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लोहड़ी उत्सव : दशहरा मैदान में रात्रि दीवान सजाने के साथ मनाया महोत्सव

Dainik Bhaskar

Jan 14, 2019, 04:05 AM IST

Nagda News - हिंदू कैलेंडर के अनुसार पौष माह की आखिरी रात रविवार को लोहड़ी पर्व मनाया गया। लोहड़ी की शाम मंडी व बिरलाग्राम में...

Nagda News - mp news lohri festival celebrated with decorating night dew at night in dusshera ground
हिंदू कैलेंडर के अनुसार पौष माह की आखिरी रात रविवार को लोहड़ी पर्व मनाया गया। लोहड़ी की शाम मंडी व बिरलाग्राम में आयोजन हुए। दशहरा मैदान स्थित गुरुद्वारे में रात 8.30 से 12.30 बजे तक रात्रि दीवान सजाया गया। यहां लोहड़ी उत्सव मनाया गया। इसी तरह बिरलाग्राम स्थित ग्रेसिम स्टॉफ क्लब में भी लोहड़ी उत्सव मनाया गया। यहां आयोजित सांस्कृतिक कार्यक्रमों में समाज के युवाओं और बच्चों ने पंजाबी गीतों पर प्रस्तुतियां दी। इस दौरान सभी ने एक-दूसरे को पर्व की शुभकामनाएं भी दी। बता दें कि त्योहार के कुछ दिन पहले से ही इसकी तैयारी शुरू हो जाती है। विशेष रूप से शरद ऋतु के समापन पर त्योहार को मनाने का प्रचलन है। लोहड़ी के बाद से दिन बड़े होने लगते हैं।

लोहड़ी का महत्व : पंजाबियों के लिए लोहड़ी उत्सव खास महत्व रखता है। जिस घर में नई शादी हुई हो या बच्चे का जन्म हुआ हो, उन्हें विशेष तौर पर लोहड़ी की बधाई दी जाती है। घर में नव वधू या बच्चे की पहली लोहड़ी का काफी महत्व होता है।

प्रकाश पर्व के चलते दशहरा मैदान गुरुद्वारे में संदेश देतीं हरचेत कौर।

सिख गुरु बन चुकी 24 साल की एचडीएफसी की असिस्टेंट ब्रांच मैनेजर हरचेत ने बड़ों को दिया संदेश

लोहड़ी पर्व पर दशहरा मैदान स्थित गुरुद्वारे में आयोजित अरदास में 24 साल की गुरु सिख हरचेत कौर (आयुषी कुंदी) ने अपने से बड़ों को संदेश दिया। वे बोलीं- 10वें गुरु गोबिंदसिंहजी की तारीफ केवल हम ही नहीं करते मुस्लिम धर्म के अल्लाह यार खां जोगी ने भी गुरु गोबिंदसिंह की तारीफ की है, इससे बड़ी गौरव की बात हमारे लिए क्या होगी। रविवार को उन्होंने भास्कर से किस्सा साझा करते हुए कहा अल्लाह यार खां द्वारा गुरुगाेबिंदसिंह की तारीफ करने पर काजियों ने उन्हें काफिर करार दे दिया था। कहा था यार खां इस्लाम का हिस्सा नहीं हो सकते। अल्लाह यार के मन में गुरु के प्रति भक्ति थी कि उन्होंने काजियों से कह दिया था कि मुझे पता नहीं कि मोहम्मद मुझे गोद लेंगे या नहीं, मगर गुरु मुझे अपनी गोद जरूर देगा। 22 की उम्र में गुरू सिख बनी-

हरचेत 22 की उम्र में गुरू सिख बन चुकी थी। नागदा के एबीपीएस से प्राथमिक शिक्षा प्राप्त करने के बाद दिल्ली के कॉलेज से एम.कॉम. किया है। वे एचडीएफसी बैंक उज्जैन में बतौर असिस्टेंट पद पदस्थ है।



गुरू गोबिंदसिंह जैसे लड़ाकों की जरूरत

हरचेत ने कहा वर्तमान में देश को गुरु गोबिंदसिंह जैसे लड़ाकों की जरूरत है। उन्होंने कहा आज भी इतिहास में मुगलों से जुड़े पाठ पढ़ाएं जाते है। मुगलों ने अत्याचार किए तब गुरू गोबिंदसिंह और उनके चारों बच्चों ने शहादत दी थी। उनके बारे में पाठ्य पुस्तक में जिक्र नहीं।

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