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एससी-एसटी एक्ट में बदलाव का विरोध आज नगर बंद, अनुसूचित मोर्चा नहीं होगा शामिल

एससी-एसटी एक्ट में परिवर्तन के विरोध में दलित समाज द्वारा भारत बंद का आह्वान किया गया। इसके तहत सोमवार को नगर बंद...

Bhaskar News Network | Last Modified - Apr 02, 2018, 05:35 AM IST

एससी-एसटी एक्ट में परिवर्तन के विरोध में दलित समाज द्वारा भारत बंद का आह्वान किया गया। इसके तहत सोमवार को नगर बंद रहेगा। रविवार को दलित समाज से जुड़े मंचों द्वारा इसकी मुनादी भी कराई गई है। दलित अधिकार मंच, बैरवा महासभा, कांग्रेस द्वारा बंद को समर्थन दिया है। वहीं अनुसूचित मोर्चा द्वारा सोशल मीडिया पर बंद से स्वयं को अलग बताया है। हालांकि नगर बंद के दौरान राहत किस चीज को दी गई है, इसकी भी कोई मुनादी नहीं हुई है।

बदलाव से विचाराधीन मामलों पर होगा असर

मप्र कांग्रेस कमेटी प्रतिनिधि बसंत मालपानी ने प्रेस विज्ञप्ति में कहा देश के विभिन्न अदालतों में दलित उत्पीड़न के 3 करोड़ मामले विचाराधीन है। एक्ट में बदलाव से यह मामले भी प्रभावित न हो, इसलिए सर्वोच्च न्यायालय को पुनर्विचार करना चाहिए। मालपानी ने आरोप लगाया कि सुप्रीम कोर्ट में इस प्रकरण में केंद्र सरकार ने अच्छी तरह से पैरवी नहीं की। इससे अदालत ने ऐसा फैसला दिया। केंद्र में बैठी भाजपा सरकार की दलित वर्ग के मामले में भूमिका हमेशा संदेहास्पद रही है। इस फैसले के बाद देशभर में दलितों में आक्रोश व्याप्त है और अब उन्हें सड़कों पर अांदोलन करना पड़ रहा है। उन्होंने आंदोलन का समर्थन किया है। दलित अधिकार मंच के मदन राजाेरा ने कहा यह दलितों की रक्षा के लिए बने कानून में परिवर्तन कर उनके अधिकार छीनने का प्रयास है। बंद को सफल बनाने का अनुरोध गोपाल राठी, भारत गुजरवाड़िया, दिलीप अजमेरिया, दशरथ रायकवार, थावरलाल चौहान, बंटु बोड़ाना, शांतिलाल परिहार, नागेश्वर परिहार, राधेश्याम जाटवा, नाथूलाल परमार, बालाराम सूर्यवंशी, कैलाश रायकवार, मांगीलाल परमार, अशोक डामेचा, पप्पू वाघेला, विक्रम बामनिया, कचरूलाल बामनिया, अमृत मकवाना, पीरूलाल चौहान, डाॅ. रामचंद्र चौहान, प्रभुलाल चंद्रवंशी, कैलाश चंद्रवंशी, अर्जुन रायकवार, राधे पेंटर, जितेंद्र चौहान, फूलचंद चौहान, रमेश परिहार, सोनू भाटिया, चेतन राजोरा, संजय राठी, लक्ष्मण बामनिया आदि ने किया है।

संसद के बिना संविधान में संशोधन कैसे -बैरवा समाज

बैरवा समाज ने कहा कि अधिनियम वर्ष 1989 के मूलभूत प्रावधानों को खत्म करने की कोशिश न्यायालय द्वारा की जा रही है। जबकि बिना संसद की अनुमति के संविधान में संशोधन नहीं किए जा सकते हैं। अधिनियम के तहत एससी-एसटी वर्ग को संरक्षित करने के प्रावधान खत्म हो जाएंगे, जो गलत है। बैरवा महासभा मनोहरलाल अखंड, चंपालाल बैरवा, अमृतलाल जाटवा, हरिकिशन लोहरवाड़, मनीष वाडिया, चेतन मिमरोट, महेश पिंडोलिया, रवि ललावत, विजय भरतवाल, महेश वासेन, आनंद भदाले, सुमित सिसौदिया, राजकुमार मिमरोट (एडवोकेट), जगदीश मिमरोट, कमलेश चावंड, श्यामचरण मरमट आदि ने समर्थन कर बंद को सफल बनाने का अनुरोध किया है।

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