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बनबना तालाब की नहर पर 161 लाेगाें का कब्जा, एसडीएम ने तहसीलदार काे कहा- कार्रवाई करें
बनबना तालाब से होकर शहर के बीच से गुजरी लगभग पांच किमी की नहर में से दो किमी का हिस्सा लुप्त हाे चुका है, फिलहाल शहर के बाहरी ओर (कोटा फाटक, इंदु कॉलोनी, पारदी) ही नहर का अस्तित्व ही बचा है। लुप्त सहित अस्तित्व वाले हिस्से में भी कई लाेगाें ने अतिक्रमण कर लिया है। इन अतिक्रमणकर्ताअाें पर कार्रवाई के लिए राजस्व विभाग ने तैयारी कर ली है। एसडीएम अार.पी. वर्मा ने मय अतिक्रमणकर्ताअांे की सूची भेजकर तहसीलदार विनाेद शर्मा काे धारा 248 के तहत कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं।
एसडीएम कार्यालय से तहसीलदार काे भेजी सूची में 161 लाेगाें के नाम दर्ज है, यानि नहर की जमीन पर 161 लाेगाें ने अतिक्रमण कर रखा है। इसमें लुप्त हाे चुकी जमीन के साथ ही अस्तित्व वाली नहर के अासपास के अतिक्रमणकर्ताअाें के नाम भी शामिल है। हालांकि इस सूची काे प्रशासन ने सार्वजनिक नहीं किया है। अब गेंद तहसीलदार के पाले में है कि वह कब इन लाेगाें काे नाेटिस जारी कर कार्रवाई की शुरुअात करते हैं।
सीएमओ के बगीचे के लिए बिना अनुमति नपा कर्मचारी तालाब में खुदाई करने पहुंचे, आपत्ति के बाद बैरंग लाैटे
नागदा | नगर पालिका के सीएमओ के सरकारी आवास पर बगीचा निर्माण के लिए गुरुवार काे नपा कर्मचारी बिना अनुमति ही बनबना तालाब से मिट्टी की खुदाई करने पहुंच गए। दाे डंपर और जेसीबी से कर्मचारियाें ने मिट्टी की खुदाई शुरू कर दी। इसकी सूचना वहां माैजूद अमलावदिया निवासी बगदीराम ने जल उपभाेक्ता समिति अध्यक्ष करणसिंह शेखावत काे दी। उन्होंने माैके पर पहुंचकर खुदाई रुकवाई और अनुमति मांगी ताे वह दिखा नहीं पाए। इस पर शेखावत ने जल संसाधन विभाग के जगदीश शर्मा काे सूचना दी। उन्होंने कर्मचारियों काे बिना अनुमति खुदाई के लिए तालाब में प्रवेश नहीं करने की बात कही।
तालाब पाल से 200 मीटर में नहीं हाे सकती खुदाई
जल उपभाेक्ता समिति अध्यक्ष शेखावत ने बताया नपा कर्मचारी द्वारा बनबना तालाब की पाल के पास ही खुदाई की जा रही थी। तालाब की पाल से 200 मीटर के दायरे में खुदाई अवैध है, क्यांेकि इससे तालाब की पाल के टूटने का खतरा बना रहता है। काेई अधिकारी भी पाल के 200 मीटर के दायरे में खुदाई की अनुमति नहीं देता है। कर्मचारियाें द्वारा बिना किसी सक्षम अधिकारी और जल उपभाेक्ता समिति काे सूचना के ही खुदाई का कार्य किया जा रहा था। आपत्ति लेने के बाद कर्मचारी लाैट गए, लेकिन इसके पहले भी कई बार नपा कर्मचारियाें द्वारा अधिकारियाें के नाम लेकर मिट्टी की खुदाई की गई है। मामले में नपा सीएमओ सतीश मटसेनिया का कहना कि सरकारी कार्य के लिए ही मिट्टी की जरूरत हाेने पर कर्मचारी खुदाई करने पहुंचे थे।
जानलेवा हाेते हैं गड्ढे- शेखावत के मुताबिक तालाब में कई जगह पहले भी गड्ढे बनाकर छाेड़ दिए गए हैं। ऐसे में तालाब कहां गहरा है, इसका अंदाजा किसी काे नहीं हाेता है।
बनबना तालाब से निकली नहर
11 फरवरी काे शिकायत
11 फरवरी को मप्र कांग्रेस कमेटी सदस्य प्रतिनिधि अमित पंडित ने अतिक्रमण की शिकायत की थी। जिस पर एसडीएम वर्मा ने परीक्षण कराया तो पता चला कि बीच शहर से गुजर रही नहर के ऊपर पक्के मकान तन गए है। शिकायतकर्ता पंडित ने शिकायत में बताया था कि महिदपुर रोड, जवाहर मार्ग, माहेश्वरी धर्मशाला के पीछे से होकर नहर गुजरती थी। स्टेडियम निर्माण के दौरान नहर की जमीन निकलने पर इस भूमि को छोड़कर नपा ने स्टेडियम का निर्माण किया था।
यह है धारा 248
भू राजस्व संहिता की धारा 248 के तहत ऐसे किसी व्यक्ति अथवा संस्था को नोटिस थमाया जाता है, जिस पर सरकारी जमीन के अतिक्रमण, कब्जे का शक या आरोप होता है। नोटिस जारी करने के साथ यह मामला तहसीलदार के कोर्ट में दर्ज कर लिया जाता है। कम से कम एक बार सुनवाई का मौका देने के बाद प्रशासन यह साबित करने में कामयाब हो जाता है कि संबंधित ने सरकारी जमीन घेरी है या कब्जा किया है तो उस पर जुर्माना लगाया जाता है। संशोधित नियमों के तहत यह जुर्माना घेरी गई जमीन के बाजार मूल्य का 20 प्रतिशत तक हो सकता है। अगर संबंधित जुर्माना जमा नहीं करता है तो उसे जेल भेजने की कार्रवाई की जाती है।