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सरकार ने किया मदद से इनकार बावजूद मजदूरी करने वाले देवेंद्र का बड़ा बेटा सीए बनेगा, छोटा सीपीटी में जिले में आया अव्वल

ये एक मजदूर पिता के हौंसले और उसके सपनों को साकार करने की कोशिश में जुटे दो बेटों के जुनून की कहानी है... वो पिता जो...

Danik Bhaskar | Apr 02, 2018, 05:35 AM IST
ये एक मजदूर पिता के हौंसले और उसके सपनों को साकार करने की कोशिश में जुटे दो बेटों के जुनून की कहानी है... वो पिता जो छुट्‌टी मजदूरी करता है.. कभी काम मिलता है... कभी बैरंग लौटना पड़ता है। कुल मिलाकर जीवन संघर्ष है... लेकिन देवेंद्र पांचाल नाम के इस पिता की जिद है, स्वयं भले कुछ न बन पाए, मगर बेटों को काबिल बनाना है। उसके दोनों बेटे आनंद और जय पिता के सपने को हकीकत की जमीन देना चाहते हैं। आनंद सीए बनने की अंतिम पायदान पर है। और छोटा जय हाल ही में सीपीटी की परीक्षा में जिलेभर में अव्वल आया है। हालांकि मंजिल दूर है। बेटों को पढ़ाने पर काफी खर्च है। इसलिए देवेंद्र ने सरकार से मदद भी मांगी, मगर सहायता नहीं मिली। अब देवेंद्र कर्ज लेकर दोनों बेटों को पढ़ा रहे हैं। रिश्तेदार, दोस्त सभी हंसते है... लेकिन पिता के सपने को सच साबित करने के लिए आनंद और जय खुद से वादा कर चुके हैं...एक दिन काबिल बनकर दिखाएंगे।

कर्ज लेकर पढ़ाने पर रिश्तेदार और दोस्त हंसत हैं पर बेटों ने पिता के सपने को सच करने का वादा निभाया

आनंद की तैयारी सीए बनने की...

देवेंद्र का बड़ा बेटा आनंद पांचाल 20 साल का है। 12वीं के बाद उन्होंने सीपीटी क्लियर किया। आईपीसीसी (इंटीग्रेटेड प्रोफेशनल कॉम्पिटेंसी कोर्स) सेकंड लेवल भी पार कर चुके हैं। फिलहाल वे सी.ए. के अंडर में ट्रेनिंग कर रहे हैं। तीन साल की ट्रेनिंग के बाद उन्हें फायनल का मौका मिलेगा। इसके बाद वे सी.ए. यानी चार्टर्ड अकाउंटेंट कहलाएंगे।

देश के टॉप कॉलेज में एडमिशन तो मिला, मगर दिल्ली में रहने का खर्च नहीं जुटा पाया

18 वर्षीय जय पांचाल 12वीं बोर्ड में मैरिट हासिल कर चुके हैं। 96 प्रतिशत अंक हासिल करने पर देशभर में अव्वल दिल्ली यूनिवर्सिटी के रामजस कॉलेज में एडमिशन भी हो गया। मगर हॉस्टल में रहने के लिए 98 प्रतिशत का कटऑफ था। दूसरा ऑप्शन पेइंग गेस्ट का। इसमें 15 हजार रु. माह का खर्च था। हर महीने पिता इतना पैसा कहां से लाएंगे, यह सोच जय ने कॉलेज में एडमिशन नहीं लिया। बकौल जय ने यूनिवर्सिटी में एडमिशन दिलाने के लिए प्रदेश सरकार से मदद भी मांगी। सहायता नहीं मिली। यूनिवर्सिटी छोड़ने के बाद उन्होंने सीए की तैयारी शुरू की। नतीजा सीपीटी परीक्षा में जिले में प्रथम आया। बकौल जय की 9 महीने बाद आईपीसीसी की परीक्षा होना है। जिसके लिए वे दिन-रात मेहनत कर रहे हैं।