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ऐसी श्रद्धा कि... भागवत कथा की पूर्णाहुित पर कोई टीले पर चढ़ गए तो किसी ने बाइक पर खड़े हो सुनी कथा

Nagda News - इंडस्ट्रियल एरिया पहुंच मार्ग का लिंक रोड मंगलवार को श्रोताओं की भीड़ से पट गया। जिधर देखो उधर पं. कमलकिशोर नागर की...

Dec 04, 2019, 09:46 AM IST
इंडस्ट्रियल एरिया पहुंच मार्ग का लिंक रोड मंगलवार को श्रोताओं की भीड़ से पट गया। जिधर देखो उधर पं. कमलकिशोर नागर की कथा को सुनने वाले श्रोताओं का जमघट था। सबसे आश्चर्यजनक तो सैकड़ों दिव्यांगजन की उपस्थिति थी, जो शरीर से लाचार होते हुए भी कथा समापन के अंतिम दिन पं. नागर की अमृतवाणी सुनने पहुंचे थे। पंडाल खचाखच भर गया तो लोगों को जहां जगह मिली वहीं खड़े हो गए। कथा सुनने वालाें ने धूप की भी परवाह नहीं की। कोई टीले पर खड़ा नजर आया तो कोई पं. नागर की एक झलक पाने के लिए बाइक पर ही खड़ा होकर कथा सुनता नजर आया। अंतिम दिन लगभग 15 हजार से ज्यादा लोग यहां पहुंचे थे। वहीं 500 से अधिक दिव्यांगों ने भी कथा सुनी।

दोपहर 12 बजे शुरू हुई कथा में पं. नागर बोले- सीमा पर देश की सुरक्षा में तैनात किसी भी अवतारी से कम नहीं है। सर्दी, गर्मी, बारिश हर परिस्थिति, विषम हालातों में भी हमारी सुरक्षा के लिए डटे हैं। हमारे लिए वे भी किसी भगवान से कम नहीं है। आप मेरी बात मानें तो सैनिकों के फोटो को भी पूजाघर में जरूर स्थान दीजिए। इतनी श्रद्धा भी आप रख पाएं तो समझ लीजिए आप भगवान की ही सेवा कर रहे हैं।

पं. नागर ने बताया कि मनुष्य को अपने जीवन में भागवत जरूर सुनना चाहिए। भागवत के सुनने से घर-परिवार में हमेशा सुख-शांति बनी रहती है। कथा का आयोजन कराने वाले को तो इसका फल मिलता ही है, लेकिन सुनने वाले को इससे ज्यादा पुण्य प्राप्त होता है।

दोपहर 12 बजे कथा प्रारंभ होने के पूर्व पं. नागर का अभिनंदन प्रदेश कांग्रेस कमेटी प्रतिनिधि एवं आराधना ग्रुप के संयोजक बसंत मालपानी, चेतन नामदेव, नागदा व्यापारी संघ अध्यक्ष दिनेश अग्रवाल, रेणु माहेश्वरी, सीमा मालपानी, सपना मालपानी सहित यजमान परिवार के सदस्यों ने शाल उड़ाकर किया। अंत में प्रसंग का समापन महाआरती कर किया गया। इधर, कथा के छठे दिन परिवार की सुख-समृद्वि एवं विश्व कल्याण के लिए शुरू हुए यज्ञ की पूर्णाहुति मंगलवार को की गई। इसमें यजमान परिवार के राधेश्याम अग्रवाल-सुशीला अग्रवाल, घनश्याम -आशा अग्रवाल, उमेश-शिल्पा अग्रवाल, नीलेश- सोनू अग्रवाल ने यज्ञ में आहुतियां दी। विधायक दिलीपसिंह गुर्जर ने भी सप|ीक कथा सुनी। गुर्जर ने महाआरती के पश्चात पं. नागर का क्षेत्र की जनता की ओर से नागरिक अभिनंदन भी किया। उनके साथ जिला कांग्रेस अध्यक्ष सुबोध स्वामी, किराना व्यापारी संघ संरक्षक मनोज राठी, शहर अध्यक्ष राधे जायसवाल भी मौजूद थे।

