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श्रम संगठनों की कार्यप्रणाली के विरोध में सड़कों पर उतरेगी कांग्रेस

Bhaskar News Network

Mar 17, 2019, 04:21 AM IST

Nagda News - ग्रेसिम उद्योग में कार्यरत श्रम संगठनों ने प्रबंधन द्वारा वाटर ट्रीटमेंट प्लांट व डेमिन प्लांट को बंद कर नया आरओ...

Nagda News - mp news congress will land on roads in protest against the working of labor organizations
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ग्रेसिम उद्योग में कार्यरत श्रम संगठनों ने प्रबंधन द्वारा वाटर ट्रीटमेंट प्लांट व डेमिन प्लांट को बंद कर नया आरओ प्लांट चालू होने पर श्रम कानून व उद्योग नीति के प्रचलित नियम व कानून के तहत मैन पाॅवर, स्ट्रेंथ का कोई समझौता नहीं किया है। अगर किया है तो वह सार्वजनिक क्यों नहीं किया जा रहा। ऐसे में भविष्य में होने वाले वेतनवृद्धि समझौते को लेकर श्रम संगठनों पर कैसे श्रमिक विश्वास करें।

मीडिया को जारी बयान में यह सवाल जिला कार्यकारी अध्यक्ष सुबोध स्वामी ने पूछा है कि उद्योग नीति व श्रम कानून के तहत उद्योग नए प्लांट के विस्तार या स्थापना के पूर्व श्रम संगठनों व उद्योग प्रबंधन के बीच मैन पाॅवर स्ट्रेंथ का समझौता होता है। इसके बाद ही नया प्लांट शुरू किया जा सकता है, लेकिन ग्रेसिम उद्योग में विगत 2 माह पूर्व वाटर ट्रीटमेंट प्लांट व डेमिन प्लांट को बंद कर नया आरओ प्लांट शुरू कर दिया है। स्वामी ने यह भी बताया आरओ प्लांट किसी बाहरी ठेकेदार द्वारा बाहर के मजदूरों को लेकर संचालित किया जा रहा है, जबकि इस प्लांट व डेमिन प्लांट में पहले से लगभग 25 स्थाई श्रमिक कार्यरत हैं, जिन्हें आज अतिरिक्त कर्मचारी के रूप में आरओ प्लांट में बैठाया जा रहा है। श्रम संगठनों की चुप्पी के चलते 25 स्थाई श्रमिकों के भविष्य पर संकट खड़ा हो गया है। एक ओर श्रम संगठन मांग पत्र सूचना पटल पर सार्वजनिक नहीं करने का तर्क यह देते हैं कि श्रमिक उनके कार्यालय में आकर मांग पत्र का अवलोकन करें और कोई उनके सुझाव हो तो वह भी दें तो फिर पाॅवर हाउस गेट के सामने श्रम संगठनों द्वारा लगाए गए नोटिस बोर्ड का क्या औचित्य है। श्रम संगठनों की कार्यप्रणाली विश्वसनीय नहीं होने के कारण श्रमिकों में घोर निराशा के साथ आक्रोश पनप रहा है, जो कभी भी नगर में अशांति का वातावरण निर्मित कर सकता है। श्रम संगठनों को चाहिए कि मांग पत्र और आरओ प्लांट का जो भी समझौता हुआ है, उसे सार्वजनिक करें। वर्तमान में समझौता वार्ताओं का दौर श्रम संगठनों व प्रबंधन के बीच चल रहा है, लेकिन ऐसी क्या मजबूरी है कि श्रम संगठन श्रमिकों के साथ में समझौता वार्ता को साझा नहीं कर रहा है। श्रम संगठनों की कार्यप्रणाली इसी तरह रही तो कांग्रेस को पुनः मजदूर हित में सड़कों पर आकर श्रमिकों की आवाज को बुलंद करना पड़ेगा।

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