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परशुराम सागर तालाब में मिल रहा सीवेज इसे रोकने की योजना में लगेंगे 2 साल

भास्कर संवाददाता| नरसिंहगढ़ परशुराम सागर में रोजाना बड़ी मात्रा में शहर का सीवेज मिल रहा है। इससे तालाब तो...

Bhaskar News Network| Last Modified - Mar 21, 2018, 02:55 AM IST

परशुराम सागर तालाब में मिल रहा सीवेज इसे रोकने की योजना में लगेंगे 2 साल
परशुराम सागर तालाब में मिल रहा सीवेज इसे रोकने की योजना में लगेंगे 2 साल
भास्कर संवाददाता| नरसिंहगढ़

परशुराम सागर में रोजाना बड़ी मात्रा में शहर का सीवेज मिल रहा है। इससे तालाब तो प्रदूषित हो ही रहा है, साथ ही इसकी जल संग्रहण क्षमता पर भी असर पड़ रहा है।

नगर पालिका इसकी सफाई, सौंदर्यीकरण और विकास के लिए प्लान पर काम करने की बात पिछले 3 सालों से कह रही है, लेकिन अभी तक कुछ नहीं हुआ है। प्लान मंजूरी के लिए शासन को भेजा गया है, लेकिन अभी तक बात आगे नहीं बढ़ी है। अब इस मुद्दे पर नागरिकों की सक्रियता भी जरूरी हो गई है, क्योंकि प्लान को मंजूरी मिलने के बाद भी उसे पूरा होने में कम से कम 2 साल लगेंगे। तब तक तालाब की हालत और भी ज्यादा खराब हो जाएगी। चिंता की बात यह है कि शहर के बड़े हिस्से के जलस्तर को निर्धारित करने वाले तालाब को कोई भी गंभीरता से नहीं ले रहा है।

इसके घाटों पर बड़े-बड़े धार्मिक आयोजन होते हैं और बारिश के दिनों में पानी से लबालब भरे तालाब के नजारे देखने के लिए लोग सैर सपाटे के उद्देश्य से जाते हैं।लेकिन तालाब की देखरेख और इसे साफ सुथरा रखने के लिए कोई भी आगे नहीं आता है।

योजना पर काम अभी तक कुछ नहीं हुआ, पानी हो रहा है दूषित

शहर के बड़े हिस्से के जलस्तर को निर्धारित करने वाले तालाब के प्रति गंभीरता नहीं

परशुराम सागर में मिलने वाले सीवेज की वजह से इसकी जल संग्रहण क्षमता कम हो रही है।

जरूरत: शहर में जल संग्रहण के लिए ये तीन काम होने चाहिए

1. पुराने कुओं का नवीनीकरण

तालाब के आसपास रियासती दौर में ठंडे और मीठे पानी के पक्के कुएं बनाए गए थे। यह कुएं तेज गर्मी में तालाब के लिए वाटर रिचार्ज सेंटर का काम करते हैं। देखरेख नहीं होने से इनमें से ज्यादातर कुएं या तो ढह गए हैं या गंदी हालत में हैं। व्यवस्थित योजना बनाकर इन सभी को नया लुक दिया जा सकता है, जिससे शहर के जल स्तर को बढ़ाने में तो मदद मिलेगी ही, पर्यटन के नजरिए से भी यह कुएं बेहतर पॉइंट बन सकेंगे।

2. पंप हाउस का निर्माण

तालाब के गंदे पानी को शुद्ध करने के लिए आधुनिक तकनीक के कम से कम 8 पंप हाउस तालाब के किनारों पर बनने चाहिए। इससे आसपास के थावरिया, बाराद्वारी, पाल रोड और शिक्षक कॉलोनी क्षेत्रों से तालाब में मिलने वाली गंदगी को फिल्टर करके साफ पानी को तालाब में छोड़ा जा सकता है।

3. मंदिरों का जीर्णोद्धार

तालाब के चारों ओर 24 मंदिर हैं, जो धार्मिक आस्था के केंद्र होने के साथ वास्तु और स्थापत्य के बेहतरीन उदाहरण भी हैं। अगर इन सभी मंदिरों को इनके मूल स्वरूप में विकसित कर रंग रोगन और स्थाई लाइटिंग से सजा दिया जाए तो रात के समय तालाब में पड़ने वाली इनकी जगमगाती परछाई पूरे तालाब को एक बेहतरीन हेरिटेज लुक दे सकती है। इन मंदिरों में कंवरानी जी मंदिर, चंपावत जी मंदिर, जल मंदिर, छत्रसाल मंदिर, भरतगढ़ मंदिर,जमात मंदिर, केम का मंदिर, कांवड़िया जी और चंद्रावत जी मंदिर आदि शामिल हैं।

व्यक्तिगत प्रयास कर जल्दी शुरू करवाएंगे

परशुराम सागर के सौंदर्यीकरण और विकास का प्रोजेक्ट शासन के पास मंजूरी के लिए गया हुआ है।हम व्यक्तिगत स्तर पर इसके लिए बात कर इसे जल्दी शुरू कराने की कोशिश कर रहे हैं। उम्मीद है कि इसी साल प्रोजेक्ट पर काम शुरू हो सकेगा। उर्मिला उपाध्याय, नपाध्यक्ष,नरसिंहगढ़।

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