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मृत व्यक्ति और शहर छोड़ चुके लोग भी नागदा की वोटर लिस्ट में शामिल

विधानसभा चुनाव को लेकर स्थानीय निर्वाचन विभाग द्वारा प्रकाशित अंतिम मतदाता सूची सवालों के घेरे में है। मतदाता...

Dainik Bhaskar

Feb 02, 2018, 06:10 AM IST
मृत व्यक्ति और शहर छोड़ चुके लोग भी नागदा की वोटर लिस्ट में शामिल
विधानसभा चुनाव को लेकर स्थानीय निर्वाचन विभाग द्वारा प्रकाशित अंतिम मतदाता सूची सवालों के घेरे में है। मतदाता सूची में गड़बड़ी की शिकायत मप्र कांग्रेस महासचिव व पूर्व विधायक दिलीपसिंह गुर्जर ने नवंबर 2017 में राज्य निर्वाचन आयोग को की थी। बावजूद मतदाता सूची दुरुस्त करने की बजाए स्थानीय विभाग ने जनवरी में अंतिम प्रकाशन कर दिया। शिकायत पर सोमवार व मंगलवार को जिले की टीम के 6 सदस्यों ने पहुंचकर जांच की है। इसमें स्थानीय विभाग संदेह के घेरे में भी आ रहा है।

दरअसल पूर्व विधायक गुर्जर ने आरोप लगाया था कि 4 अक्टूबर 2017 से 4 नवंबर 2017 तक व उसके बाद 31 दिसंबर तक मतदाता सूची के पुनरीक्षण में बीएलओ व अन्य अधिकारियों द्वारा निर्वाचन आयोग के निर्देशों का पालन नहीं किया गया है। वास्तविक मतदाताओं के नाम जोड़े नहीं गए हैं, दोहरे नाम, शहर से शिफ्ट हो चुके मतदाताओं, मृत व शादी के बाद बालिकाओं के नाम हटाए नहीं गए हैं। यहां तक कि बीएलओ द्वारा दी गई जानकारियों को भी अधिकारियों ने जिला मुख्यालय नहीं पहुंचाया। साथ ही उन जानकारियों को स्थानीय कार्यालय में ही रखकर अंतिम मतदाता सूची का प्रकाशन किया गया। गुर्जर ने यह भी आरोप लगाया कि वर्ष 2013 में भी धांधली कर वास्तविक मतदाताओं के नाम हटाकर फर्जी मतदाताओं के नाम सूची में शामिल किए गए थे।

स्थानीय विभाग कर रहा छानबीन

सोमवार व मंगलवार को जिले की 6 सदस्यीय टीम ने भी इन 11 केंद्रों की ही जांच की है। जिसके बाद स्थानीय विभाग द्वारा इन 11 पोलिंग बूथों की मतदाता सूची के प्रत्येक नाम की जांच कर रहा है। इसके लिए बीएलओ को एक-एक घर जाकर दोबारा से जानकारी लेने के लिए भेजा गया है। ताकि वह जांच टीम के साथ ही राजनीतिक पार्टी को भी वस्तुस्थिति बता सके।

भास्कर ने भी उठाया था मुद्दा

मतदाता सूची के पुनरीक्षण कार्य के दौरान बीएलओ की ड्यूटी मतदाता केंद्रों पर लगाई गई थी। लेकिन बीएलओ मतदाता केंद्रों पर पहुंच ही नहीं रहे थे। इसे लेकर भास्कर ने भी मुद्दा उठाकर अधिकारियों को अवगत कराया था। जिस पर अधिकारियों ने सख्ती के साथ निर्देश देकर बीएलओ को केंद्रों पर मौजूद रहने के निर्देश दिए थे। उसके बाद भी लापरवाही होती रही, इसी वजह से अब स्थानीय निर्वाचन विभाग सवालिया घेरे में है।

बीएलओ की जानकारी के आधार पर ही सूची का अंतिम प्रकाशन हुआ


कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने किया था परीक्षण

कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने 4 अक्टूबर 2017 को प्रकाशित मतदाता सूची का परीक्षण 11 केंद्रों 129, 130, 131, 133, 135, 136, 138, 139, 143, 144, 145 पर किया गया। जिसमें कुल मतदाता 8697 में से 2029 लोग गायब है, जिनकी जानकारी वार्डवासियों के पास भी नहीं है। इनका प्रतिशत करीब 23.32 है। 19 जनवरी 2018 को अंतिम प्रकाशन में इन 11 पोलिंग केंद्रों पर मात्र 40 मतदाताओं के नाम हटाए गए हैं। यानी अभी भी 1900 से अधिक मतदाताओं के नाम शामिल हैं। ऐसे ही विधानसभा के अन्य पोलिंग बूथों पर भी फर्जी तरीके से नाम शामिल किए गए हैं।

जिले की टीम पर नहीं विश्वास

पूर्व विधायक गुर्जर ने 19 जनवरी दोबारा मामले की शिकायत राज्य निर्वाचन आयोग से की है। जिसमें उन्होंने मय दस्तावेज स्थानीय निर्वाचन विभाग की धांधली उजागर कर जांच करने की मांग की है। उन्होंने शिकायत में जिले की टीम पर भी अविश्वास जताया है। उन्होंने जिले से बाहर की टीम से मतदाता सूची की जांच कराने की मांग की है। गुर्जर ने चेतावनी भी दी है कि अगर वास्तविक रुप से कार्रवाई नहीं की जाती है तो वह हाईकोर्ट की शरण लेंगे।

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