकाश पर नहीं होती और महिला को सरकारी अस्पताल की रिपोर्ट के आधार पर ब्लड चढ़ा दिया जाता तो अनिता की जान पर बन आती।

परिजन ने कहा- सरकारी रिपोर्ट गलत तो किस पर करें भरोसा

अनिता के जेठ भेरूलाल परमार ने रिपोर्ट पर सवाल खड़े किए हैं। उनका कहना है कि जब सरकारी लैब की रिपोर्ट ही गलत होगी तो निजी लैब पर कैसे विश्वास कर सकते हैं। निजी लैब की जांच और कार्रवाई स्वास्थ्य विभाग करता है, अब सरकारी अस्पताल की रिपोर्ट ही गलत है तो क्या स्वास्थ्य विभाग क्या कार्रवाई करेगा। लैब टेक्नीशियन की लापरवाही से गर्भवती व उसके बच्चे की जान पर बनी जाती, वह तो गनीमत रही रक्त नहीं चढ़वाया।

अन्य ग्रुप का रक्त चढ़ाने से यह हो सकता है

मानव रक्त को एबीओ रक्त वर्ग सिस्टम के तहत ए, बी, एबी और ओ चार वर्ग में बांटा है। यदि अलग-अलग वर्ग के रक्त को मिलाया जाता है तो लाल रक्त कोशिकाएं गुच्छों के रूप में जमा हो जाती हैं। गुच्छों में जमा हुई लाल रक्त कोशिकाएं रक्त वाहिकाओं के मार्ग में रुकावट पैदा कर रक्त का संचार रोक देती हैं। इससे लाल रक्त का अपघटन या इसके फटने से पैदा पदार्थ की ज्यादा मात्रा उत्सर्जित हो जाती है, जो वृक्कीय नलिकाएं क्षतिग्रस्त कर देता है और व्यक्ति की मौत हो जाती है।

जांच के बाद होगी कार्रवाई

पीड़ित के परिजन ने अवगत कराया है। उन्हें लिखित में शिकायत करने को कहा है। जांच के बाद कार्रवाई की जाएगी। डॉ. संजीव कुमरावत, बीएमओ, स्वास्थ्य विभाग

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