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बगैर लाइसेंस के संचालित पांच सर्विस सेंटर संचालकों को नोटिस, प्रदूषण विभाग की जांच में सब मिले अवैध

Nagda News - शहर में संचालित पांच सर्विस सेंटरों का संचालन बगैर किसी की अनुमति के हो रहा है, यानी टैंकर और ट्रकों की धुलाई बगैर...

Dainik Bhaskar

Apr 01, 2018, 05:00 AM IST
बगैर लाइसेंस के संचालित पांच सर्विस सेंटर संचालकों को नोटिस, प्रदूषण विभाग की जांच में सब मिले अवैध
शहर में संचालित पांच सर्विस सेंटरों का संचालन बगैर किसी की अनुमति के हो रहा है, यानी टैंकर और ट्रकों की धुलाई बगैर लाइसेंस के ही की जा रही है। जबकि इन ट्रक और टैंकरों में ज्वलनशील अौर खतरनाक रसायनों की ढुलाई की जाती है। नियमानुसार इनकी धुलाई करने वाले सर्विस सेंटरों पर गंदे पानी को ट्रीटमेंट करने का प्लांट होना आवश्यक है।

शनिवार को उज्जैन से आए प्रदूषण विभाग के जांच दल के निरीक्षण में शहर के 5 सर्विस सेंटरों पर मानकों का पालन तो दूर, सर्विस सेंटर के संचालन के लिए जरूरी लाइसेंस तक नहीं मिला। यानी सभी अवैध तरीके से चलाए जा रहे हैं। इसका खामियाजा नागरिक भुगत रहे हैं। प्रदूषण विभाग के वैज्ञानिक दिग्विजयसिंह जाटव ने बताया रंगोली ढाबा, आजाद ढाबा, सांवरिया, बालाजी और एक अन्य सर्विस सेंटर संचालक को नोटिस जारी कर स्पष्टीकरण मांगा गया है। संतोषजनक जवाब नहीं मिलने पर सभी सेंटर सीज किए जाएंगे।

खेत में बहाया एसिड भेजना होगा

मीडिया से चर्चा में प्रदूषण विभाग के अधिकारी जाटव ने स्पष्ट किया बीते मंगलवार को उज्जैन रोड स्थित गोल्डन केमिकल ट्रांसपोर्ट कंपनी में खड़े टैंकर से एसिड लीकेज मामले में चंबल बचाओ अभियान संयोजक दिनेश दुबे ने शिकायत कर बताया था कि रसायन और ज्वलनशील पदार्थ का परिवहन कर रहे ट्रांसपोर्टरों के साथ शहर में स्थित सर्विस सेंटर भी मापदंडों के विपरीत संचालित हो रहे हैं। जांच में दुबे की शिकायत सही पाई गई है। जाटव ने बताया गोल्डन कंपनी संचालक को प्रदूषण विभाग से अनुमति लेकर खाली जमीन पर जमा एसिड को उठाकर पीथमपुर भेजने के निर्देश भी दिए हैं। टीम यह भी पता कर रही है कि एसिड भरकर उद्योग से निकला टैंकर आखिर रातभर ट्रांसपोर्ट पर क्यों खड़ा किया गया।

क्या कर रहा है प्रशासन

हैरत है कि बगैर अनुमति के शहर में सर्विस सेंटरों का संचालन वर्षों से किया जा रहा है। बावजूद स्थानीय प्रशासन को इसकी जानकारी भी नहीं है। ऐसा तब हो रहा है जब स्थानीय उद्योगों के प्रदूषण का मामला एनजीटी में विचाराधीन है। ऐसे में उद्योग प्रदूषण रोकने के लिए कितने भी प्रयास कर लें, लेकिन जो सर्विस सेंटर संचालक बगैर मापदंडों का पालन किए खतरनाक रसायन और केमिकल की ढुलाई करने वाले वाहनों की धुलाई के बाद गंदा पानी सीधे नाले में छोड़ रहे हैं। असल में ये संचालक भी चंबल को प्रदूषित करने के लिए सीधे तौर पर जिम्मेदार है।

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