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बीमा अस्पताल में 40 का स्टाफ और ओपीडी सिर्फ 80, सरकारी में 27 कर्मचारी संभाल रहे 400 ओपीडी

Nagda News - इंगोरिया रोड स्थित बीमा अस्पताल में स्टाफ की कमी बताने वाले डॉक्टरों को सरकारी अस्पताल प्रबंधन से सीखने की जरूरत...

Dainik Bhaskar

Dec 09, 2018, 04:00 AM IST
Nagda News - in the insurance hospital 40 staff and opds are just 80 400 opds handling 27 employees in government
इंगोरिया रोड स्थित बीमा अस्पताल में स्टाफ की कमी बताने वाले डॉक्टरों को सरकारी अस्पताल प्रबंधन से सीखने की जरूरत है। बीमा अस्पताल प्रबंधन रोजाना 80 ओपीडी पर 40 लोगों का स्टाफ कम बता रहा है। जबकि सरकारी अस्पताल में 27 लोगों का स्टाफ रोजाना 400 ओपीडी के साथ प्रसव, ऑपरेशन, नसबंदी ऑपरेशन, ब्लड बैंक के साथ जांच मशीनें भी संभाल रहा है। ऐसे में सवाल है जहां स्टाफ की जरूरत है उस सरकारी अस्पताल का स्टाफ तो बगैर शिकायत के मरीजों की सेवा में लगा है। लेकिन जहां मुश्किल से मरीज पहुंच रहे उस बीमा अस्पताल के डॉक्टर स्टाफ की कमी बताकर मरीजों को रैफर करना मजबूरी बताते हैं।

इतना होने के बाद भी स्टाफ की कमी : इंगोरिया रोड स्थित बीमा अस्पताल का 6 जून 1999 को बीमा अस्पताल का लोकार्पण हुआ था। तीन साल अस्पताल में सभी रोगों की इलाज जांच हुई। इसके बाद धीरे-धीरे सुविधा बंद होने लगी। बीमा अस्पताल में 40 के स्टाफ में 14 लोग ही मरीज देख रहे हैं। इनमें 6 डॉक्टर और 8 नर्स है। शेष 26 के पास यदाकदा ही कोई काम होता है क्योंकि यहां मरीजों को न तो पैथोलॉजी-एक्सरे की सुविधा है और न मरीजों को एडमिट किया जाता है। प्रसव के मरीज भी यहां से रैफर किए जाते हैं।

एक नजर : कहां कितना काम हो रहा

बीमा अस्पताल

रोजाना 80 ओपीडी आती है। इनमें ज्यादातर सामान्य बीमारी से पीड़ित है। बीमा अस्पताल का इंदौर और उज्जैन के अस्पतालों से अनुबंध है। डॉक्टर मरीज का चेकअप करने के बाद बीमारी अनुसार संबंधित अस्पताल रैफर कर देते हैं। डॉक्टर बताते हैं कि अस्पताल में भर्ती करने पर मरीज यहां रुकते ही नहीं। मरीज अस्पताल के आसपास रहने का हवाला देकर चले जाते हैं। इसके अलावा यहां का ओटी (ऑपरेशन थिएटर) तक बंद है। सर्जन नहीं होने की बात कहकर डॉक्टर यहां का ताला तक खोलकर नहीं देखते कि उपकरण खराब हो गए या ठीक। एक्सरे मशीन भी खराब है। अन्य दूसरी जांच मशीनें भी नहीं है। इसलिए जांच का सवाल ही नहीं।

सरकारी अस्पताल

रोजाना 400 से अधिक ओपीडी। हर महीने 200 डिलीवरी, 4 सीजर ऑपरेशन, 200 नसबंदी ऑपरेशन, माह में 7 हजार की ब्लड जांच, करीब 300 एक्सरे, इतनी ही सोनोग्राफी, 4 से 5 मरीजों का ब्लड ट्रांसफ्यूजन, प्रति मंगलवार व शुक्रवार के मान से हर महीने 300-400 टीकाकरण, 6-7 पीएम हर महीने, 150 से 200 एमएलसी केस, हर महीने 20 कुपोषित बच्चों को एनआरसी में रखकर ठीक किया जाता है। पिछले कुछ सालों से डिजिटल एक्सरे मशीन, सीबीनॉट मशीन, डायलिसिस मशीन लगने से मरीजों की संख्या में इजाफा हो रहा है। अभी अस्पताल पर 7.5 करोड़ रु. खर्च कर इसे 35 से 60 बेड करने की योजना है।

इतना है स्टाफ

बीमा अस्पताल

6

डॉक्टर

8

नर्स

2

स्वीपर

1

लेब टेक्नीशियन

1

एक्सरे टेक्नीशियन

1

धोबी

14

वार्ड बाय

4

क्लर्क

2

ड्राइवर

1

फार्मासिस्ट

सरकारी अस्पताल

4

मेडिकल ऑफिसर

1

लेब टेक्नीशियन

2

फार्मासिस्ट

1

एक्सरे टेक्नीशियन

8

स्टाफ नर्स

2

मेल नर्स

2

ड्रेसर

4

एनआरसी स्टाफ

3

सफाईकर्मी

बीएमओ ने कहा- हमें दे दें बिल्डिंग, नक्शा बदल देंगे

बीमा अस्पताल बिल्डिंग में जहरीले जानवर का डर बताने वाले प्रबंधकीय अधिकारियों के प्रत्युत्तर में बीएमओ डॉ. संजीव कुमरावत ने बताया जानवरों की समस्या हर जगह है। सरकार यह बिल्डिंग हमें दे दें, नि:संदेह हम उसका नक्शा बदल देंगे। बीमा अस्पताल के पास रहने को क्वार्टर तो है, हमारा स्टाफ तो किराए के मकानों के लिए परेशान रहता है।

अधीक्षक बोले- सरकारी में साधारण बीमारी के मरीज

बीमा अस्पताल के अधीक्षक डॉ. एस.एन. गुप्ता ने कहा सरकारी अस्पताल में सर्दी-जुकाम जैसी सामान्य बीमारियों के मरीज आते हैं। जबकि हमारे यहां गंभीर बीमारी के मरीज आते हैं। इन्हें चेक करने के बाद रैफर करना पड़ता है। सामान्य बीमारियों के मरीजों को बिरलाग्राम डिस्पेंसरी में चेक किया जाता है। इसलिए यहां सामान्य डॉक्टरों के अलावा सर्जन की भी जरूरत है।

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