अफसरों की समझाइश पर भी नहीं टूटी हड़ताल

Nagda News - काफी कोशिशें के बाद भी गुरुवार शाम 5 बजे से ग्रेसिम उद्योग के श्रमिकों द्वारा शुरू की गई अघोषित हड़ताल शुक्रवार देर...

Bhaskar News Network

Oct 12, 2019, 08:36 AM IST
Nagda News - mp news strike did not break even on the advice of officers
काफी कोशिशें के बाद भी गुरुवार शाम 5 बजे से ग्रेसिम उद्योग के श्रमिकों द्वारा शुरू की गई अघोषित हड़ताल शुक्रवार देर रात तक नहीं टूटी। दोपहर ढाई से शाम 7 बजे तक सहायक श्रमायुक्त मेघना भट्‌ट, एडीएम आरपी तिवारी ने ठेका श्रमिकों के प्रतिनिधिमंडल और उद्योग के प्रबंधकीय अधिकारी के मध्य तटस्थ भूमिका में रहकर दोनों पक्षों से बातचीत की। बैठक में यह सामने आया ठेका श्रमिकों को बुधवार को सम्पन्न हुआ पांच सालाना वेतनवृद्धि समझौता मंजूर नहीं है।

ग्रेसिम प्रबंधन के साथ समझौता करने वाले संयुक्त ट्रेड यूनियन मोर्चा में शामिल श्रम संगठन इंटक, बीएमएस, एचएमएस और एटक के पदाधिकारियों ने बगैर श्रमिकों को विश्वास में लिए एक तरफा निर्णय लिया है। श्रमिकों से मांगपत्र भी साझा नहीं किया गया। जबकि पूर्व में प्रबंधन को मांगपत्र सौंपने के पूर्व श्रमिकों की राय ली जाती थी। समझौता सम्पन्न करने के पूर्व भी गेट मीटिंग कर श्रमिकों से पूछा जाता था। लेकिन इस बार संयुक्त ट्रेड यूनियन मोर्चा ने बगैर किसी को बताएं ही समझौता किया है। जिसमें ठेका श्रमिकों का मासिक वेतन कम बढ़ाया गया है। इतने कम वेतन में परिवार चलाना मुश्किल है। हालांकि दोपहर में शहर पहुंचे सहायक श्रमायुक्त मेघना भट्‌ट, एडीएम आर.पी.तिवारी, एडिशनल एसपी अंतरसिंह कनेश ने एसडीएम आरपी वर्मा, सीएसपी मनोज र|ाकर सहित दोनों थानों के प्रभारियों की उपस्थिति में श्रमिकों के प्रतिनिधि मंडल से चर्चा में श्रमिकों ने चार सूत्रीय मांग पत्र सहायक श्रमायुक्त को सौंपा। जिसमें से कुशल, अर्द्धकुशल और अकुशल श्रेणी में सीनियरटी के मान से श्रमिकों का वर्गीकरण और पांच सालाना समझौते का एरियर अप्रैल के बजाए स्थाई श्रमिकों की तरह जनवरी माह से देने पर ग्रेसिम के वरिष्ठ उपाध्यक्ष वायएस रघुवंशी राजी भी हो गए। बावजूद ठेका श्रमिक नहीं मानें। उनका कहना था कि जब तक प्रबंधन 100 रु. प्रतिदिन की वेतनवृद्धि पर राजी नहीं होता वे काम नहीं करेंगे। उद्योग के भीतर किसी श्रमिक को जाने नहीं देंगे। चर्चा मे उद्योग के आईआर विभाग के जनरल मैनेजर विनोद मिश्रा, जनसंपर्क अधिकारी संजय व्यास भी मौजूद रहे। श्रमिकों के पक्ष में जिला कांग्रेस कार्यकारी अध्यक्ष सुबोध स्वामी, जिला महामंत्री रघुनाथसिंह भी बैठक में पहुंुचे।

प्रबंधन की बस दो टूक, समझौता रजिस्टर्ड, अब इसमें नहीं कर सकते फेरबदल

बैठक के लिए खेल परिसर में प्रबंधन की ओर से बात करने के लिए पहले जनरल मैनेजर विनोद मिश्रा और जनसंपर्क अधिकारी संजय व्यास पहुंचे। इस पर कांग्रेस नेता सुबोध स्वामी ने आपत्ति लेकर कहा कि इन दोनों काे निर्णय लेने का अधिकार नहीं तो इनसे बात क्यों करें। प्रशासनिक अधिकारी जिम्मेदार अधिकारी को बुलाएं। तब चर्चा के पहुंचे वरिष्ठ उपाध्यक्ष वायएस रघुवंशी ने सहायक श्रमायुक्त के समक्ष दो टूक शब्दों में कहा कि ट्रेड यूनियन के साथ हुआ पांच सालाना समझौता रजिस्टर्ड लीगल दस्तावेज है। इसमें फेरबदल संभव नहीं। नियमानुसार श्रमिकों के प्रतिनिधि श्रम संगठन के साथ ही समझौता किया गया है। अगर किसी को आपत्ति हैं तो वो समझौते को चैलेंज करने के लिए स्वतंत्र है। इतना सुनते ही सारे श्रमिक उठकर बाहर चले गए।

