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कुदरत की नाइंसाफी को कोसने के बजाए ममता खुद संघर्ष कर बनी आत्मनिर्भर

एक वर्ष पहले
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महिला दिवस की पूर्व संध्या पर विधायक दिलीपसिंह गुर्जर के हाथों सम्मानित हो रही ममता चावंड को यह सम्मान संघर्ष के बाद मिला है। दोनों पैंरों से दिव्यांग ममता आज आत्मनिर्भर है।

कृष्णा जीनिंग स्थित सब्जी मंडी में कॉस्मेटिक और जनरल सामान की दुकान चलाती हैं। माता-पिता या भाई पर निर्भर नहीं है, हालांकि कुछ सालों पहले तक ममता के लिए जिंदगी इतनी आसान नहीं थी। एक तो शारीरिक व्याधि, उस पर महिला होना ही उसके लिए सबसे बड़ी परेशानी थी। बावजूद उसने पढ़ाई करते हुए शहर में कई जगह पार्ट टाइम नौकरी कर स्वयं का खर्च खुद तो निकाला ही एमकाॅम की डिग्री भी हासिल की। ममता की लगन देखकर नपा के राष्ट्रीय शहरी योजना विभाग ने उसे दुल्हन का मेकअप करने का प्रशिक्षण दिलाया। ममता ने सफलतापूर्वक कोर्स पूरा कर लिया। दिव्यांग होने के बाद भी उसका हौंसला देखकर नपा ने राष्ट्रीय शहरी योजना के तहत उसे स्वरोजगार करने के िलए बैंक ऑफ बड़ौदा से एक लाख का कर्ज स्वीकृत कराया। लोन की राशि से ममता ने सब्जी मंडी में कॉस्मेटिक और जनरल सामान की दुकान खोली। इससे अब वह प्रतिमाह 15 हजार रुपए कमा रही है।

दोनों पैरों से दिव्यांग के हौंसले को सलाम

मदद के लिए सरकार भी तैयार... बस आपको हिम्मत भर करने की देर है -विधायक गुर्जर

ममता के हौंसले को सलाम करतेे हुए विधायक दिलीपसिंह गुर्जर ने कहा कि वर्तमान दौर में महिला सशक्तीकरण की कहानी भर सुनकर खुश होने की बजाए उन महिलाओं को हौंसला दिखाना होगा, जो यह सोचकर घर की दहलीज नहीं लांघ रही कि वे कमजोर हैं। आप हिम्मत तो कीजिए आपकी मदद के लिए सरकार के पास विभिन्न योजना है। आपको बस लक्ष्य तय करना हैं। महिलाओं ने खुद को कमजोर समझना छोड़ दिया तो सही मायने में नारी सशक्तीकरण का नारा सार्थक हो जाएगा।
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