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कोई रविवार ऐसा भी आए जिस दिन महिला की काम से छुट्‌टी हो

रविवार यानी छुट्‌टी। नौकरीपेशा के लिए आराम का दिन। मगर महिलाओं के लिए छुट्टी यानी ज्यादा काम करने का दिन। बच्चे...

Bhaskar News Network | Last Modified - Apr 02, 2018, 05:35 AM IST

कोई रविवार ऐसा भी आए जिस दिन महिला की काम से छुट्‌टी हो
रविवार यानी छुट्‌टी। नौकरीपेशा के लिए आराम का दिन। मगर महिलाओं के लिए छुट्टी यानी ज्यादा काम करने का दिन। बच्चे कहते हैं मम्मी आज तो संडे है, ये बनाकर खिलाओ, पति कहते हैं कोई विशेष डिश बनाओ। महिलाओं को साल के 365 दिन काम। काम करते-करते वह भी थकती हैं, उसे भी आराम चाहिए। मगर उसका बड़प्पन देखिए, उसे किसी से शिकायत नहीं। महिलाएं अपना कर्तव्य बखूबी निभा रही है। मगर क्या आपको नहीं लगता.. क्या कभी सोचा आपने एक रविवार ऐसा भी तो हो जिस दिन महिलाओं की छुट्‌टी हो। उसे भी आराम हो। कभी खुद से ये सवाल कीजिएगा... सबका संडे... महिलाओं का क्यों नहीं...।

यह सवाल अभिव्यक्ति विचार मंच व शेषशायी कॉलेज ऑफ प्रोफेशनल स्टडीज के तत्वावधान में ग्रेसिम खेल परिसर में रविवार को आयोजित सम्मान समारोह में रतलाम रेल मंडल जे.सी. बैंक डायरेक्टर इंदू सिन्हा ने पुरुषों से किया। उन्होंने कहा- मैं इसलिए ऐसा नहीं कह रही हूं कि मैं एक महिला हूं और घर के काम से मुझे पीड़ा है। 8 घंटे की ड्यूटी करने के बाद घर का काम करके मुझे भी वहीं सुकून मिलता है, जो एक आम महिला को मिलता है। मगर पुरुषों को मेरा सुझाव है कि छुट्‌टी के दिन काम बांटे। आराम की बजाए घर का काम करने में बिताए तो महिलाओं का भी संडे मन जाए।

ग्रेसिम खेल परिसर में अभिव्यक्ति विचार मंच व शेषशायी कॉलेज ऑफ प्रोफेशनल स्टडीज के समारोह में सम्मानित हुईं 18 महिलाएं।

विसंगतियों से बाहर निकलने के लिए महिला खुद पहल करें

प्रथम श्रेणी न्यायाधीश दर्जा प्राप्त बाल विकास समिति रतलाम अध्यक्ष डॉ. रचना भारतीय बोलीं- सामाजिक विसंगतियों से बाहर निकलने के लिए महिलाओं को खुद ही पहल करना होगी। इस तरह के सम्मान समारोह महिलाओं में नई ऊर्जा का संचार करते हैं। महिलाओं को सामाजिक कुरीतियों व स्वयं पर लगी बंदिशों को तोड़ने के लिए खुद ही आवाज उठाना पड़ेगी, तभी वह खुद को स्वतंत्र महसूस करेगी। कार्यक्रम को रतलाम पुलिस उप अधीक्षक शीला सुराणा, चोइथराम कॉलेज इंदौर की प्राचार्य डॉ. रीता जैन ने भी संबोधित किया। अध्यक्षता शासकीय विवेकानंद महाविद्यालय प्राचार्य डॉ. शीला ओझा ने की। स्वागत भाषण मंच अध्यक्ष सीमा शर्मा ने किया।

इनका अतिथियों का किया स्वागत

अतिथियों का स्वागत ग्रेसिम उद्योग के जनरल मैनेजर विनोद मिश्रा, अजय जैन, उदय कुंटे, संगीता गुप्ता, सपना परिहार, जया पांडे, इंदू शर्मा, आशा जवेरिया आदि ने किया। इस मौके पर मंच के गिरधारीलाल सोनी, सुभाष बाफना, मोहनलाल परमार, राजेंद्र शर्मा, सुरेश रघुवंशी, कमलेश शुक्ला, धर्मेंद्र गुप्ता, सज्जनसिंह शेखावत, राजेश पाल, स्वदेशकुमार क्षत्रिय, अतुल मालपानी, अशोक शर्मा मृदुल, राजेश पाल, ग्रेसिम उद्योग से महाप्रबंधक विनाेदकुमार मिश्रा, अजय जैन, जंबू सुराना, अवधेश कुमार, डॉ. सुरेंद्र मीणा आदि मौजूद थे। आभार मंच सचिव सारिका शर्मा ने माना।

इनका इसलिए हुआ सम्मान

सरला राजोरिया (मानव संस्कार सेवा), पूनम भाटी ( सेवा ), डॉ. इंदूसिंह ( चिकित्सा सेवा ), स्नेहा कोलन (उच्च शिक्षा) , हेमलता तोमर (समाज सेवा), प्रियंका पांडे (पत्रकारिता ), संध्या विश्व (काव्य विधा), पुष्पा रघुवंशी, सरोज रघुवंशी (शौर्य व साहस), रिंकू शर्मा (सौंदर्य संगोष्ठियों में राष्ट्रीय भागीदारी ), राजकुमारी मालपानी (सेवा), प्रतिभा शर्मा (साहित्य सेवा), सुप्रिया शर्मा (पत्रकारिता), किरण दुबे (हिंदी सेवा), गीता शर्मा (विदेश में हिंदी सेवा), निकिता धाकड़ (राजस्व सेवा), पूजा पोरवाल (पायलट), बिंदु कांठेड़, सीमा मालपानी (नारी जागरूकता), सुशीला पाल (वकालत) हैं।

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