दावा : इससे बेहतर समझौता कभी नहीं हुआ- मीडिया से चर्चा में वायएस रघुवंशी ने दावा किया कि ठेका श्रमिकों के वेतन में प्रतिदिन 25, 40 और 60(श्रेणीवार) रुपए की वृद्धि की है। जो पिछले समझौतों से डेढ़ गुना है। श्रमिक समझौता समझने की बजाए इसकी काल्पनिक व्याख्या कर रहे हैं। अगर एक बार समझौते को श्रमिक समझ लें तो उन्हें पता चलेगा कि 2019 का वेतनवृद्धि समझौता श्रमिक हित में है।

प्रबंधकीय अफसर और प्रतिनिधिमंडल ने चर्चा की

दूसरे दौर में झुका प्रबंधन, मगर श्रमिक वेतन में रोज 100 रुपए की वृद्धि पर अड़े

10 मिनट के बाद किसी तरह सहायक श्रमायुक्त के कहने पर श्रमिकों का प्रतिनिधि मंडल दोबारा चर्चा के लिए पहुंचा तो ग्रेसिम के प्रबंधकीय अधिकारी श्रमिकों को वर्गीकरण करने के साथ ही सभी ठेका श्रमिकों को अप्रैल की बजाए 1 जनवरी से ही एरियर देने की मांग पर राजी हो गए। मगर श्रमिकों को कहना था कि वर्गीकरण की मांग तो 2014 के समझौते में ही स्वीकृत हो चुकी थी, लेकिन प्रबंधन ने वर्गीकरण नहीं कर मनमानी की। इससे प्रत्येक श्रमिक को बीते पांच साल में हजारों रुपए का नुकसान हुआ है। प्रबंधन को 2014 से वर्गीकरण का लाभ देकर डिफरेंस राशि के एरियर का भी भुगतान करना चाहिए। साथ ही वेतन में प्रतिदिन 100 रुपए की वृद्धि करना चाहिए। ताकि महंगाई के दौर में वे भी परिवार का भरण पोषण ठीक से कर सके। श्रमिकों की इस मांग को प्रबंधन ने कंपनी पॉलिसी के विपरीत बताकर मांग को खारिज कर दिया। हालांकि बाद में श्रमिकों ने यह तक कहा कि हमें एरियर नहीं चाहिए बस प्रबंधन 100 रुपए की वेतनवृद्धि कर दें तो हम हड़ताल तोड़ देंगे।

ग्रेसिम उद्योग के बाहर सड़क जमा श्रमिकों की भीड़

श्रमिक सेंव परमल खाकर बैठे रहे धरने पर

हड़ताल पर उतरे श्रमिकों से चर्चा करने के लिए सहायक श्रमायुक्त, एडीएम, एडिशनल एसपी दोपहर 12.30 बजे ही पहुंच चुके थे। मगर सीधे आंदोलनकारी श्रमिकों से चर्चा करने पहुंचने की बजाए दोपहर ढाई बजे सर्किट हाउस चले गए थे। इसके बाद वे श्रमिकों को समझाइश देने के लिए पहुंचे। जबकि उद्योग के चारों गेटों पर श्रमिक सेव परमल खाकर अधिकारियों का इंतजार करते रहे।

स्थाई श्रमिक भी समर्थन में

हड़ताल को स्थाई श्रमिकों का भी समर्थन मिल रहा है। शुक्रवार सुबह 8 बजे जनरल शिफ्ट के साथ मॉर्निंग और आफ्टर नून शिफ्ट के स्थाई श्रमिक भी प्रबंधन द्वारा व्यक्तिगत फोन कर बुलाने पर भी ड्यूटी नहीं गए। जो इक्का-दुक्का श्रमिक ड्यूटी के लिए निकले उन्हें ठेका श्रमिकों ने रास्ते में ही रोक लिया। गौरतलब है कि गुरुवार शाम 5 बजे से हड़ताल पर उतरे श्रमिक उद्योग के बाहर ही डेरा डाले हुए है। शुक्रवार को तो रात में सोने के लिए बिस्तर तक की व्यवस्था भी श्रमिकों ने कर ली थी।

यदि आपत्ति हो तो समझौते को चुनौती दे सकते हैं


रात को विधायक पहुंचे ग्रेसिम गेट, अाश्वस्त किया

रात 9.15 बजे विधायक दिलीपसिंह गुर्जर ग्रेसिम गेट पर पहुंचे। यहां हड़ताल कर रहे ठेका श्रमिकों से चर्चा कर आश्वास्त किया कि श्रमिकों के हितों का पूरा ख्याल रखा जाएगा। उद्योग प्रबंधन की दादागिरी नहीं चलने देंगे। विधायक ने प्रशासनिक अधिकारियों से चर्चा कर उन्हें भी श्रमिकों के अधिकारों का ख्याल रखने को कहा है।

उद्योग के वरिष्ठ उपाध्यक्ष रघुवंशी ने कहा, कंपनी पॉलिसी से बाहर जाकर नहीं दे सकते लाभ

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