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गांव में 10 साल से जल संकट, सात साल से निजी ट्यूबवेल देते थे पानी, अब वे भी सूखे

ग्रामीणों का प्रतिनिधिमंडल एसडीएम कार्यालय पहुंचा, की टयूबवेल खनन की अनुमति की मांग भास्कर संवाददाता|...

Dainik Bhaskar

Mar 27, 2018, 07:30 AM IST
ग्रामीणों का प्रतिनिधिमंडल एसडीएम कार्यालय पहुंचा, की टयूबवेल खनन की अनुमति की मांग

भास्कर संवाददाता| नरसिंहगढ़

मूंडला बजरंग गांव की 600 से ज्यादा आबादी के सामने पानी की कमी का संकट आ गया है। गांव में लगभग 10 सालों से जलस्तर बेहद नीचे चला गया है ।

हालांकि पिछले 7 सालों से एक स्थानीय निवासी अपने निजी ट्यूबवेल से गांव वालों को पानी उपलब्ध करा रहे थे। लेकिन इस साल ट्यूबवेल सूख जाने से दिक्कत बढ़ गई है। सोमवार को ग्रामीणों का प्रतिनिधिमंडल ट्रैक्टर में सवार होकर एसडीएम कार्यालय पहुंचा। उन्होंने गांव में पानी के स्थाई इंतजाम के साथ निजी ट्यूबवेल के खनन की अनुमति देने की मांग की है, ताकि गांव में पहले की तरह पानी की सप्लाई हो सके। प्रतिनिधिमंडल में देव सिंह, शिवनारायण, लाल सिंह, भोला, आत्माराम, मोहन बाई, अनीता बाई, कृष्णा बाई, शालू बाई, भूरी बाई, मेवा बाई, केसरबाई, गंगाबाई आदि शामिल थे।

गांव की 600 से ज्यादा की आबादी हो रही है परेशान

50 साल पहले गांव में भरपूर पानी था

प्रतिनिधि मंडल में शामिल गांव की बुजुर्ग महिला मेवा बाई ने बताया कि वे लगभग 50 साल पहले ब्याह कर गांव में आई थी, तब पानी की बिल्कुल दिक्कत नहीं थी। लेकिन अब हालात खराब हैं। अन्य महिलाओं ने बताया कि कुछ सालों पहले तक गांव की पुरानी कुंडियों में गर्मियों में भी पानी रहता था ,लेकिन उनकी देखरेख नहीं होने और गहरीकरण नहीं होने से अब वे भी बहुत जल्दी सूख जाती हैं।

गलत रिपोर्ट देकर प्रशासन को गुमराह किया पीएचई ने

ग्रामीणों ने पीएचई विभाग पर भी गांव में जल संकट को बढ़ाने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि वे पहले भी एसडीएम कार्यालय में पानी की कमी की शिकायत कर चुके हैं।तब एसडीएम के आदेश पर पीएचई की टीम गांव में ट्यूबवेल की स्थिति का निरीक्षण करने पहुंची थी। उस दौरान भी सरकारी ट्यूबवेल बंद थी ,लेकिन पीएचई ने अपनी रिपोर्ट में उनके चालू होने की जानकारी एसडीएम कार्यालय में दी। इससे गांव में जल संकट से निपटने के इंतजाम नहीं किए जा सके।

जब तक था,पानी दिया, लेकिन अब पानी ही नहीं है

स्थानीय निवासी आत्माराम ने बताया कि उनके ट्यूबवेल में भरपूर पानी था। उसे गांव के 2 कुओं में डालकर ग्रामीणों को उपलब्ध कराते थे। इससे सभी की दिक्कतें दूर हो गई थी। अब ट्यूबवेल में ही पानी नहीं है। ग्रामीणों का कहना है कि सबसे ज्यादा दिक्कत मवेशियों और पक्षियों की है। मूक पशु-पक्षी बिना पानी के तड़पते रहते हैं।

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