औद्योगिक प्रदूषण की फिर होगी जांच
दो माह पहले 6 और 7 जनवरी को यहां औद्योगिक प्रदूषण की जांच को पहुंचे केंद्रीय और मप्र प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की टीम की रिपोर्ट संदेह के दायरे में है। मामले में शिकायतकर्ता अभिषेक चौरसिया का कहना है कि जांच के दौरान टीम ने कोताही कर विभिन्न बिंदुओं को जांच से पृथक कर उन्हें गंभीरता से नहीं लिया है। साथ ही 15 दिन में रिपोर्ट प्रस्तुत करने की गाइड लाइन का उल्लंघन कर 2 माह बाद रिपोर्ट सौंपी गई है।
चौरसिया द्वारा रिपोर्ट पर आपत्ति लेकर संदेह जताने पर कलेक्टर ने पूर्व में जांच करने वाली टीम को फिर से जांच कर सैंपलिंग करने का आदेश दिया है। चौरसिया के अनुसार शासन के उच्च अधिकारियों ने उनकी शिकायत और आम जनमानस के हित का ध्यान रखते हुए सभी उद्योगों में दोबारा से नए सिरे से जांच करने का शासन ने आदेश दिया है। हालांकि जांच दल यहां दोबारा कब पहुंचेगा, इसे सार्वजनिक नहीं किया गया। जांच के दायरे में ग्रेसिम इंडस्ट्रीज़ लिमिटेड (स्टेपल फाइबर डिवीजन), लैक्सेस इंडिया प्राइवेट लिमिटेड, गुलब्रांडसन लिमिटेड, ग्रेसिम केमिकल डिविजन, क्लिरिएंट केमिकल उद्योग में जांच की जाएगी।
9 सदस्यीय जांच दल की रिपोर्ट पर शिकायतकर्ता ने जताया संदेह, कलेक्टर ने दिए दोबारा जांच के आदेश
इन बिंदुओं की अनदेखी का आरोप : जांच समिति के पूर सदस्य भी नहीं दिखे
{रिपोर्ट 15 दिन की बजाए 2 माह बाद फिर भी आधा जांच प्रतिवेदन।
{जांच समिति के कई सदस्य निरीक्षण के दौरान नदारद रहे, फिर किस आधार पर उन्होंने प्रतिवेदन प्रस्तुत किया।
{शिकायतकर्ता को जांच समिति ने पक्ष रखने का मौका नहीं दिया।
{उद्योगों को जांच दल के आने की सूचना 3 दिन पहले से थी।
{चिह्नित 30 स्थान से जल, 50 से मिट्टी और 10 जगह से वायु के सैंपल एकत्रित नहीं किए गए।
{जांच समिति ने गोलमाल किया, क्योंकि औचक निरीक्षण कर सैंपल नहीं भरे गए। उद्योगों काे गलती सुधारने का अवसर दिया।
{उद्योग में हुई 19 श्रमिकों की मृत्यु पर कागजी खानापूर्ति कर मामले को दबाया गया।
{उद्योगों में कार्यरत श्रमिकों के स्वास्थ्य संबंधी शिकायती बिंदु पर कुछ नहीं किया गया।
{अधीक्षण यंत्री और क्षेत्रीय अधिकारी, प्रदूषण बोर्ड ने शिकायतकर्ता को दरकिनार किया। महज 8 सैंपल दिए। दोबारा बुलाने पर निजी जांच का सुझाव देकर जिम्मेदारी से भागने का प्रयास किया।