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नायन डेम के 3 किमी दायरे में 75 से अधिक मोटरपंप, किसानों की आड़ में ईंट-भट्टे और रेत धुलाई का काम

Nagda News - 15 जुलाई तक पेयजल परिरक्षण अधिनियम लागू कर नदी-तालाब व अन्य जलाशयों से बिना अनुमति सिंचाई या औद्योगिक कार्य के लिए...

Dainik Bhaskar

Dec 09, 2018, 04:01 AM IST
Nagda News - more than 75 motorpumps brick kilns and sand washing in the 3 km radius of nayen dame
15 जुलाई तक पेयजल परिरक्षण अधिनियम लागू कर नदी-तालाब व अन्य जलाशयों से बिना अनुमति सिंचाई या औद्योगिक कार्य के लिए पानी लेने पर प्रतिबंध लगाया गया है। उल्लंघन करने पर सजा का प्रावधान भी है। बावजूद खुलेआम पेयजल परिरक्षण अधिनियम का उल्लंघन हो रहा है। फिर भी इस पर रोक लगाने अभी तक प्रशासन ने कोई टीम का गठित नहीं की है। न ही अधिकारी मौके पर परीक्षण करने पहुंचे हैं। नतीजतन चंबल नदी स्थित नायन डेम के 3 किमी दायरे में 75 से अधिक मोटरपंप चल रहे हैं। खास बात यह है कि किसानों की मोटरपंप की आड़ में ईंट भट्टा व रेत धुलाई का काम भी जोरों पर चल रहा है।

एसडीएम बोले- मतगणना के बाद लेंगे किसानों की बैठक

एसडीएम आशुतोष गोस्वामी ने बताया अभी अमला मतगणना की तैयारी में लगा है। अधिकारी-कर्मचारियों को उनके क्षेत्र में निगरानी को कहा है। मतगणना के बाद बैठक कर किसानों को समझाइश दी जाएगी। अगर उसके बाद भी नदी से किसान पानी लेंगे तो उन पर कार्रवाई की जाएगी।

ईंट भट्टा संचालक किसानों की आड़ में मोटर पंप डालकर पानी ले रहे

चंबल किनारे मेहतवास, नायन व भाटीसुड़ा की ओर 5 ईंट भट्टों का संचालन हो रहा है। यह ईंट भट्टा संचालक किसानों की आड़ में चंबल में मोटर पंप डालकर लगातार पानी ले रहे हैं। बताया जाता है कि 1 ईंट बनाने में 8 लीटर पानी खर्च होता है। 4 हजार ईंट के लिए एक घोल बनाया जाता है। यानी एक घोल में ही 32 हजार लीटर पानी नदी से लिया जा रहा है। इससे ही साफ है कि 5 ईंट भट्टों पर चंबल से कितना पानी प्रतिदिन लिया जा रहा है। इसी तरह रेत धुलाई का काम भी नदी किनारे ही चल रहा है लेकिन किसी का ध्यान इस ओर नहीं है।

पेयजल परिरक्षण आदेश का उल्लंघन, संरक्षण को लेकर रूपरेखा नहीं

कलेक्टर के पेयजल परिरक्षण के आदेश का उल्लंघन हो रहा है, लेकिन पेयजल संरक्षण को लेकर प्रशासन ने कोई रूपरेखा तैयार नहीं की है। यहां तक की टीम का गठन भी नहीं किया है। यही वजह है नायन डेम के 3 किमी क्षेत्र में ही 75 मोटरपंप चल रहे हैं, जिससे लाखों लीटर पानी प्रतिदिन लिया जा रहा है। अगर यही हालात रहे तो गर्मी से पहले ही पेयजल समस्या खड़ी हो जाएगी। कलेक्टर ने 15 जुलाई तक जिले को सूखाग्रस्त घोषित किया है और इस अवधि में पेयजल की व्यवस्था करने की रूपरेखा बनाने के आदेश भी दिए हैं।

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