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विभाग की हिदायत के बाद भी खेतों में नरवाई जला रहे किसान

Dainik Bhaskar

Apr 01, 2018, 03:05 AM IST

Narsinghgarh News - भास्कर संवाददाता| नरसिंहगढ़ रबी की फसल लेने के बाद किसानों ने अपने ही खेतों में फिर से आग लगानी शुरू कर दी...

विभाग की हिदायत के बाद भी खेतों में नरवाई जला रहे किसान
भास्कर संवाददाता| नरसिंहगढ़

रबी की फसल लेने के बाद किसानों ने अपने ही खेतों में फिर से आग लगानी शुरू कर दी है।नरवाई जलाने का सिलसिला कृषि विभाग की हिदायतों के बाद भी बंद नहीं हो रहा है। शहर से सटे ब्यावरा रोड के गांवों में हाइवे के किनारे ही ऐसे नजारे दिख रहे हैं। सबसे बड़ी बात यह है कि कई कार्यशालाओं में और चौपालों में सरकारी अधिकारी, कर्मचारी किसानों को नरवाई से जलाने से खेतों को होने वाले नुकसान समझा चुके हैं लेकिन लापरवाही और आलस की वजह से किसान इस पर ध्यान नहीं दे रहे हैं।

नुकसान क्या

मिट्टी में बार-बार आग लगाने से उसकी उत्पादन क्षमता कम होती है। हालात यह होंगे कि कुछ दशकों बाद ऐसे खेतों में घास का तिनका भी नहीं उगेगा। खेत में आग लगाने से जमीन में एक-डेढ़ फुट पर पड़े केचुएं, मेंढक और फसल मित्र कीटों के अंडे, जीवाश्म नष्ट हो जाते हैं। इनमें कई बैक्टीरिया ऐसे हैं जो जमीन की उर्वरा क्षमता तो बढ़ाते ही हैं, फसलों को भी फायदा पहुंचाते हैं।

साथ में आने वाला नुकसान

नरवाई जलाते समय खेतों में आग लगाकर उसे लापरवाही से छोड़ दिया जाता है। इसकी चिंगारियों से आस-पास के क्षेत्रों में भी आग फैलती है। ऐसा हर साल होता है, जिसमें बड़ी मात्रा में दूसरे किसानों का गेहूं, चना और दूसरी उपज जलकर नष्ट हो जाती है पिछले दिनों में ही संवासी,लखनवास जैसे गांवों में अज्ञात कारणों से खेत-खलिहानों में आग लगने की घटनाएं हुई हैं। यह अज्ञात कारण और कुछ नहीं होते हैं, नरवाई की ही आग होती है।

तो उपाय क्या है

वर्तमान में भूसा बनाने वाली मशीनें भी आ गई हैं। हार्वेस्टर से कटे खेत में फसल के बचे हुए अंश का चारा बनाया जा सकता है। इसके अलावा रोटावेटर चलाकर इसे बारीक करके मिट्टी में मिला दिया जाता है जो जैविक खाद का काम करता है।

बड़ा भ्रम

नरवाई जलाने का चलन पिछले दो-तीन दशकों में ज्यादा बढ़ा है। इसके पीछे किसानों की सोच है कि इस से खरपतवार नष्ट हो जाएगी।

बड़ी बात यह है कि ऐसा कुछ भी नहीं हो रहा है, बल्कि खरपतवार हर साल बढ़ती जा रही है। आग लगने से खेत की मिट्टी खराब हो रही है। वह पक्की ईंट की शक्ल लेती जा रही है, जिससे बारिश का पानी उसके अंदर नहीं जा पाता है।

नुकसान के बारे में जानते हुए भी अपने ही खेतों को जलती भट्टी बना रहे हैं किसान

खेतों में किसान लगातार नरवाई जला रहे हैं।

धरती को अग्नि स्नान नहीं जल स्नान की जरूरत है


लापरवाही अगली पीढ़ियों पर भारी पड़ेगी


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