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मडावदा में नाले पर 22 दुकानें बनाने पर अफसरों ने जताई नाराजगी, ग्रामीणों से लिखवाया- आगे नहीं करेंगे काम

2 वर्ष पहले
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भास्कर संवाददाता | नागदा/मड़ावदा

खाचरौद तहसील से 15 किमी दूर स्थित ग्राम पंचायत मड़ावदा में अजीब गोलमाल सामने आया है। पहले पंचायत ने खुद ही ग्रामीणों को पट्टों का वितरण किया। बाद में पट्टाधारियों ने जब नाले की जमीन पर दुकानों का निर्माण किया तो पंचायत ने अतिक्रमण की शिकायत तहसील कार्यालय में कर दी। नायब तहसीलदार प्रियंका मिमरोट ने लगभग एक माह पहले जांच की तो पट्टे शंकास्पद होने पर उन्होंने निरस्त करने का प्रतिवेदन एसडीएम कार्यालय भेजा। हाल ही में दोबारा पंच सुनील पांचाल व भरत ने अवैधानिक रूप से पट्टे बांटने की शिकायत कलेक्टर कार्यालय की। इस पर बुधवार को एसडीएम पुष्पेंद्र अहेके, नायब तहसीलदार मिमरोट, पटवारी वीणा टोकरे जांच करने पहुंचे। निरीक्षण में नाले पर 22 दुकानें निर्माणाधीन होने पर अधिकारियों ने नाराजगी जताकर ग्रामीणों से आगे कार्य नहीं करने की बात लिखित में ली। इस पर ग्रामीणों ने 2006 से जारी सभी पट्टे निरस्त कर संबंधितों पर कार्रवाई की मांग की।

72 पट्टों का हुआ वितरण, 22 ने बनाई दुकानें

ग्राम पंचायत ने 5 नवंबर 2015 के ठहराव प्रस्ताव क्रमांक 12 का हवाला देकर 72 पट्टों का वितरण किया था। ग्राम आबादी बस स्टैंड से गुजर रहे नाले पर ही 22 पट्टाधारियों ने पिल्लर खड़े कर दुकानों का निर्माण कर लिया। बुधवार को अधिकारियों ने इस निर्माण पर नाराजगी जताकर इसे रोकने के निर्देश दिए। बता दें कि नायब तहसीलदार कोर्ट ने भी इसे रोकने के आदेश दिया था, लेकिन उसकी भी अवहेलना की गई।

2006 में भी बांटे थे पट्टे

28 फरवरी 2006 को भी पंचायत द्वारा इसी तरह भू-राजस्व संहिता 1995 के नाम से पट्टे बांटे गए थे। जिसे निरीक्षण करने पहुंचे तत्कालीन तहसीलदार संजय वाघमरे ने पकड़ा था। उन्होंने पट्टे जब्त भी किए थे, लेकिन उनका स्थानांतरण होने से कार्रवाई आगे बढ़ ही नहीं पाई थी।

ग्राम पंचायत मड़ावदा में नाले पर दुकानों के निर्माण कार्य का निरीक्षण करते अधिकारी।

ग्राम पंचायत खुद उलझी अपने ही जाल में

ग्राम पंचायत ने 5 नवंबर 2015 को पट्टे बांटे थे। नाले के पास पट्टे बांटने की शिकायत सीएम हेल्प लाइन पर 27 फरवरी 2018 को हुई, पंचायत ने ही पंचनामा बनाकर इसमें खुद को सही साबित कर नाले पर कोई निर्माण कार्य नहीं होना बताया। पंचायत ने 24 दुकानों के निर्माण का प्रस्ताव किया, 4 दुकानें भी बनाई। 4 लाख रु. अमानत व 300 रु. प्रतिमाह में दुकानें दी। पट्टे होने पर अन्य ग्रामीणों ने भी दुकानें बनाई। इस पर 20 जून 18 को पंचायत ने तहसील कार्यालय में शिकायत की, जिस पर वह खुद उलझ गई, क्योंकि पट्टों में हेरफेर मिली और मामला जांच में आ गया।

भू-राजस्व संहिता का वर्ष ही बदल डाला

सरपंच कैलाशचंद्र कटारिया व तत्कालीन सचिव कालूराम परमार के हस्ताक्षर से जारी पट्टों में भू-राजस्व संहिता 1995 की धारा 244 के नियम 21 का हवाला दिया गया है। बता दें कि 1995 में कोई भू-राजस्व संहिता नहीं बनी है, बल्कि भू-राजस्व संहिता 1959 ही लागू है। खास बात यह है कि पट्टे जारी करने 5 नवंबर 2015 की ग्राम सभा का हवाला दिया गया है, जबकि ग्रामीण अनिल सोनी के सूचना के अधिकार के आवेदन पर सचिव जितेंद्र जोशी ने इस तिथि को कोई ग्राम सभा नहीं होने की बात कही है, यानी बिना ठहराव प्रस्ताव के ही पट्टों का वितरण हो गया है।

पट्‌टों की जांच की जारी है

नाले पर पट्टे देने का नियम नहीं है। पट्टों की ही जांच की जा रही है कि पंचायत ने किस नियम के तहत ग्रामीणों को दुकान या आवास के लिए पट्टे दिए थे। दो या तीन दिन में जांच पूरी कर आगामी कार्रवाई के लिए प्रतिवेदन कलेक्टर कार्यालय को भेजा जाएगा। पुष्पेंद्र अहेके, एसडीएम, खाचरौद

निर्माण रोकने को कहा था

पहली बार जांच में नाले पर तीन दुकानें बन रही थी, जिन्हें निर्माण रोकने को कहा गया था। पट्टे में भी हेरफेर नजर आने पर निरस्ती का एसडीएम कार्यालय प्रतिवेदन भेजा था। बुधवार को जांच में नाले पर 22 दुकानें निर्माणाधीन मिली है। सभी को अंतिम चेतावनी दी है, अब कार्य चलता है तो कानूनी कार्रवाई की जाएगी। 72 पट्टों की जांच की जा रही है। प्रियंका मिमरोट, नायब तहसीलदार, खाचरौद

नियमों का पालन किया

हमने सभी नियमों का पालन किया है। एसडीएम कार्यालय से जांच की जा रही है। वस्तुस्थिति सभी के सामने आ जाएगी। कैलाश कटारिया, सरपंच, ग्राम पंचायत मड़ावदा

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