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कहीं सर्वर नहीं होता तो कहीं मशीन में केश नहीं, ज्यादातर एटीएम बंद रहते हैं

भास्कर संवाददाता| नरसिंहगढ़ शहर में अलग-अलग बैंकों के 7 एटीएम हैं, लेकिन इनका एक साथ फायदा कभी भी ग्राहकों को नहीं...

Dainik Bhaskar

Mar 15, 2018, 08:25 AM IST
भास्कर संवाददाता| नरसिंहगढ़

शहर में अलग-अलग बैंकों के 7 एटीएम हैं, लेकिन इनका एक साथ फायदा कभी भी ग्राहकों को नहीं मिल पाता है। अधिकांश समय एटीएम बंद रहते हैं। कभी इनमें सर्वर की दिक्कत होती है तो कभी कोई दूसरी तकनीकी खराबी। इसके अलावा कई बार एटीएम मशीन में कैश भी नहीं होता। मंगलवार को हर एटीएम में कुछ ना कुछ खराबी थी। जब इनकी शिकायत बैंक प्रबंधन से की जाती है तो वे एटीएम एजेंसी को इसके लिए जवाबदार बताते हैं। एटीएम एजेंसी से ग्राहक सीधे बात कर नहीं पाते हैं। कुल मिलाकर पिछले कई वर्षों से ग्राहकों की समस्या कम होने की बजाय बढ़ती जा रही है।

मोनू सोनगरा का कहना है कि एटीएम का बंद होना सभी के लिए मुख्य परेशानियों में शामिल हो गया है। कभी एटीएम पासवर्ड गलत बताता है तो कभी कार्ड ही नहीं लेता है। उन्होंने यह भी कहा कि समस्या के समाधान के लिए जब भी एसबीआई की शाखा में जाते हैं तो वहां भी स्टाफ ठीक से बर्ताव नहीं करता है।

नपा उपाध्यक्ष दीपक पालीवाल कहते हैं कि सभी एटीएम के बैंक मैनेजर और ग्राहकों के बीच में संवाद होना चाहिए, जिससे लोग परेशान ना हों। मेड़तवाल संघ के युवा प्रकोष्ठ अध्यक्ष अभिषेक गुप्ता इसके लिए पहली जवाबदारी बैंक प्रबंधन की बताते हैं। उनका कहना है कि एटीएम बंद होने से शहर के व्यापार पर भी प्रभाव पड़ता है। शहर कांग्रेस अध्यक्ष मुबीन खां भैय्यू का कहना है कि एक तरफ तो बैंकों ने कैश जमा करने और निकालने के लिए कार्ड अनिवार्य कर दिए हैं। दूसरी तरफ शहर के ज्यादातर एटीएम या तो बंद रहते हैं या उनमें कैश ही नहीं होता है। लोग परेशान होते रहते हैं। इसका समाधान बहुत जरूरी है।

शिकायत बैंक प्रबंधन से की जाती है तो वे एटीएम एजेंसी को जवाबदार बताते हैं

पिछले कई सालों से चल रही समस्या खत्म होने के बजाए बढ़ी

एटीएम अधिकतर समय बंद रहते हैं।

एटीएम का काम न करना सभी के लिए परेशानी का विषय

शिक्षक पंकज महावर का कहना है कि एटीएम बंद होना मेरे लिए एक बड़ी परेशानी है। क्योंकि आजकल बैंक में इतनी भीड़ रहती है कि छोटे-छोटे कामों के लिए भी घंटों तक खड़े रहना पड़ता है। एटीएम होने से कैश निकालने की समस्या का समाधान तो हो ही जाता है, लेकिन अगर एटीएम इसी तरह लगातार बंद रहेंगे तो लोगों की दिक्कतें और भी बढ़ जाएंगी। अभी भी यही स्थिति है कि कैश निकालने जाते हैं तो स्कूल के समय में कटौती करनी पड़ती है। युवा व्यवसायी लकी सोनी का कहना है कि सबसे ज्यादा समस्या शाजापुर वाले चौराहे के एटीएम में आ रही है। यहां अक्सर शाम 5 बजे तक कैश खत्म हो जाता है,क्योंकि सबसे ज्यादा इसी एटीएम का उपयोग ग्राहक करते हैं। उपयोगिता के हिसाब से इस एटीएम की कैश ट्रांजक्शन की क्षमता बढ़ानी चाहिए।

जवाबदार कौन

सीधे तौर पर जनप्रतिनिधि और स्थानीय प्रशासन। यह लोगों की दिक्कतों से जुड़ा हुआ एक बहुत खास मामला है, लेकिन इसे कभी भी गंभीरता से नहीं लिया गया। अगर बैंक लापरवाही बरत रहे हैं तो उन पर कभी जनप्रतिनिधियों या प्रशासन की तरफ से व्यवस्था सुधारने के लिए कभी कोई दबाव बना ही नहीं है।अलग-अलग क्षेत्रों में सक्रिय अलग-अलग दलों के जनप्रतिनिधि लोगों की ओर से कभी इसे लेकर आवाज नहीं उठाते हैं। ना ही प्रशासन की ओर से बैंक प्रबंधन या एटीएम एजेंसियों से बात की जाती है।

कहीं नहीं दिखता डिजिटल इंडिया का माहौल

डेढ़ साल पहले नोट बंदी के आसपास बड़े जोर शोर से डिजिटल इंडिया का प्रचार हुआ था। उस दौरान पेट्रोल पंप,स्कूलों और दुकानों पर बैंकों ने पोस मशीनें भी लगवाई थीं,लेकिन आज इनका कहीं इस्तेमाल होता नहीं दिखता है। बैंक की स्वैप मशीन भी आधे समय तक काम नहीं करती है।

युवाओं की मदद जरूरी

तकनीकी क्षेत्र में इनकी समझ बहुत व्यापक है। लेकिन शासन-प्रशासन, बैंक प्रबंधन या राजनैतिक दल, कोई भी डिजिटल इंडिया जैसे मॉडर्न कांसेप्ट को लागू करने और लोगों की तकलीफ को दूर करने में युवाओं की मदद लेने में किसी तरह की दिलचस्पी नहीं दिखा रहे हैं।

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