इनकी मेहनत से सफल हुई कथा

7 दिन तक चली कथा में भोजन से लेकर श्रद्धालुओं की सेवा में ज्ञानेश्वर पोरवाल, युधिष्ठिर रघुवंशी, सतीश जैन सांवेर, सुनील दादूस, उमेश अग्रवाल, नीलेश अग्रवाल, अंतरसिंह तोमर, बसंत मालपानी, महेश राठाैर, जमना मालपानी, प्रशांत राठी, जेपी मल्लाह, भीमराज मालवीय, आशीष अग्रवाल, मनीष अग्रवाल, शैलेंद्र गुप्ता, राकेश फर्नाखेड़ी, शिल्पा अग्रवाल, कमल आर्य, आयुष पोरवाल, आलोक मोहता, उमेश सेठिया, सीमा मालपानी, उर्मिला डांगरा, चेतन नामदेव, सोनू अग्रवाल, सुनील माहेश्वरी, पंकज पोरवाल, सुरेंद्र जैन, अजीत कांठेड़, मनोज पोरवाल, गगन पोरवाल, जगदीश मेहता, कृष्णा काबरा सहित एक दर्जन से अधिक महिला मंडल जुटे रहे।

पं. नागर का अभिनंदन : दोपहर 12 बजे कथा प्रारंभ होने के पूर्व पं. नागर का अभिनंदन प्रदेश कांग्रेस कमेटी प्रतिनिधि एवं आराधना ग्रुप के संयोजक बसंत मालपानी, चेतन नामदेव, नागदा व्यापारी संघ अध्यक्ष दिनेश अग्रवाल, रेणु माहेश्वरी, सीमा मालपानी, सपना मालपानी सहित यजमान परिवार के सदस्यों ने शाल उड़ाकर किया। अंत में प्रसंग का समापन महाआरती कर किया गया।

यज्ञ की पूर्णाहुति पर दी आहुति : कथा के छठे दिन परिवार की सुख-समृद्वि एवं विश्व कल्याण के लिए शुरू हुए यज्ञ की पूर्णाहुति मंगलवार को की गई। इसमें यजमान परिवार के राधेश्याम अग्रवाल-सुशीला अग्रवाल, घनश्याम -आशा अग्रवाल, उमेश-शिल्पा अग्रवाल, नीलेश- सोनू अग्रवाल ने यज्ञ में आहुतियां दी।

विधायक ने सप|ीक कथा सुनी : विधायक दिलीपसिंह गुर्जर ने भी सप|ीक कथा सुनी। गुर्जर ने महाआरती के पश्चात पं. नागर का क्षेत्र की जनता की ओर से नागरिक अभिनंदन भी किया। उनके साथ जिला कांग्रेस अध्यक्ष सुबोध स्वामी, किराना व्यापारी संघ संरक्षक मनोज राठी, शहर अध्यक्ष राधे जायसवाल भी मौजूद थे।

सीमा पर हमारी रक्षा के लिए डटे सैनिकों के फोटो को भगवान के साथ पूजाघर में स्थान दो- पं. नागर

कथा सुनने महिलाएं भी चढ़ी टीले पर

दिव्यांग भी पहुंचे कथा पंडाल

बाइक पर चढ़कर नमन

खुद का टिफिन, टिकट और समय देने वाला ही कर सकता है धर्म का प्रचार

कथा के दौरान पं. नागर भावुक भी हुए। वे बोले- शहर में अफवाह है कि मैं कथा के लिए लाखों रुपए लेता हूं। मेरे जाने के बाद यजमान और व्यवस्था देख रहे युधिष्ठिरसिंह रघुवंशी से पूछना... मैं कथा के लिए महज एक तुलसी पत्र लेकर यहां से विदा लूंगा। कथा में दान में जो भी मिला वो यजमान कि मर्जी वह उसे जहां चाहे दान करें। मैंने आपके शहर के पानी से सिर्फ स्नान किया है। पीने का पानी नर्मदा से और भोजन का प्रबंध भी स्वयं किया है। इसलिए अफवाहों पर ध्यान मत देना, क्योंकि धर्म का प्रचार वे ही कर सकता है जो खुद का टिफिन, टिकट और समय दे सकता है।

और ये सीख बेटियों को...

बेटियों को संस्कारी बनाना ये माता-पिता की जिम्मेदारी है, लेकिन माता-पिता का सिर न झुके, यह जिम्मेदारी बेटियों की है। मोबाइल का सदुपयोग करें। उम्र से पहले मोबाइल न दें तो बेहतर।

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