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286 स्कूलों के मध्याह्न भोजन का पैसा नहीं आया, बच्चों को मिल रही पानीदार सब्जी और फीका पुलाव
ब्लॉक के 286 स्कूलों में मध्याह्न भोजन की गुणवत्ता के साथ समझौता किया जा रहा है। जरूरत का राशन नहीं मिलने से रसोईये पानी वाली सब्जी और फीके चावल बनाने को मजबूर है। खाना तैयार करने वाले कर्मचारियों का तर्क है कि, स्कूल प्रभारी पर्याप्त मात्रा में आटा, चावल, जीरा, तेल व अन्य सामग्री उपलब्ध नहीं करा रहे। इससे भोजन की गुणवत्ता प्रभावित हो रही है।
हालात यह है कि, 60 बच्चों वाले शासकीय प्रावि कृष्णपुरा में मध्याह्न भोजन के लिए एचएम शशिकांत जायसवाल द्वारा एक किलो आटा प्रतिदिन मंगवाया जा रहा है। जबकि प्रत्येक बच्चों के लिए उचित मूल्य की दुकान से वर्षभर का गेहूं और चावल का आवंटन शासन पहले ही कर देता है। इसके अतिरिक्त प्रति बच्चा 4 रुपए 12 पैसे की राशि भोजन बनाने, सब्जी, दाल, मसाले, तेल, रसोइये का मेहनताना आदि के लिए देता है। जिला पंचायत स्कूलों में बच्चों की संख्या के मान से हर बच्चे पर 100 ग्राम गेंहू और इतने ही चावल का आवंटन करता है। जिसकी राशि संबंधित स्कूल के प्रभारी के खातों में ट्रांसफर कर दी जाती है। बाद में प्रभारी गेंहू और चावल का मूल्य कंट्रोल संचालक को चुका देते हैं। मगर परेशानी यह है कि दो माह से प्रभारियों के खातों में अनाज और अन्य खर्च की राशि नहीं पहुंच रही हैं, इसलिए भोजन की गुणवत्ता में कमी आई है।
मध्याह्न भोजन के तय मीनू के अनुसार सोमवार को बच्चों को जीरा राइस और आलू मटर की सब्जी दी जाना थी। मगर बच्चों को परोसे गए भाेजन में फीके चावल और नाममात्र के अालू ही नजर आए। मटर तो नदारद ही थी। खाना तैयार कर रही महिलाओं के अनुसार राशन की राशि का आवंटन प्रभारियों को सीधे किए जाता है। स्कूल प्रभारियों उचित मूल्य की दुकानों से राशन ना लाकर बाजार से खरीद रहे हैं। पर्याप्त मात्रा में राशन और अन्य सामान नहीं होने से भोजन ठीक नहीं बन पा रहा है।
राशन सामग्री कम होने से बनाए गए फीके चावल।
आलू कम होने से सब्जी में पानी ज्यादा नजर आ रहा था।
गुणवत्ता ठीक नहीं है तो जांच कराई जाएगी
प्रणव द्विवेदी, बीआरसी, खाचरौद
इसलिए आ रही परेशानी
2019 तक स्कूलों में एजेंसी और स्वसहायता समूहों द्वारा मध्याह्न भोजन सप्लाई किया जाता था। ग्रामीण क्षेत्रों में मौजूद स्कूलों में सांझा चूल्हा प्रणाली के अंतर्गत आंगनवाड़ी और स्कूल का मध्याह्न भोजन बनाया जाता था। हाल ही में शिक्षा विभाग ने नियमों में बदलाव कर स्कूलों में भोजन बनाए जाने के निर्देश लागू कर दिए, जिसके बाद से भोजन वितरण में परेशानी खड़ी हुई है।