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अपनी लाइब्रेरी की किताबे राजमाता ने स्कूल को दान में दीं थीं, सिर्फ 20 बचीं

भास्कर संवाददाता| नरसिंहगढ़ साहित्य और अतीत से जुड़ाव ना होने का नुकसान क्या होता है, यह शासकीय श्री विक्रम...

Bhaskar News Network | Last Modified - Apr 02, 2018, 04:05 AM IST

भास्कर संवाददाता| नरसिंहगढ़

साहित्य और अतीत से जुड़ाव ना होने का नुकसान क्या होता है, यह शासकीय श्री विक्रम उत्कृष्ट विद्यालय में देखा जा सकता है। जहां स्कूल के पुस्तकालय से कई दुर्लभ किताबें गायब हो गईं।स्कूल को सन 1960 के दशक में स्थानीय राज परिवार की वरिष्ठ सदस्य राजमाता शिवकुमारी देवी ने अपना निजी पुस्तकालय दान में दे दिया था। स्थानीय वरिष्ठ लोगों के मुताबिक उस पुस्तकालय में कई बहुमूल्य और साहित्य के नजरिए से दुर्लभ किताबें भी थीं,लेकिन वर्तमान में स्कूल के पुस्तकालय में राजमाता की दी हुई केवल 20 किताबें हैं।बाकी किताबें कहां गईं।इसके विषय में कोई जानकारी किसी के पास नहीं है।

कुछ सालों पहले भी मौजूद थीं स्कूल की लायब्रेरी में किताबें

स्कूल के पूर्व प्राचार्य राजेश भारतीय के मुताबिक जब वे स्कूल में प्राचार्य थे, तब एक कमरे में पानी में भीगती हुई ढेर सारी किताबों को उन्होंने व्यवस्थित करवाया था। इनमें बड़ी संख्या राजमाता की दी किताबों की भी थी। श्री भारती के मुताबिक जब उन्होंने स्कूल का चार्ज छोड़ा तब तक स्कूल में किताबें पर्याप्त थीं।

यह किताबें बची हैं राजमाता के संग्रह में- सन 1930 के दशक का रामचरितमानस, गांधी और नेहरू पर आधारित सचित्र मोटी किताबें,विज्ञान विषय से जुड़ी हुई पुरानी किताबें।

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