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कांग्रेस का आरोप बाड़े को प्लाॅट बताकर एक रजिस्ट्री में दो लोगों को लाभ

पीएम आवास योजना में शहर कांग्रेस ने धांधली का आरोप लगाया है। गुरुवार को नपा कार्यालय के सामने धरना देकर कांग्रेस...

Danik Bhaskar | May 18, 2018, 05:30 AM IST
पीएम आवास योजना में शहर कांग्रेस ने धांधली का आरोप लगाया है। गुरुवार को नपा कार्यालय के सामने धरना देकर कांग्रेस पार्षदों ने शहर के सभी 36 वार्डों में योजना से लाभान्वित हितग्राहियों की सूची सार्वजनिक करने की मांग भी सीएमओ से की है।

शहर अध्यक्ष सुबोध स्वामी ने बताया योजना के तहत वर्ष 2011 की सर्वे सूची के अनुसार पात्र लोगों को शासन 2.5 लाख रु. का अनुदान दे रहा है। स्वामी ने नगर पालिका में योजना का क्रियान्वयन कर रहे अधिकारियों के हवाले से बताया है कि वर्तमान में करीब 1 हजार से ज्यादा पात्र लोगों के खाते में अनुदान राशि पहुंच चुकी है, लेकिन अब भी कई लोग दूसरी व तीसरी किस्त के लिए नगर पालिका के चक्कर लगा रहे हैं। स्थिति यह है कि किस्त का भुगतान कराने के लिए नपा में दलाल तक सक्रिय है। दलाल योजना और अनुदान का लाभ दिलाने के लिए मोटी रिश्वत तक मांग रहे हैं।

2011 के बाद बनी सूची में बड़े पैमाने पर हेरफेर

स्वामी के अनुसार ऐसे कई हितग्राहियों के नाम भी सामने आए हैं, जिन्हें नगर उदय अभियान के तहत पात्र लोगों की सूची में दर्शाकर आवास योजना के प्रमाण पत्र नपा के जनप्रतिनिधि व अफसर बांटे चुके हैं। उन्हें भी अब तक अनुदान राशि नहीं मिली। जबकि नगर उदय अभियान को करीब दो वर्ष से ज्यादा समय बीत चुका है। इससे यह तो स्पष्ट है कि 2011 में हुए सर्वे के बाद बनी पात्र लोगों की सूची में बड़े पैमाने पर हेरफेर हुई है।

रकम वसूली पर एजेंसी ने काम ही नहीं किया

स्वामी का आरोप है कि स्वच्छता मिशन कार्य के नाम पर जो रकम वसूली गई उसके मान से एजेंसी ने शहर में काम ही नहीं किया। नपा ने एजेंसी के जिम्मेदार अमित मिश्रा को 8500 रु. प्रतिदिन सफाई विशेषज्ञ के रूप में नियुक्त कर भुगतान किया है। जो आश्चर्यजनक है।

नगर पालिका कार्यालय के बाहर धरना देकर बैठे कांग्रेस पार्षद।

योजना का लाभ दिलाने के लिए दलाल सक्रिय

स्वामी ने आवास योजना का लाभ आम आदमी को दिलाने के लिए नगर में कई दलालों के सक्रिय होने का आरोप लगाया है। स्वामी के अनुसार ये दलाल घर के पीछे बाड़े को प्लाॅट बताकर एक ही रजिस्ट्री पर दो लोगों को लाभ दे दिया है। बंदरबांट ऐसी कि जिन हितग्राहियों के पक्के मकान हैं उन्हें भी अनुदान दिलाने का लालच देकर अवैध वसूली की जा रही है। वर्तमान में नपा में 6 इंजीनियर है, बावजूद इंजीनियरों की बजाए निजी एजेंसियों से काम कराया जा रहा है।