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बेशकीमती सरकारी जमीन पर निजी कब्जे से चिंतित प्रशासन कृष्णा जीनिंग को निजी कब्जे से मुक्त कराने हाईकोर्ट जाने की तैयारी, स्टे वैकेंट के लिए लगाएंगे याचिका

3 वर्ष पहले
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शहर के मध्य स्थित बेशकीमती सरकारी जमीनों को निजी कब्जे से मुक्त कराने के लिए शासन ने गंभीरता दिखाई है। कलेक्टर से मिले निर्देश पर एसडीएम आरपी वर्मा कृष्णा जीनिंग परिसर की 17 बीघा जमीन पर शासन के विरुद्ध दिए गए स्टे पर अब दोबारा हाईकोर्ट जाने की तैयारी कर रहे हैं। अपील की ड्राफ्टिंग भी तैयार हो गई है। एसडीएम ने बताया शासन ने ओझा परिवार को दिए गए स्टे को वैकेट करने के लिए अपील करने का निर्णय लिया है। एसडीएम ने बताया उक्त जमीन सरकारी है। इसे जीनिंग फैक्ट्री स्थापित करने के लिए ओझा परिवार के पूर्वजों को आवंटित की गई थी, लेकिन वर्षों पहले ही जीनिंग फैक्ट्री बंद हो चुकी है। ऐसे में यह जमीन स्वत: ही शासन की हो गई है। मामले में कई अहम दस्तावेज शासन ने जुटा लिए हैं। इस आधार पर जीनिंग परिसर सरकारी है। यहां लोगों ने अतिक्रमण भी कर लिया है। मालूम हो जीनिंग परिसर की 17 बीघा जमीन का बाजार मूल्य 100 करोड़ रुपए से ज्यादा है।

राजस्व मंडल ने निजी जमीन माना था

बता दें कि मामले में 18 मार्च 2013 को राजस्व मंडल ग्वालियर ने जमीन पर ओमप्रकाश पिता राधाकिशन ओझा के पक्ष में फैसला देकर जमीन पर इस परिवार का निजी हक बताया था। फैसले के विरोध में नपा परिषद नागदा ने भी 11 अक्टूबर 2013 को हाईकोर्ट में अपील की थी। हाईकोर्ट ने अपर कलेक्टर न्यायालय को इस पर सुनवाई करने के निर्देश दिए थे। मामले में इसके बाद दोनों पक्षों को अपर कलेक्टर न्यायालय ने 30 अप्रैल 2014 को नोटिस जारी किए थे। ओझा परिवार की ओर से मामले में पक्ष नहीं रखने पर अपर कलेक्टर न्यायालय ने 27 मई 2014 को एकपक्षीय फैसला देते हुए जमीन को सरकारी घोषित किया था। इसके बाद स्थानीय प्रशासन ने जीनिंग परिसर की 17 बीघा जमीन का सीमांकन कराकर कब्जा लिया था। बाद में ओझा परिवार ने मामले में फिर न्यायालय में अपील की। हाल ही दो माह पूर्व स्थानीय न्यायालय ने ओझा परिवार के हक में स्टे दिया था। इसे अब शासन हाईकोर्ट में चुनौती देगा।

बीसीआई की जमीन के लिए सुप्रीम कोर्ट में शासन की एसएलपी स्वीकार
गौरतलब है बुधवार को ही बंद भारत कॉमर्स उद्योग (बीसीआई) की लगभग 1500 बीघा जमीन को सरकारी घोषित करने के लिए शासन ने सुप्रीम कोर्ट में स्पेशल लिव पिटिशन दायर की जो स्वीकार हो गई है। बंद उद्योग के श्रमिकों का बकाया और देनदारियां चुकाने के लिए हाईकोर्ट से नियुक्त परिसमापक के माध्यम से उद्योग की समस्त संपत्तियों की नीलामी की गई थी। जिसे ग्रेसिम उद्योग ने 39 करोड़ 9 लाख रुपए में खरीदा था। फिलहाल इस पर ग्रेसिम उद्योग का कब्जा है। हालांकि मामले में न्यायालय में विचाराधीन एक याचिका पर तत्कालीन अपर कलेक्टर पवन जैन ने 18 सितंबर 2014 को बीसीआई उद्योग की जमीन को सरकारी घोषित कर कब्जा भी ले लिया था, लेकिन बाद में अपील में मामला पहुंचा था। इस पर आए फैसले में 1500 बीघा जमीन को ग्रेसिम का स्वामित्व माना था। शासन अब इसी फैसले के विरुद्ध सुप्रीम कोर्ट पहुंचा है।

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